डोनाल्ड ट्रंप-शी जिनपिंग मुलाकात के बाद बदले संकेत, क्या खत्म होने जा रहा है अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर
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संवाद 24 नई दिल्ली । दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं अमेरिका और चीन के बीच लंबे समय से चल रहे ट्रेड वॉर को लेकर अब नरमी के संकेत मिलने लगे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच बीजिंग में हुई अहम बैठक के बाद दोनों देशों के रिश्तों में नई शुरुआत की उम्मीद जताई जा रही है। इस मुलाकात के बाद चीन ने अमेरिकी कंपनियों के लिए अपने बाजार को और खोलने की बात कही है, जिससे वैश्विक व्यापार जगत में हलचल तेज हो गई है।
अमेरिकी कंपनियों के लिए चीन ने खोले नए रास्ते
शिखर वार्ता के दौरान शी जिनपिंग ने साफ संकेत दिए कि चीन अमेरिकी कंपनियों के लिए निवेश और व्यापार के नए अवसर पैदा करने को तैयार है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने से न केवल अमेरिका और चीन बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को फायदा होगा। चीन की ओर से यह बयान ऐसे समय आया है जब पिछले कई वर्षों से दोनों देशों के बीच टैरिफ, टेक्नोलॉजी और सप्लाई चेन को लेकर तनाव बना हुआ था। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन का यह रुख वैश्विक निवेशकों के लिए बड़ा संकेत है। खासतौर पर टेक्नोलॉजी, कृषि, ऑटोमोबाइल और एआई सेक्टर से जुड़ी अमेरिकी कंपनियों को इससे राहत मिल सकती है। बीजिंग में हुई बातचीत में व्यापार के साथ-साथ स्वास्थ्य, पर्यटन और सांस्कृतिक सहयोग जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
ट्रेड वॉर से दोनों देशों को हुआ भारी नुकसान
अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड वॉर की शुरुआत कई साल पहले टैरिफ बढ़ाने और आयात-निर्यात पर प्रतिबंध लगाने से हुई थी। इसके चलते दोनों देशों के कारोबारियों और उद्योगों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा। अमेरिका ने चीनी उत्पादों पर भारी शुल्क लगाया था, जबकि चीन ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए अमेरिकी वस्तुओं पर टैरिफ बढ़ा दिए थे। इस व्यापारिक तनाव का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ा। कई देशों में महंगाई बढ़ी और वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हुई। चीन को अमेरिकी टेक्नोलॉजी प्रतिबंधों से नुकसान हुआ, वहीं अमेरिकी किसानों और निर्यातकों को भी बाजार में चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
बैठक में ट्रेड के साथ ताइवान और ईरान पर भी चर्चा
बीजिंग में हुई इस हाई-प्रोफाइल बैठक में सिर्फ व्यापार ही नहीं बल्कि ताइवान, ईरान युद्ध और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भी बातचीत हुई। शी जिनपिंग ने ताइवान के मुद्दे को अमेरिका-चीन संबंधों का सबसे अहम विषय बताते हुए चेतावनी दी कि गलत कदम दोनों देशों को टकराव की ओर धकेल सकते हैं। वहीं डोनाल्ड ट्रंप ने भी दोनों देशों के बीच स्थिर और मजबूत रिश्तों की जरूरत पर जोर दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका चाहता है कि चीन ईरान संकट को शांत कराने में अहम भूमिका निभाए। इसके अलावा एआई टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर एक्सपोर्ट कंट्रोल पर भी चर्चा हुई।
कारोबार जगत में बढ़ी उम्मीदें
इस मुलाकात के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सकारात्मक माहौल देखने को मिला। निवेशकों को उम्मीद है कि अगर अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक तनाव कम होता है तो वैश्विक अर्थव्यवस्था को नई गति मिल सकती है। अमेरिकी कंपनियां लंबे समय से चीन में व्यापारिक बाधाओं और प्रतिबंधों से परेशान थीं। ऐसे में चीन की ओर से खुले बाजार का संकेत बड़े बदलाव की तरफ इशारा माना जा रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि यह बैठक पूरी तरह से विवाद खत्म करने वाली नहीं थी, लेकिन दोनों देशों के बीच बातचीत का जारी रहना ही बड़ा संदेश है। माना जा रहा है कि आने वाले महीनों में व्यापार समझौतों और निवेश नियमों में कुछ बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
क्या सच में खत्म हो जाएगा ट्रेड वॉर?
हालांकि दोनों देशों के बीच रिश्तों में नरमी के संकेत मिले हैं, लेकिन ताइवान, टेक्नोलॉजी और सुरक्षा से जुड़े कई मुद्दे अब भी तनाव का कारण बने हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और चीन पूरी तरह से अपने मतभेद खत्म नहीं करेंगे, लेकिन आर्थिक नुकसान को देखते हुए दोनों देश टकराव को सीमित रखने की कोशिश जरूर करेंगे। बीजिंग में हुई यह मुलाकात फिलहाल दुनिया को यही संदेश दे रही है कि अमेरिका और चीन अब सीधे टकराव के बजाय बातचीत और समझौते के रास्ते पर आगे बढ़ना चाहते हैं। आने वाले समय में यह तय होगा कि यह सिर्फ कूटनीतिक बयानबाजी थी या वास्तव में ट्रेड वॉर के अंत की शुरुआत।






