
संवाद 24 नई दिल्ली । वैश्विक राजनीति के पटल से इस वक्त की सबसे सनसनीखेज खबर सामने आ रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ बेहद कड़ा रुख अख्तियार करते हुए ‘जमीनी हमले’ (Ground Attack) की संभावनाओं पर काम शुरू कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स और रक्षा विशेषज्ञों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, व्हाइट हाउस और पेंटागन के शीर्ष अधिकारी ईरान के परमाणु ठिकानों और सैन्य बुनियादी ढांचों को निशाना बनाने के लिए एक व्यापक युद्ध योजना तैयार कर रहे हैं। इस खबर ने पूरी दुनिया में हड़कंप मचा दिया है, क्योंकि इससे मध्य पूर्व में एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध की शुरुआत हो सकती है।
रणनीतिक घेराबंदी और सैन्य तैनाती
अमेरिकी सैन्य हलकों में चल रही चर्चाओं के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन ईरान की घेराबंदी करने के लिए खाड़ी देशों में अपने सैन्य अड्डों को और अधिक सक्रिय कर रहा है। ट्रंप का यह कदम ईरान द्वारा हाल के हफ्तों में दी गई धमकियों और क्षेत्र में अमेरिकी हितों पर बढ़ते हमलों के जवाब में देखा जा रहा है। रक्षा जानकारों का मानना है कि इस बार अमेरिका केवल हवाई हमलों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ईरान के भीतर घुसकर सैन्य कार्रवाई करने की रणनीति पर विचार कर रहा है।
वैश्विक बाजार और सुरक्षा पर संकट
अगर अमेरिका और ईरान के बीच सीधी सैन्य जंग शुरू होती है, तो इसका सबसे भयावह असर वैश्विक तेल आपूर्ति पर पड़ेगा। ईरान पहले ही धमकी दे चुका है कि हमले की स्थिति में वह होरमुज जलडमरूमध्य को बंद कर देगा, जहाँ से दुनिया का एक तिहाई कच्चा तेल गुजरता है। इस तनाव की खबर मात्र से ही कच्चे तेल की कीमतों में भारी अस्थिरता देखी जा रही है। संयुक्त राष्ट्र और कई यूरोपीय देशों ने इस संभावित हमले पर चिंता जताते हुए संयम बरतने की अपील की है।
क्या होगा भारत पर असर?
भारत के लिए यह स्थिति बेहद नाजुक है। ईरान के साथ भारत के व्यापारिक और रणनीतिक संबंध काफी महत्वपूर्ण हैं। युद्ध की स्थिति में न केवल कच्चे तेल के दाम आसमान छुएंगे, बल्कि खाड़ी देशों में रहने वाले लाखों भारतीयों की सुरक्षा भी दांव पर लग जाएगी। भारतीय विदेश मंत्रालय इस पूरे घटनाक्रम पर बारीक नजर बनाए हुए है और स्थिति बिगड़ने पर अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए आपातकालीन योजनाएं बना सकता है।






