
संवाद 24 नई दिल्ली । संयुक्त राज्य अमेरिका एक बार फिर एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहाँ से उसकी पूरी प्रशासनिक मशीनरी ठप होने की कगार पर है। वाशिंगटन डी.सी. के गलियारों में इस समय भारी तनाव है क्योंकि संघीय सरकार के पास खर्च चलाने के लिए फंड आज आधी रात को खत्म हो रहे हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिकी कांग्रेस (संसद) के बीच बजट को लेकर जारी यह खींचतान अब ‘शटडाउन’ के खतरे में बदल चुकी है। यदि अगले कुछ घंटों के भीतर कोई ठोस समाधान नहीं निकला, तो शनिवार सुबह से अमेरिका में सरकारी दफ्तरों पर ताले लटकना शुरू हो जाएंगे।
क्यों पैदा हुआ यह संकट?
इस संकट की जड़ में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की वे नीतियां हैं जिन्हें लेकर वह अपनी सत्ता के शुरुआती दिनों से ही काफी मुखर रहे हैं। ट्रंप प्रशासन ने इस बार बजट में अवैध प्रवासियों को रोकने के लिए ‘सीमा सुरक्षा’ (Border Security) और मेक्सिको वॉल के बचे हुए काम के लिए भारी-भरकम फंड की मांग की है। साथ ही, ट्रंप सरकार ने कई विदेशी सहायता कार्यक्रमों और पर्यावरण संबंधी खर्चों में भारी कटौती का प्रस्ताव रखा है। विपक्षी दल (डेमोक्रेट्स) इन कटौतियों और सीमा सुरक्षा के लिए माँगे गए विशेष फंड का कड़ा विरोध कर रहे हैं। सीनेट (Senate) में बजट बिल पारित होने के लिए आवश्यक 60 मतों की जरूरत है, लेकिन दोनों पक्षों के अपने-अपने रुख पर अड़े रहने के कारण यह बिल बीच में ही अटक गया है।
राष्ट्रपति ट्रंप का कड़ा संदेश
राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए स्पष्ट संदेश दिया है कि वह देश की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं करेंगे। उन्होंने संकेत दिए हैं कि यदि उन्हें सीमा सुरक्षा के लिए अपेक्षित फंड नहीं मिलता, तो वह शटडाउन का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। ट्रंप का यह “अमेरिका फर्स्ट” का सख्त रवैया उनके समर्थकों के बीच तो लोकप्रिय है, लेकिन इसने देश के भीतर एक बड़ा राजनीतिक गतिरोध पैदा कर दिया है।
शटडाउन का आम जनता और दुनिया पर असर
अगर शटडाउन लागू होता है, तो इसके परिणाम बेहद गंभीर होंगे:
बिना वेतन काम: लगभग 20 लाख से अधिक संघीय कर्मचारी और सैन्य कर्मियों को बिना वेतन के काम करना पड़ सकता है या उन्हें ‘अनपेड लीव’ पर भेजा जा सकता है।
ठप होंगी सेवाएँ: पासपोर्ट सेवाएँ, नेशनल पार्क, और कई सरकारी वेबसाइटें बंद हो जाएंगी। केवल वही सेवाएँ जारी रहेंगी जो राष्ट्रीय सुरक्षा और जीवन रक्षक कार्यों से जुड़ी हैं।
वैश्विक बाजार में हलचल: अमेरिका में राजनीतिक अस्थिरता का सीधा असर भारत समेत पूरी दुनिया के शेयर बाजारों पर पड़ेगा। डॉलर की मजबूती और वैश्विक तेल की कीमतों में भी उतार-चढ़ाव देखा जा सकता है।
अतीत के अनुभव
अमेरिका ने अतीत में भी कई बार शटडाउन का सामना किया है। सबसे लंबा शटडाउन 2018-2019 में 35 दिनों तक चला था। हर बार राजनीतिक दल किसी न किसी समझौते पर पहुँचते हैं, लेकिन यह प्रक्रिया अक्सर देश को किनारे तक ले जाती है।






