
संवाद 24 दिल्ली। नेपाल की राजनीति इन दिनों गंभीर उथल-पुथल के दौर से गुजर रही है। देश की सबसे पुरानी और ऐतिहासिक राजनीतिक पार्टी नेपाली कांग्रेस एक गहरे आंतरिक संकट में फंसी दिखाई दे रही है। पार्टी के भीतर नेतृत्व, संगठन और भविष्य की दिशा को लेकर चल रही खींचतान अब खुलकर सामने आ गई है, जिससे इसके टूटने की आशंकाएं भी तेज हो गई हैं।
विशेष महाधिवेशन बना विवाद की जड़
नेपाली कांग्रेस में मौजूदा टकराव की सबसे बड़ी वजह विशेष महाधिवेशन को लेकर मतभेद हैं। पार्टी के एक धड़े का मानना है कि समय रहते विशेष महाधिवेशन बुलाकर संगठनात्मक सुधार और नेतृत्व पर चर्चा होनी चाहिए। वहीं दूसरा गुट इसे अनावश्यक बताते हुए नियमित महाधिवेशन तक इंतजार करने के पक्ष में है।
युवा बनाम पुराना नेतृत्व
पार्टी के भीतर यह संघर्ष केवल प्रक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सोच की लड़ाई भी बन चुका है। एक ओर युवा नेता बदलाव, पारदर्शिता और नई रणनीति की मांग कर रहे हैं, तो दूसरी ओर वरिष्ठ नेतृत्व अनुभव और स्थिरता को प्राथमिकता देने की बात कह रहा है। यही टकराव पार्टी को दो स्पष्ट खेमों में बांटता दिख रहा है।
शेर बहादुर देउबा की भूमिका पर सवाल
पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा की भूमिका भी विवाद के केंद्र में है। आलोचकों का आरोप है कि मौजूदा नेतृत्व जमीनी कार्यकर्ताओं की अपेक्षाओं को नजरअंदाज कर रहा है। वहीं समर्थकों का कहना है कि देउबा अनुभव के सहारे पार्टी को टूट से बचाए रखने की कोशिश कर रहे हैं।
संगठनात्मक ढांचे पर उठे गंभीर प्रश्न
नेपाली कांग्रेस के जिला और प्रदेश स्तर के कई नेताओं ने संगठनात्मक ढांचे को लेकर असंतोष जाहिर किया है। उनका कहना है कि निर्णय प्रक्रिया में निचले स्तर के कार्यकर्ताओं की भागीदारी कम होती जा रही है, जिससे पार्टी का जनाधार कमजोर हो रहा है।
चुनावी भविष्य पर मंडराता खतरा
इस आंतरिक कलह का सीधा असर आने वाले चुनावों पर पड़ सकता है। यदि पार्टी एकजुट होकर चुनावी रणनीति तय नहीं कर पाती, तो इसका लाभ विरोधी दलों को मिल सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विभाजन की स्थिति में नेपाली कांग्रेस की स्थिति काफी कमजोर हो सकती है। पार्टी के कुछ नेता मानते हैं कि यह संकट आत्ममंथन का अवसर भी हो सकता है। यदि समय रहते संवाद और समझौते का रास्ता निकाला गया, तो नेपाली कांग्रेस पहले से अधिक मजबूत होकर उभर सकती है। लेकिन यदि टकराव यूं ही बढ़ता रहा, तो विभाजन की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
नेपाल की राजनीति पर गहरा असर
नेपाली कांग्रेस का भविष्य केवल एक पार्टी तक सीमित नहीं है। इसका सीधा असर नेपाल की समग्र राजनीति और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर पड़ेगा। ऐसे में पूरे देश की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या नेपाली कांग्रेस अपने आंतरिक मतभेद सुलझा पाएगी या इतिहास के एक निर्णायक मोड़ पर बंट जाएगी।






