जल योग (एक्वा योग): पानी की लहरों के बीच तन और मन को संतुलित करने की अनूठी विद्या

संवाद 24 डेस्क। योग का नाम सुनते ही मन में अक्सर चटाई पर बैठकर ध्यान लगाने, सूर्य नमस्कार करने या विभिन्न योगासनों का अभ्यास करने की तस्वीर उभरती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि पानी के भीतर या पानी की सतह पर भी योग से प्रेरित अभ्यास किए जा सकते हैं? इसी विचार से जुड़ी एक आधुनिक अभ्यास पद्धति है जल योग, जिसे एक्वा योग भी कहा जाता है। इसमें पानी के प्राकृतिक गुणों का उपयोग करते हुए शरीर की गतिशीलता, संतुलन, श्वास और मानसिक एकाग्रता पर ध्यान दिया जाता है।
जल योग की खासियत यह है कि पानी शरीर को सहारा देता है और कुछ गतिविधियों के दौरान जोड़ों पर पड़ने वाला भार कम कर सकता है। वहीं, पानी का प्रतिरोध मांसपेशियों को सक्रिय रखने में मदद करता है। इस कारण यह अभ्यास उन लोगों के लिए भी एक आकर्षक विकल्प बन सकता है, जिन्हें जमीन पर किए जाने वाले कुछ व्यायाम कठिन लगते हैं। हालांकि, जल योग को केवल पानी में खड़े होकर योगासन करने तक सीमित समझना उचित नहीं होगा। इसकी प्रकृति, कठिनाई और संभावित लाभ पानी की गहराई, अभ्यास के प्रकार, व्यक्ति की शारीरिक क्षमता और प्रशिक्षक के मार्गदर्शन पर निर्भर करते हैं।

जल योग क्या है? जानिए इस अनूठी पद्धति की अवधारणा
जल योग ऐसी अभ्यास पद्धति है जिसमें पानी के भीतर या उथले पानी में खड़े होकर श्वास संबंधी अभ्यास, शरीर को धीरे-धीरे खींचने वाली गतिविधियां, संतुलन के अभ्यास और योग से प्रेरित सरल मुद्राएं की जाती हैं। कुछ आधुनिक रूपों में पानी की सतह पर विशेष तैरने वाले उपकरणों की सहायता से भी अभ्यास कराया जाता है। इसमें योग की नियंत्रित गतिविधियों को पानी के वातावरण के अनुरूप ढाला जाता है।
पानी में शरीर की गति जमीन की तुलना में अलग होती है। पानी का उत्प्लावन बल शरीर के कुछ भार को संभालता है, जबकि पानी का प्रतिरोध हाथ-पैरों को हिलाने में अतिरिक्त चुनौती पैदा कर सकता है। उदाहरण के लिए, पानी में धीरे-धीरे हाथ फैलाना, पैरों को ऊपर उठाना या शरीर को एक स्थिति में स्थिर रखना जमीन पर किए गए समान अभ्यास से अलग अनुभव देता है।
यही कारण है कि जल योग में सहारा और चुनौती, दोनों का संतुलन दिखाई देता है। पानी शरीर को कुछ गतिविधियों में सहजता प्रदान करता है, लेकिन साथ ही मांसपेशियों को सक्रिय रखने के लिए प्रतिरोध भी उत्पन्न करता है। इस प्रकार अभ्यास करने वाले व्यक्ति को अपनी गति, श्वास और शरीर की स्थिति के प्रति सजग रहना पड़ता है।
यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना आवश्यक है। जल योग और एक्वा एरोबिक्स पूरी तरह एक ही चीज नहीं हैं। एक्वा एरोबिक्स में प्रायः हृदय गति बढ़ाने वाली लयबद्ध गतिविधियों पर जोर दिया जाता है, जबकि जल योग में नियंत्रित गति, श्वास के प्रति जागरूकता, शरीर के संतुलन और मानसिक एकाग्रता को विशेष स्थान दिया जा सकता है। हालांकि, आधुनिक कक्षाओं में इन दोनों पद्धतियों के कुछ तत्व एक साथ भी देखने को मिलते हैं।

जल योग का इतिहास: परंपरा और आधुनिक जीवनशैली का संगम
योग की जड़ें भारतीय परंपरा में गहराई तक फैली हुई हैं। भारतीय संस्कृति में जल को जीवन, शुद्धता, संतुलन और प्रकृति के प्रतीक के रूप में देखा गया है। नदियों, सरोवरों और जलाशयों का धार्मिक, सांस्कृतिक तथा व्यावहारिक महत्व प्राचीन काल से रहा है। हालांकि, आधुनिक अर्थ में एक्वा योग को किसी एक प्राचीन ग्रंथ, ऋषि या ऐतिहासिक काल से जोड़ने के लिए पर्याप्त प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।
समकालीन जल योग का विकास जल-आधारित व्यायाम, शारीरिक पुनर्वास की गतिविधियों और योग की नियंत्रित मुद्राओं के मेल से हुआ है। आधुनिक जीवन में लंबे समय तक बैठने, शारीरिक निष्क्रियता और मानसिक तनाव जैसी समस्याओं के बढ़ने के साथ पानी में किए जाने वाले कम प्रभाव वाले व्यायामों के प्रति रुचि भी बढ़ी है।
इस पद्धति में पारंपरिक योग से प्रेरित श्वास और एकाग्रता के अभ्यासों को पानी के सहारे तथा प्रतिरोध के साथ अपनाया जाता है। इससे व्यक्ति को शारीरिक गतिविधियों के साथ अपने शरीर की स्थिति और गति पर ध्यान देने का अवसर मिलता है।
इसलिए जल योग को योग की किसी प्राचीन, स्वतंत्र और सर्वमान्य शाखा के रूप में प्रस्तुत करने के बजाय एक आधुनिक अभ्यास शैली के रूप में देखना अधिक तथ्यपरक है। इसका उद्देश्य पानी में कठिन मुद्राएं करना नहीं, बल्कि सुरक्षित वातावरण में सहज गतिविधियों के माध्यम से शारीरिक सक्रियता और मानसिक सजगता को बढ़ावा देना है।

पानी में योग करने के पीछे छिपा विज्ञान
जल योग की उपयोगिता समझने के लिए पानी के तीन प्रमुख गुणों को जानना जरूरी है। पहला है उत्प्लावन बल, जो शरीर के कुछ भार को संभालता है। दूसरा है जल प्रतिरोध, जिसके कारण पानी में हाथ-पैर चलाने के लिए मांसपेशियों को काम करना पड़ता है। तीसरा है पानी का दबाव, जो शरीर के जलमग्न हिस्सों पर चारों ओर से प्रभाव डालता है।
इन गुणों के कारण पानी में खड़े होकर किए जाने वाले कुछ अभ्यास जोड़ों पर अपेक्षाकृत कम भार डाल सकते हैं। उदाहरण के लिए, कमर तक पानी में खड़े होकर धीरे-धीरे चलना या हाथों को नियंत्रित ढंग से फैलाना जमीन पर किए जाने वाले समान अभ्यास से अलग महसूस होता है। पानी शरीर की गति को धीमा कर सकता है, जिससे व्यक्ति को अपनी गतिविधियों पर ध्यान देने का अवसर मिलता है।
दूसरी ओर, पानी का प्रतिरोध मांसपेशियों को अतिरिक्त चुनौती देता है। हाथों और पैरों को पानी में आगे-पीछे ले जाने के लिए प्रयास करना पड़ता है। इस कारण पानी में की जाने वाली कुछ गतिविधियां मांसपेशियों की सक्रियता और शारीरिक सहनशक्ति बनाए रखने में सहायक हो सकती हैं।
हालांकि, पानी में हर गतिविधि आसान नहीं होती। शरीर को स्थिर रखना, दिशा बदलना या पानी के प्रतिरोध के विरुद्ध तेजी से हाथ-पैर चलाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसलिए जल योग को पूरी तरह श्रम-मुक्त व्यायाम मानना गलत होगा। इसकी कठिनाई अभ्यास की प्रकृति और पानी की गहराई के अनुसार बदलती है।

शरीर को मिलने वाले संभावित लाभ
जल योग का एक प्रमुख लाभ यह हो सकता है कि यह व्यक्ति को कम प्रभाव वाले वातावरण में शारीरिक रूप से सक्रिय रहने का अवसर देता है। विशेषकर उन लोगों के लिए, जिन्हें जमीन पर कुछ गतिविधियां करते समय जोड़ों में असुविधा होती है, पानी में किए जाने वाले उपयुक्त अभ्यास उपयोगी विकल्प बन सकते हैं।
घुटनों और कूल्हों के अस्थिसंधिशोथ से प्रभावित लोगों पर किए गए जल-आधारित व्यायाम संबंधी अध्ययनों में कुछ स्थितियों में दर्द में अल्पकालिक कमी और शारीरिक कार्यक्षमता में सुधार के संकेत मिले हैं। हालांकि, इन निष्कर्षों को जल योग के हर रूप पर सीधे लागू नहीं किया जा सकता। जल-आधारित व्यायाम और विशेष रूप से जल योग के प्रभावों में अंतर हो सकता है।
नियमित और उचित अभ्यास से मांसपेशियों की सक्रियता, शरीर की गतिशीलता और सामान्य शारीरिक सहनशक्ति बनाए रखने में सहायता मिल सकती है। पानी का प्रतिरोध मांसपेशियों को काम करने की चुनौती देता है, जबकि उत्प्लावन बल कुछ गतिविधियों में शरीर को सहारा प्रदान करता है। यह संयोजन व्यक्ति को अपनी क्षमता के अनुसार गतिविधियां चुनने में मदद कर सकता है।
जल योग में संतुलन के अभ्यास भी शामिल किए जा सकते हैं। पानी में शरीर की स्थिति बदलने पर व्यक्ति को अपने धड़, पैरों और हाथों की गति के बीच तालमेल बैठाना पड़ता है। इससे शरीर के प्रति जागरूकता बढ़ाने का अवसर मिल सकता है। फिर भी, बेहतर संतुलन या मांसपेशियों की मजबूती की मात्रा व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य, अभ्यास की नियमितता और गतिविधियों के प्रकार पर निर्भर करेगी।

मानसिक शांति और तनाव प्रबंधन में जल योग की भूमिका
जल योग का महत्व केवल शारीरिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है। पानी का शांत वातावरण, नियंत्रित गति और श्वास पर ध्यान व्यक्ति को दैनिक भागदौड़ से कुछ समय के लिए अलग होने का अवसर दे सकते हैं। जब अभ्यास करने वाला व्यक्ति अपनी गतिविधियों को जल्दबाजी के बजाय सहज गति से करता है, तो वह वर्तमान क्षण पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकता है।
योग में श्वास के प्रति जागरूकता को महत्वपूर्ण माना जाता है। जल योग में भी प्रशिक्षक की देखरेख में सामान्य और सहज श्वास लेते हुए गतिविधियां की जा सकती हैं। इससे अभ्यास को ध्यानपूर्ण अनुभव बनाया जा सकता है। पानी की हल्की गति और आसपास का शांत वातावरण कुछ लोगों को मानसिक रूप से आरामदायक लग सकता है, हालांकि यह अनुभव सभी के लिए समान नहीं होता।
जल योग के दौरान व्यक्ति अपनी शारीरिक गतिविधियों और श्वास के बीच तालमेल बनाने का प्रयास करता है। इससे उसे अपने शरीर की सीमाओं को पहचानने और गतिविधियों को अपनी क्षमता के अनुसार नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
यह समझना भी जरूरी है कि जल योग किसी मानसिक स्वास्थ्य समस्या का अपने आप में उपचार नहीं है। यदि किसी व्यक्ति को लंबे समय तक चिंता, उदासी, नींद की परेशानी या तनाव का सामना करना पड़ रहा है, तो उपयुक्त स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सहायता लेना महत्वपूर्ण है। जल योग को स्वस्थ दिनचर्या के एक सहायक हिस्से के रूप में अपनाया जा सकता है।

जल योग के प्रमुख प्रकार और अभ्यास की शैलियां
जल योग की कोई एक सार्वभौमिक रूप से निर्धारित शैली नहीं है। अलग-अलग प्रशिक्षक और केंद्र अपनी पद्धति के अनुसार इसके अभ्यास तैयार करते हैं। सामान्य तौर पर इसे कुछ प्रमुख रूपों में समझा जा सकता है।
पहला है उथले पानी में योग। इसमें व्यक्ति स्विमिंग पूल के ऐसे हिस्से में खड़ा होता है, जहां उसके पैर आसानी से तल तक पहुंच सकें। यहां सरल खिंचाव, हाथों की गतिविधियां, नियंत्रित श्वास और शरीर की मुद्रा पर ध्यान दिया जा सकता है। शुरुआती लोगों के लिए प्रशिक्षक की निगरानी में यह एक सहज परिचय बन सकता है।
दूसरा है पानी में संतुलन और गतिशीलता के अभ्यास। इसमें धीरे-धीरे चलना, पैरों को नियंत्रित ढंग से आगे-पीछे ले जाना और धड़ की सहज गतिविधियां शामिल हो सकती हैं। इन अभ्यासों का उद्देश्य शरीर को गतिशील रखना और गतिविधियों के बीच समन्वय विकसित करना होता है।
तीसरा है जल-आधारित विश्राम अभ्यास। इसमें पानी के सुरक्षित और उपयुक्त वातावरण में शरीर को सहज स्थिति में रखते हुए श्वास तथा मानसिक एकाग्रता पर ध्यान दिया जाता है। इस प्रकार के अभ्यास में पानी के भीतर सांस रोकना या चेहरे को डुबोना आवश्यक नहीं है।
चौथा है तैरने वाले उपकरणों की सहायता से किया जाने वाला अभ्यास। कुछ आधुनिक कक्षाओं में विशेष तैरने वाले मंच या सहायक उपकरण इस्तेमाल किए जाते हैं। ऐसे अभ्यासों में शरीर को स्थिर रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है, इसलिए इन्हें प्रशिक्षित मार्गदर्शन और पर्याप्त सुरक्षा के बिना नहीं करना चाहिए।
इन सभी शैलियों में मुख्य अंतर पानी की गहराई, सहारे की उपलब्धता, गतिविधियों की कठिनाई और अभ्यास के उद्देश्य का होता है।

शुरुआत कैसे करें? सही तैयारी क्यों जरूरी है?
जल योग शुरू करने से पहले ऐसा स्विमिंग पूल या जल-स्थान चुनना चाहिए, जहां पानी की गुणवत्ता, प्रवेश और निकास की व्यवस्था तथा सुरक्षा संबंधी सुविधाएं उचित हों। शुरुआती अभ्यास उथले पानी में और प्रशिक्षक की निगरानी में करना बेहतर है। पानी में सहज महसूस करना और सुरक्षित तरीके से बाहर निकल पाना भी महत्वपूर्ण है।
अभ्यास से पहले कुछ समय शरीर को पानी के वातावरण के अनुकूल होने देना चाहिए। इसके बाद हल्की गतिविधियों, जैसे सामान्य गति से चलने, हाथों को धीरे-धीरे हिलाने और कंधों को सहज रूप से घुमाने से शुरुआत की जा सकती है। गतिविधियां ऐसी होनी चाहिए जिनमें व्यक्ति बिना जोर लगाए सहजता से सांस ले सके।
शुरुआत में लंबे समय तक अभ्यास करने के बजाय अपनी सुविधा और क्षमता के अनुसार थोड़ी अवधि चुनना उचित है। किसी एक मुद्रा को सही दिखाने के लिए शरीर पर जोर डालने की जरूरत नहीं है। यदि दर्द, चक्कर, असामान्य सांस फूलना या कमजोरी महसूस हो, तो अभ्यास रोककर सुरक्षित स्थान पर आना चाहिए।
जल योग का उद्देश्य कठिन मुद्राएं करने की प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि सुरक्षित और नियमित शारीरिक गतिविधि के माध्यम से शरीर तथा मन के साथ बेहतर तालमेल विकसित करना है।

किन लोगों के लिए जल योग उपयोगी हो सकता है?
जल योग उन वयस्कों के लिए एक विकल्प हो सकता है जो कम प्रभाव वाली शारीरिक गतिविधि पसंद करते हैं। ऐसे लोग जिन्हें जमीन पर चलने या व्यायाम करने में असुविधा होती है, वे चिकित्सकीय सलाह के बाद उपयुक्त जल-आधारित अभ्यासों पर विचार कर सकते हैं। कुछ वरिष्ठ नागरिकों के लिए भी प्रशिक्षित देखरेख में पानी में किए जाने वाले सरल अभ्यास उपयोगी हो सकते हैं।
हालांकि, उम्र या किसी विशेष स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर जल योग को अपने आप उपयुक्त मान लेना सही नहीं है। जोड़ों की गंभीर समस्या, हाल की शल्यक्रिया, हृदय या श्वसन संबंधी रोग, संतुलन की परेशानी अथवा अन्य चिकित्सकीय स्थितियों में अभ्यास का चयन स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह से करना चाहिए।
पानी में सहज महसूस न करने वाले लोगों के लिए भी कोई दबाव नहीं होना चाहिए। योग के अन्य रूप, सामान्य चलना या प्रशिक्षित मार्गदर्शन में किए जाने वाले जमीन आधारित व्यायाम भी अच्छे विकल्प हो सकते हैं। सबसे उपयुक्त गतिविधि वही है जो व्यक्ति की आवश्यकताओं और क्षमताओं के अनुकूल हो।

जल योग में सुरक्षा: किन बातों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए?
पानी में अभ्यास करते समय सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। जल योग के लिए तैराक होना हर स्थिति में अनिवार्य नहीं है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि बिना तैराकी कौशल वाला व्यक्ति किसी भी गहराई में सुरक्षित रहेगा। ऐसे व्यक्ति को केवल उचित उथले क्षेत्र में, प्रशिक्षक की सीधी निगरानी में अभ्यास करना चाहिए। गहरे पानी में अकेले अभ्यास नहीं करना चाहिए।
पानी के भीतर सांस रोकने, तेजी से सांस लेने या सांस संबंधी कठिन अभ्यास करने से बचना चाहिए। श्वास के सामान्य अभ्यास पानी की सतह के ऊपर और सहज तरीके से किए जा सकते हैं। फिसलन वाली सतह, अचानक गहराई में बदलाव और अस्थिर उपकरण दुर्घटना का कारण बन सकते हैं। इसलिए पूल के नियमों का पालन करना और सुरक्षित प्रवेश तथा निकास का रास्ता जानना आवश्यक है।
पानी का तापमान भी महत्वपूर्ण है। बहुत ठंडा या अत्यधिक गर्म पानी कुछ लोगों के लिए असुविधाजनक हो सकता है। यदि अभ्यास के दौरान असामान्य थकान, सीने में दर्द, चक्कर या सांस लेने में परेशानी हो, तो तुरंत गतिविधि रोककर आवश्यक सहायता लेनी चाहिए।
किसी संक्रमण, खुले घाव या ऐसी चिकित्सकीय स्थिति में जिसमें पूल में जाना उचित न हो, पहले स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना चाहिए। अभ्यास का स्थान स्वच्छ होना चाहिए और पानी की गुणवत्ता पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।

जल योग से जुड़े भ्रम और वास्तविकता
जल योग को लेकर पहला भ्रम यह है कि पानी में किए गए सभी व्यायाम जमीन पर किए जाने वाले व्यायाम से बेहतर होते हैं। वास्तविकता यह है कि दोनों के अपने लाभ और सीमाएं हैं। जल-आधारित व्यायाम कुछ लोगों के लिए जोड़ों पर कम भार डाल सकते हैं, जबकि जमीन पर किए जाने वाले अभ्यास हड्डियों पर भार डालने वाली गतिविधियों के लिए अधिक उपयुक्त हो सकते हैं। किस प्रकार का व्यायाम बेहतर होगा, यह व्यक्ति के उद्देश्य और स्वास्थ्य पर निर्भर करता है।
दूसरा भ्रम यह है कि जल योग से सभी रोग ठीक किए जा सकते हैं। ऐसा कोई सार्वभौमिक वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। जल योग को किसी बीमारी की निश्चित चिकित्सा, दवाओं के विकल्प या तत्काल परिणाम देने वाली पद्धति के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं है।
तीसरा भ्रम यह है कि पानी में अभ्यास करने के लिए बहुत अधिक कठिन मुद्राएं सीखना जरूरी है। वास्तव में, सरल गतिविधियों और नियंत्रित गति से भी शुरुआत की जा सकती है। जल योग की गुणवत्ता इस बात से निर्धारित नहीं होती कि व्यक्ति कितनी जटिल मुद्रा कर सकता है, बल्कि इस बात से होती है कि अभ्यास कितना सुरक्षित, नियमित और उसकी क्षमता के अनुकूल है।
एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू यह है कि केवल पानी में अभ्यास करने से शारीरिक स्वास्थ्य के सभी लक्ष्य पूरे नहीं हो जाते। संतुलित दिनचर्या में पर्याप्त नींद, उचित पोषण और नियमित शारीरिक गतिविधि का भी महत्व है।

आधुनिक जीवनशैली में जल योग की प्रासंगिकता
आज की जीवनशैली में लंबे समय तक बैठकर काम करना, शारीरिक गतिविधियों में कमी और मानसिक दबाव जैसी चुनौतियां आम हैं। ऐसे में जल योग कुछ लोगों को व्यायाम के प्रति आकर्षित करने का एक नया माध्यम दे सकता है। पानी में शरीर को मिलने वाला सहारा और गतिविधियों का अलग अनुभव उन लोगों के लिए उपयोगी हो सकता है जो पारंपरिक व्यायाम को कठिन मानते हैं।
इस अभ्यास का एक सकारात्मक पहलू यह भी है कि इसमें व्यक्ति अपनी गति के अनुसार गतिविधियों को ढाल सकता है। शुरुआती स्तर पर सरल अभ्यासों से शुरुआत की जा सकती है और आवश्यकता के अनुसार कठिनाई को धीरे-धीरे बढ़ाया जा सकता है। हालांकि, इसके लिए प्रशिक्षक का मार्गदर्शन और सुरक्षा नियमों का पालन आवश्यक है।
स्विमिंग पूल की उपलब्धता और खर्च कुछ लोगों के लिए बाधा बन सकते हैं। इसलिए इसे सभी के लिए अनिवार्य या एकमात्र विकल्प मानने के बजाय उपलब्ध संसाधनों और व्यक्तिगत आवश्यकताओं के अनुसार अपनाना अधिक व्यावहारिक है।
निष्कर्ष: पानी के साथ तालमेल, अपने शरीर के प्रति जागरूकता
जल योग योग से प्रेरित गतिविधियों और पानी के प्राकृतिक गुणों का ऐसा संयोजन है, जो शारीरिक सक्रियता, गतिशीलता, संतुलन और मानसिक एकाग्रता को बढ़ावा देने का अवसर प्रदान कर सकता है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि पानी शरीर को कुछ स्थितियों में सहारा देता है, जबकि उसका प्रतिरोध गतिविधियों को चुनौतीपूर्ण भी बना सकता है।
हालांकि, इसके लाभों को समझते समय जल-आधारित व्यायाम पर उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाणों और जल योग के विशिष्ट प्रभावों के बीच अंतर बनाए रखना आवश्यक है। सही प्रशिक्षण, उपयुक्त वातावरण और सुरक्षा नियमों के साथ इसे स्वस्थ दिनचर्या का हिस्सा बनाया जा सकता है।

अंततः जल योग का सार केवल पानी में अभ्यास करना नहीं, बल्कि अपनी शारीरिक क्षमता को समझते हुए सजगता, सहजता और संतुलन के साथ आगे बढ़ना है। पानी की लहरों के बीच किया गया यह अभ्यास व्यक्ति को अपनी गति पर ध्यान देने, शरीर की सीमाओं को समझने और शारीरिक गतिविधि को अधिक सहज अनुभव में बदलने का अवसर दे सकता है।

Radha Singh
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