
संवाद 24 डेस्क। प्रकृति ने मानव स्वास्थ्य की रक्षा के लिए अनेक औषधीय पौधे प्रदान किए हैं, जिनका उपयोग सदियों से आयुर्वेद और लोक चिकित्सा में किया जाता रहा है। इन्हीं अमूल्य जड़ी-बूटियों में पुनर्नवा का विशेष स्थान है। संस्कृत में “पुनर्नवा” का अर्थ है—फिर से नया होने वाला। इसका नाम ही इसके गुणों का परिचायक है, क्योंकि यह शरीर को नई ऊर्जा प्रदान करने, क्षतिग्रस्त ऊतकों के पुनर्निर्माण में सहायता करने तथा विभिन्न शारीरिक विकारों को दूर करने के लिए प्रसिद्ध है।
आयुर्वेद में पुनर्नवा मूल (जड़) को विशेष महत्व दिया गया है। इसका उपयोग मूत्र संबंधी रोगों, सूजन, यकृत विकार, गुर्दों की कार्यक्षमता में सुधार, जोड़ों के दर्द तथा शरीर में जल संचय जैसी समस्याओं में किया जाता है। आधुनिक वैज्ञानिक शोध भी इसके अनेक औषधीय गुणों की पुष्टि कर चुके हैं। यही कारण है कि आज पुनर्नवा मूल का उपयोग आयुर्वेदिक औषधियों, चूर्ण, काढ़े, कैप्सूल तथा स्वास्थ्य पूरकों में व्यापक रूप से किया जा रहा है।
पुनर्नवा क्या है?
पुनर्नवा एक बहुवर्षीय औषधीय पौधा है, जिसका वानस्पतिक नाम Boerhavia diffusa है। यह Nyctaginaceae कुल का सदस्य है। भारत के लगभग सभी राज्यों में यह प्राकृतिक रूप से पाया जाता है। वर्षा ऋतु में यह तेजी से बढ़ता है और सूखने के बाद पुनः विकसित होने की क्षमता रखता है, इसलिए इसे “पुनर्नवा” कहा जाता है।
इस पौधे की पत्तियाँ गोलाकार, तना फैलावदार तथा फूल छोटे गुलाबी या लाल रंग के होते हैं। यद्यपि इसकी पत्तियाँ और संपूर्ण पौधा भी औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं, किंतु इसकी जड़ अर्थात पुनर्नवा मूल को सबसे अधिक प्रभावी माना जाता है।
आयुर्वेद में पुनर्नवा मूल का महत्व
आयुर्वेदिक ग्रंथों में पुनर्नवा को श्रेष्ठ मूत्रल (Diuretic), शोथहर (सूजन कम करने वाली), रसायन, यकृत संरक्षक तथा वात-कफ शामक औषधि माना गया है।
आयुर्वेद के अनुसार पुनर्नवा मुख्य रूप से निम्न दोषों को संतुलित करने में सहायक मानी जाती है—
- वात दोष
- कफ दोष
- शरीर में जमा अतिरिक्त जल
- सूजन एवं विषैले तत्व
पुनर्नवा शरीर की प्राकृतिक शुद्धिकरण प्रक्रिया को सक्रिय करने में सहायता करती है तथा चयापचय (Metabolism) को संतुलित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
पुनर्नवा मूल की पहचान
एक अच्छी गुणवत्ता वाली पुनर्नवा मूल की कुछ प्रमुख विशेषताएँ निम्न हैं—
- रंग हल्का भूरा या गहरा कत्थई।
- स्वाद हल्का कड़वा और कसैला।
- हल्की विशिष्ट सुगंध।
- अंदर का भाग पीले या क्रीम रंग का।
- अच्छी तरह सूखने पर कठोर लेकिन आसानी से चूर्ण बनने योग्य।
औषधीय उपयोग के लिए हमेशा शुद्ध एवं प्रमाणित स्रोत से प्राप्त पुनर्नवा मूल का ही प्रयोग करना चाहिए।
पुनर्नवा मूल के प्रमुख रासायनिक घटक
पुनर्नवा मूल में अनेक जैव सक्रिय (Bioactive) तत्व पाए जाते हैं, जो इसके औषधीय गुणों के लिए उत्तरदायी माने जाते हैं।
इनमें प्रमुख हैं—
- एल्केलॉयड (Punarnavine)
- फ्लेवोनॉयड्स
- बोएरहैविक एसिड
- लिग्नान
- स्टेरॉल
- बीटा-सिटोस्टेरॉल
- फिनोलिक यौगिक
- पोटैशियम लवण
- आवश्यक अमीनो अम्ल
- प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट
ये सभी तत्व मिलकर शरीर में सूजन कम करने, कोशिकाओं को ऑक्सीडेटिव क्षति से बचाने तथा विभिन्न अंगों के कार्यों को बेहतर बनाने में सहायक माने जाते हैं।
पुनर्नवा मूल के औषधीय गुण
पुनर्नवा मूल में अनेक चिकित्सकीय गुण पाए जाते हैं, जिनके कारण यह आयुर्वेद में अत्यंत लोकप्रिय है।
- प्राकृतिक मूत्रल (Diuretic)
पुनर्नवा शरीर में जमा अतिरिक्त पानी को मूत्र के माध्यम से बाहर निकालने में सहायता करती है। इससे शरीर की सूजन कम हो सकती है तथा गुर्दों पर अतिरिक्त दबाव कम पड़ता है। - सूजन कम करने में सहायक
इसमें उपस्थित प्राकृतिक एंटी-इन्फ्लेमेटरी तत्व शरीर के विभिन्न भागों की सूजन को कम करने में मदद करते हैं। जोड़ों के दर्द तथा गठिया जैसी स्थितियों में इसका उपयोग लाभकारी माना जाता है। - शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट
पुनर्नवा मूल कोशिकाओं को मुक्त कणों (Free Radicals) से होने वाले नुकसान से बचाने में सहायक मानी जाती है। इससे उम्र बढ़ने की प्रक्रिया धीमी हो सकती है तथा कई दीर्घकालिक रोगों का जोखिम कम हो सकता है। - यकृत की सुरक्षा
आयुर्वेद में इसे यकृत को स्वस्थ रखने वाली प्रमुख जड़ी-बूटियों में गिना गया है। यह यकृत की कार्यक्षमता को बनाए रखने तथा विषैले पदार्थों के प्रभाव को कम करने में सहायक मानी जाती है। - प्रतिरक्षा प्रणाली को समर्थन
इसमें पाए जाने वाले जैव सक्रिय तत्व शरीर की प्राकृतिक रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में योगदान दे सकते हैं।
पुनर्नवा मूल क्यों है विशेष?
आज के समय में अनियमित खान-पान, तनाव, प्रदूषण और शारीरिक निष्क्रियता के कारण शरीर में विषैले तत्वों का संचय बढ़ता जा रहा है। ऐसे में पुनर्नवा मूल शरीर की प्राकृतिक सफाई प्रक्रिया को सहयोग देने वाली महत्वपूर्ण आयुर्वेदिक औषधि मानी जाती है।
विशेषज्ञों के अनुसार इसका नियमित और उचित मात्रा में उपयोग—
- शरीर से अतिरिक्त जल निकालने,
- सूजन कम करने,
- यकृत और गुर्दों के स्वास्थ्य को समर्थन देने,
- पाचन क्रिया को बेहतर बनाने,
- तथा संपूर्ण स्वास्थ्य को संतुलित रखने में सहायक हो सकता है।
हालाँकि किसी भी औषधीय जड़ी-बूटी का सेवन चिकित्सकीय सलाह के अनुसार ही करना चाहिए, विशेषकर यदि व्यक्ति गर्भवती हो, स्तनपान करा रही हो या पहले से किसी गंभीर बीमारी की दवा ले रहा हो।
पुनर्नवा मूल के प्रमुख स्वास्थ्य लाभ
- गुर्दों (किडनी) के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी
पुनर्नवा मूल का सबसे प्रसिद्ध गुण इसका प्राकृतिक मूत्रल (Diuretic) प्रभाव है। यह शरीर में जमा अतिरिक्त पानी और अपशिष्ट पदार्थों को मूत्र के माध्यम से बाहर निकालने में सहायता करती है।
आयुर्वेद में इसका उपयोग गुर्दों की कार्यक्षमता को सहयोग देने तथा मूत्र संबंधी समस्याओं में किया जाता है। यदि शरीर में पानी रुकने (Water Retention) की समस्या हो तो चिकित्सकीय सलाह के अनुसार पुनर्नवा का उपयोग लाभदायक माना जाता है।
हालाँकि यदि किसी व्यक्ति को गंभीर किडनी रोग है, तो बिना चिकित्सकीय सलाह के इसका सेवन नहीं करना चाहिए। - शरीर की सूजन कम करने में सहायक
शरीर के विभिन्न भागों में सूजन कई कारणों से हो सकती है, जैसे—
- किडनी संबंधी समस्या
- लिवर विकार
- चोट
- गठिया
- लंबे समय तक बैठना
पुनर्नवा में पाए जाने वाले प्राकृतिक एंटी-इन्फ्लेमेटरी तत्व सूजन को कम करने में सहायता करते हैं। यही कारण है कि आयुर्वेद में इसे “शोथहर” औषधि कहा गया है।
- यकृत (लिवर) की सुरक्षा
लिवर शरीर का सबसे महत्वपूर्ण डिटॉक्स अंग है।
आयुर्वेदिक चिकित्सक पुनर्नवा मूल को लिवर के लिए अत्यंत उपयोगी मानते हैं क्योंकि यह—
- लिवर की कार्यक्षमता को बेहतर बनाने में सहायता कर सकती है।
- वसा जमा होने की प्रवृत्ति को कम करने में सहयोग दे सकती है।
- शरीर से विषैले पदार्थों के निष्कासन में मदद कर सकती है।
फैटी लिवर जैसी स्थितियों में भी कई आयुर्वेदिक योगों में पुनर्नवा का उपयोग किया जाता है।
- यूरिक एसिड नियंत्रित रखने में सहायक
जब शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा बढ़ जाती है, तो जोड़ों में दर्द, सूजन और गठिया जैसी समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं।
पुनर्नवा की मूत्रल प्रकृति शरीर से अतिरिक्त यूरिक एसिड के निष्कासन में सहायक हो सकती है। इसलिए इसे यूरिक एसिड नियंत्रण के लिए प्रयुक्त कई आयुर्वेदिक औषधियों में शामिल किया जाता है। - गठिया और जोड़ों के दर्द में लाभ
पुनर्नवा में मौजूद सूजनरोधी गुण जोड़ों की जकड़न और दर्द को कम करने में सहायक माने जाते हैं।
विशेष रूप से—
- घुटनों का दर्द
- गठिया
- जोड़ों की सूजन
- मांसपेशियों की अकड़न
जैसी समस्याओं में इसका उपयोग अन्य आयुर्वेदिक औषधियों के साथ किया जाता है।
- हृदय स्वास्थ्य को समर्थन
शरीर में अतिरिक्त जल जमा होने से हृदय पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
पुनर्नवा—
- शरीर में जल संतुलन बनाए रखने,
- सूजन कम करने,
- रक्त संचार को बेहतर बनाने
में सहयोग कर सकती है, जिससे अप्रत्यक्ष रूप से हृदय स्वास्थ्य को लाभ मिल सकता है।
- वजन नियंत्रित करने में सहायक
यह कोई चमत्कारी वजन घटाने वाली औषधि नहीं है, लेकिन—
- अतिरिक्त जल निकालने,
- पाचन सुधारने,
- चयापचय को सक्रिय रखने
के कारण वजन नियंत्रण कार्यक्रम में सहायक भूमिका निभा सकती है।
संतुलित आहार और नियमित व्यायाम के साथ इसका बेहतर परिणाम देखा जा सकता है।
- पाचन तंत्र को बेहतर बनाने में सहायक
आयुर्वेद के अनुसार पुनर्नवा—
- भूख बढ़ाने,
- गैस कम करने,
- अपच दूर करने,
- मल त्याग को नियमित रखने
में सहायता कर सकती है।
यह पाचन अग्नि को संतुलित करने वाली औषधियों में भी गिनी जाती है।
- रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहयोग
पुनर्नवा में उपस्थित प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट शरीर की कोशिकाओं को सुरक्षित रखने में मदद करते हैं।
इसके नियमित एवं संतुलित सेवन से प्रतिरक्षा प्रणाली को समर्थन मिल सकता है, जिससे शरीर संक्रमणों से बेहतर तरीके से लड़ने में सक्षम हो सकता है। - मधुमेह प्रबंधन में सहायक
कुछ प्रारंभिक वैज्ञानिक अध्ययनों में संकेत मिले हैं कि पुनर्नवा रक्त शर्करा के संतुलन में सहायक भूमिका निभा सकती है।
हालाँकि इसे मधुमेह की दवाओं का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति डायबिटीज की दवा ले रहा है, तो चिकित्सक की सलाह के बाद ही इसका सेवन करे। - त्वचा के लिए लाभ
रक्त शुद्धिकरण तथा शरीर से विषैले पदार्थों के निष्कासन में सहयोग के कारण पुनर्नवा त्वचा के स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी मानी जाती है।
इसके सेवन से—
- त्वचा की चमक
- मुहाँसों की समस्या
- त्वचा की सूजन
में सुधार देखा जा सकता है।
- बालों के स्वास्थ्य में योगदान
जब शरीर का पोषण बेहतर होता है और विषैले तत्व कम होते हैं, तो इसका सकारात्मक प्रभाव बालों पर भी पड़ता है।
यद्यपि इस विषय पर अधिक वैज्ञानिक शोध की आवश्यकता है, फिर भी आयुर्वेद में इसे बालों के पोषण हेतु उपयोगी माना गया है। - मूत्र संबंधी समस्याओं में उपयोग
पुनर्नवा का उपयोग पारंपरिक रूप से—
- बार-बार पेशाब रुकना,
- पेशाब में जलन,
- मूत्र मार्ग की कुछ समस्याओं
में सहायक औषधि के रूप में किया जाता रहा है।
- शरीर की प्राकृतिक सफाई (डिटॉक्स)
पुनर्नवा को प्राकृतिक डिटॉक्सिफाइंग जड़ी-बूटी भी कहा जाता है।
यह—
- अतिरिक्त जल,
- अपशिष्ट पदार्थ,
- चयापचय से उत्पन्न विषैले तत्व
को बाहर निकालने की प्राकृतिक प्रक्रिया में सहयोग करती है।
- संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए टॉनिक
आयुर्वेद में पुनर्नवा को केवल किसी एक रोग की औषधि नहीं, बल्कि संपूर्ण स्वास्थ्य को संतुलित रखने वाली रसायन औषधि माना गया है।
पुनर्नवा मूल का सेवन कैसे करें?
चिकित्सक की सलाह के अनुसार इसका सेवन निम्न रूपों में किया जा सकता है—
- पुनर्नवा मूल चूर्ण
- पुनर्नवा काढ़ा
- पुनर्नवा क्वाथ
- पुनर्नवा घनवटी
- आयुर्वेदिक कैप्सूल
- विभिन्न आयुर्वेदिक योगों के साथ
सामान्य मात्रा
वयस्कों के लिए सामान्यतः—
- चूर्ण: 3–6 ग्राम प्रतिदिन
- काढ़ा: 30–50 मिली
- कैप्सूल: निर्माता या चिकित्सक के निर्देशानुसार
मात्रा व्यक्ति की आयु, स्वास्थ्य स्थिति और रोग के अनुसार भिन्न हो सकती है।
सेवन का सही समय
- भोजन के बाद
- चिकित्सकीय सलाह अनुसार
- गुनगुने पानी के साथ
- काढ़े के रूप में सुबह या शाम
सावधानियाँ
यद्यपि पुनर्नवा प्राकृतिक औषधि है, फिर भी इसका सेवन सावधानी से करना चाहिए।
निम्न परिस्थितियों में विशेषज्ञ की सलाह आवश्यक है—
- गर्भावस्था
- स्तनपान
- गंभीर किडनी रोग
- गंभीर लिवर रोग
- निम्न रक्तचाप
- मूत्रवर्धक (Diuretic) दवाओं का सेवन
- मधुमेह की दवाएँ लेने वाले मरीज
संभावित दुष्प्रभाव
उचित मात्रा में सेवन करने पर यह सामान्यतः सुरक्षित मानी जाती है, लेकिन अधिक मात्रा में लेने पर कुछ लोगों में—
- बार-बार पेशाब आना
- शरीर में पानी की कमी
- इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन
- हल्का पेट खराब होना
- कमजोरी
जैसी समस्याएँ हो सकती हैं।
इसलिए निर्धारित मात्रा से अधिक सेवन नहीं करना चाहिए।
पुनर्नवा मूल पर आधुनिक वैज्ञानिक शोध
पिछले कुछ दशकों में पुनर्नवा (Boerhavia diffusa) पर भारत सहित कई देशों में वैज्ञानिक अध्ययन किए गए हैं। इन अध्ययनों से यह स्पष्ट हुआ है कि पुनर्नवा में अनेक जैव सक्रिय (Bioactive) तत्व मौजूद हैं, जो शरीर की विभिन्न प्रणालियों पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं। हालांकि अधिकांश अध्ययन प्रयोगशाला (In vitro) या पशुओं पर किए गए हैं, इसलिए मनुष्यों में इसके प्रभावों की पुष्टि के लिए और व्यापक शोध की आवश्यकता है।
अब तक के शोधों में पुनर्नवा के निम्न संभावित प्रभावों का उल्लेख मिलता है—
- एंटीऑक्सीडेंट गतिविधि
- सूजनरोधी (Anti-inflammatory) प्रभाव
- मूत्रल (Diuretic) गुण
- यकृत सुरक्षा (Hepatoprotective)
- गुर्दों की कार्यक्षमता को समर्थन
- प्रतिरक्षा प्रणाली को सहयोग
- कुछ अध्ययनों में रक्त शर्करा नियंत्रण में संभावित भूमिका
विशेषज्ञों का मानना है कि पुनर्नवा का उपयोग एक सहायक (Supportive) औषधि के रूप में किया जा सकता है, लेकिन यह किसी गंभीर बीमारी की आधुनिक चिकित्सा का विकल्प नहीं है।
आयुर्वेदिक योगों में पुनर्नवा का उपयोग
आयुर्वेद में पुनर्नवा मूल का उपयोग अकेले ही नहीं, बल्कि कई प्रसिद्ध योगों में भी किया जाता है। इनमें प्रमुख हैं—
- पुनर्नवासव
- पुनर्नवा मंडूर
- पुनर्नवादि क्वाथ
- पुनर्नवा घनवटी
- पुनर्नवा चूर्ण
- विभिन्न किडनी एवं लिवर सपोर्ट आयुर्वेदिक संयोजन
इन योगों का चयन रोग की प्रकृति, रोगी की आयु और शारीरिक स्थिति के अनुसार आयुर्वेदाचार्य द्वारा किया जाता है।
पुनर्नवा मूल खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखें?
आज बाजार में कई प्रकार की जड़ी-बूटियाँ उपलब्ध हैं। अच्छी गुणवत्ता का पुनर्नवा मूल चुनने के लिए निम्न बातों पर ध्यान दें—
- विश्वसनीय और प्रमाणित विक्रेता से खरीदें।
- जड़ अच्छी तरह सूखी हुई हो।
- उसमें फफूंद या नमी न हो।
- किसी प्रकार की दुर्गंध न आए।
- पैकिंग पर निर्माण एवं समाप्ति तिथि अवश्य देखें।
- यदि पाउडर खरीद रहे हैं तो शुद्धता का प्रमाण अवश्य देखें।
किन लोगों को पुनर्नवा मूल का सेवन सावधानी से करना चाहिए?
हालाँकि यह एक प्राकृतिक औषधि है, लेकिन निम्न परिस्थितियों में चिकित्सकीय सलाह लेना आवश्यक है—
- गर्भवती महिलाएँ
- स्तनपान कराने वाली माताएँ
- 12 वर्ष से कम आयु के बच्चे
- गंभीर किडनी या लिवर रोग वाले मरीज
- निम्न रक्तचाप वाले व्यक्ति
- मूत्रवर्धक दवाएँ लेने वाले मरीज
- मधुमेह या उच्च रक्तचाप की दवाएँ लेने वाले लोग
पुनर्नवा मूल से जुड़े सामान्य भ्रम
भ्रम 1: पुनर्नवा हर किडनी रोग को ठीक कर देती है।
सत्य: पुनर्नवा किडनी के स्वास्थ्य को समर्थन दे सकती है, लेकिन यह गंभीर किडनी रोगों का इलाज नहीं है।
भ्रम 2: इसे जितनी अधिक मात्रा में लिया जाए, उतना अधिक लाभ मिलता है।
सत्य: अधिक मात्रा में सेवन करने से शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट का संतुलन बिगड़ सकता है।
भ्रम 3: यह सभी लोगों के लिए पूरी तरह सुरक्षित है।
सत्य: कुछ लोगों में दवाओं के साथ इसकी पारस्परिक क्रिया (Drug Interaction) हो सकती है, इसलिए विशेषज्ञ की सलाह आवश्यक है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
- क्या पुनर्नवा मूल रोज़ ली जा सकती है?
हाँ, लेकिन केवल चिकित्सकीय सलाह और निर्धारित मात्रा में। - क्या पुनर्नवा वजन कम करती है?
यह सीधे वसा नहीं घटाती, लेकिन अतिरिक्त जल कम करने और चयापचय को सहयोग देने के कारण वजन नियंत्रण कार्यक्रम में सहायक हो सकती है। - क्या यह यूरिक एसिड कम करती है?
कुछ मामलों में मूत्र के माध्यम से यूरिक एसिड के निष्कासन में सहायता कर सकती है, लेकिन इसे उपचार का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। - क्या पुनर्नवा मधुमेह के रोगी ले सकते हैं?
हाँ, लेकिन केवल डॉक्टर की सलाह से, क्योंकि यह रक्त शर्करा को प्रभावित कर सकती है। - क्या पुनर्नवा से कोई दुष्प्रभाव होता है?
निर्धारित मात्रा में सामान्यतः सुरक्षित मानी जाती है, लेकिन अधिक मात्रा में लेने पर बार-बार पेशाब, कमजोरी या शरीर में पानी की कमी जैसी समस्याएँ हो सकती हैं। - पुनर्नवा का सबसे अच्छा रूप कौन-सा है?
रोग और आवश्यकता के अनुसार चूर्ण, काढ़ा, घनवटी या पुनर्नवासव का चयन किया जाता है। इसके लिए आयुर्वेद विशेषज्ञ की सलाह सर्वोत्तम रहती है। - क्या पुनर्नवा इम्यूनिटी बढ़ाती है?
इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और जैव सक्रिय तत्व प्रतिरक्षा प्रणाली को समर्थन देने में सहायक हो सकते हैं। - क्या पुनर्नवा फैटी लिवर में उपयोगी है?
कुछ प्रारंभिक शोध और आयुर्वेदिक अनुभव इसके संभावित लाभ का संकेत देते हैं, लेकिन इसका उपयोग चिकित्सकीय सलाह के साथ ही करना चाहिए।
पुनर्नवा मूल आयुर्वेद की उन महत्वपूर्ण जड़ी-बूटियों में से एक है, जिसे सदियों से शरीर की प्राकृतिक शुद्धि, सूजन कम करने, गुर्दों और यकृत के स्वास्थ्य को समर्थन देने तथा संपूर्ण स्वास्थ्य संतुलन बनाए रखने के लिए उपयोग किया जाता रहा है। इसके मूत्रल, सूजनरोधी और एंटीऑक्सीडेंट गुण इसे एक बहुउपयोगी औषधीय पौधा बनाते हैं।
हालाँकि यह अनेक स्वास्थ्य लाभ प्रदान कर सकती है, फिर भी इसे किसी भी गंभीर रोग के उपचार का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। सर्वोत्तम परिणाम और सुरक्षा के लिए पुनर्नवा मूल का सेवन हमेशा योग्य आयुर्वेद चिकित्सक या स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार ही करना चाहिए।
डिस्क्लेमर
किसी भी आयुर्वेदिक उत्पाद का सेवन अथवा प्रयोग करने से पूर्व योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श करना आवश्यक है। लेख में वर्णित लाभ पारंपरिक ग्रंथों एवं उपलब्ध शोधों पर आधारित हैं, जिनके परिणाम व्यक्ति विशेष में भिन्न हो सकते हैं। लेखक एवं प्रकाशक किसी भी प्रकार के प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष दुष्प्रभाव, हानि या गलत उपयोग के लिए उत्तरदायी नहीं होंगे।






