भारतीय सेना में इंटर्नशिप का सुनहरा मौका: 75 दिन काम करने पर मिलेंगे 75 हजार रुपये, 5 नवंबर तक करें आवेदन

संवाद 24 डेस्क। भारतीय सेना में काम करने और रक्षा क्षेत्र की आधुनिक तकनीकों को करीब से समझने का सपना देखने वाले युवाओं के लिए अच्छी खबर है। भारतीय सेना की नॉर्दर्न कमांड ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए इंटर्नशिप कार्यक्रम शुरू किया है। इस कार्यक्रम के तहत चयनित विद्यार्थियों को 75 दिनों तक सेना के साथ काम करने, आधुनिक तकनीकों को समझने और रक्षा क्षेत्र से जुड़े विभिन्न प्रोजेक्ट पर व्यावहारिक अनुभव हासिल करने का अवसर मिलेगा। खास बात यह है कि इस इंटर्नशिप को सफलतापूर्वक पूरा करने वाले अभ्यर्थियों को कुल 75,000 रुपये तक की छात्रवृत्ति राशि यानी मानदेय दिया जाएगा।
इंजीनियरिंग, सूचना प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा, ड्रोन तकनीक, रोबोटिक्स, संचार व्यवस्था, मीडिया और वित्तीय तकनीक जैसे क्षेत्रों में रुचि रखने वाले विद्यार्थियों के लिए यह अवसर काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आवेदन की अंतिम तिथि 5 नवंबर 2026 निर्धारित की गई है, जबकि कार्यक्रम की शुरुआत 1 दिसंबर 2026 से प्रस्तावित है। इच्छुक और योग्य उम्मीदवारों को निर्धारित समय सीमा के भीतर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। इस कार्यक्रम का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि उनकी शैक्षणिक जानकारी को वास्तविक रक्षा जरूरतों से जोड़ना और देश की सुरक्षा व्यवस्था में तकनीकी नवाचार को प्रोत्साहित करना भी है।

75 दिनों की इंटर्नशिप में क्या मिलेगा सीखने का मौका?
भारतीय सेना की इस इंटर्नशिप की अवधि कुल 75 दिन निर्धारित की गई है। कार्यक्रम को इस तरह तैयार किया गया है कि विद्यार्थियों को ऑनलाइन अध्ययन के साथ-साथ सेना के प्रतिष्ठानों में प्रत्यक्ष रूप से काम करने का अनुभव भी मिल सके। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, शुरुआती 15 दिनों में ऑनलाइन प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके बाद अगले 60 दिनों तक चयनित अभ्यर्थियों को प्रत्यक्ष रूप से संबंधित केंद्रों पर प्रशिक्षण और व्यावहारिक कार्य करने का अवसर मिलेगा।
इस व्यवस्था का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल सैद्धांतिक जानकारी तक सीमित नहीं रखना है। उन्हें अपने विषय से संबंधित तकनीकी समस्याओं को समझने, उनके समाधान तलाशने और विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में काम करने का अवसर मिलेगा। रक्षा क्षेत्र में किसी भी तकनीकी समाधान को लागू करने से पहले उसकी उपयोगिता, विश्वसनीयता और सुरक्षा का परीक्षण जरूरी होता है। ऐसे में विद्यार्थियों के लिए यह अनुभव सामान्य शैक्षणिक प्रशिक्षण से अलग और अधिक व्यावहारिक हो सकता है।
इंटर्नशिप के लिए जम्मू-कश्मीर और लद्दाख क्षेत्र में स्थित तीन प्रमुख केंद्र निर्धारित किए गए हैं। इनमें उधमपुर, श्रीनगर और लेह शामिल हैं। अभ्यर्थियों को आवेदन करते समय संबंधित परियोजना के कार्यस्थल और अन्य शर्तों की जानकारी ध्यान से देखनी चाहिए।

हर महीने 30 हजार रुपये, पूरी इंटर्नशिप पर 75 हजार का मानदेय
इस कार्यक्रम का एक बड़ा आकर्षण इसमें मिलने वाली आर्थिक सहायता है। भारतीय सेना की ओर से जारी कार्यक्रम संबंधी जानकारी के अनुसार, चयनित विद्यार्थियों को प्रतिमाह 30,000 रुपये तक का मानदेय दिया जाएगा। 75 दिनों की पूरी अवधि के लिए यह राशि अधिकतम 75,000 रुपये तक निर्धारित है।
हालांकि, उम्मीदवारों को यह समझना जरूरी है कि यह राशि नियमित नौकरी का वेतन नहीं, बल्कि इंटर्नशिप के दौरान मिलने वाला मानदेय है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को प्रशिक्षण अवधि में आर्थिक सहयोग देना और उन्हें कार्यक्रम में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करना है।
मानदेय प्राप्त करने के लिए अभ्यर्थियों को कार्यक्रम की निर्धारित शर्तों का पालन करना होगा। उपस्थिति, प्रशिक्षण की अवधि और कार्य से संबंधित जिम्मेदारियों को पूरा करना महत्वपूर्ण होगा। इसलिए आवेदन करने से पहले संबंधित परियोजना की मानदेय व्यवस्था और भुगतान की शर्तों को आधिकारिक पोर्टल पर अवश्य पढ़ लेना चाहिए। केवल आवेदन कर देने से मानदेय मिलने की गारंटी नहीं मानी जानी चाहिए।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता से लेकर ड्रोन तकनीक तक, इन क्षेत्रों में मिलेगा अनुभव
भारतीय सेना ने इस इंटर्नशिप कार्यक्रम में आधुनिक तकनीक और रक्षा क्षेत्र से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया है। इसका उद्देश्य ऐसे युवाओं को अवसर देना है, जो अपनी तकनीकी विशेषज्ञता और रचनात्मक सोच के माध्यम से रक्षा क्षेत्र में नए समाधान विकसित करने की क्षमता रखते हैं।
इस कार्यक्रम के अंतर्गत प्रमुख रूप से निम्नलिखित क्षेत्रों में प्रशिक्षण और परियोजनाओं पर काम करने का अवसर दिया जाएगा।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग: कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग आज रक्षा क्षेत्र में तेजी से महत्वपूर्ण हो रही हैं। इनके माध्यम से बड़े पैमाने पर आंकड़ों का विश्लेषण, सूचनाओं का वर्गीकरण और निर्णय लेने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। विद्यार्थियों को इन तकनीकों के रक्षा क्षेत्र में उपयोग को समझने का अवसर मिल सकता है।
साइबर सुरक्षा और एथिकल हैकिंग: डिजिटल व्यवस्था पर बढ़ती निर्भरता के कारण साइबर सुरक्षा सेना के लिए महत्वपूर्ण विषय बन गई है। इस क्षेत्र में नेटवर्क, कंप्यूटर प्रणाली और डिजिटल सूचनाओं को साइबर हमलों से सुरक्षित रखने के तरीकों पर काम किया जाता है। एथिकल हैकिंग के माध्यम से किसी प्रणाली की सुरक्षा संबंधी कमजोरियों की पहचान कर उन्हें दूर करने की प्रक्रिया समझी जाती है।
क्वांटम कंप्यूटिंग और क्रिप्टोग्राफी: भविष्य की कंप्यूटिंग तकनीकों में क्वांटम कंप्यूटिंग का विशेष महत्व माना जा रहा है। वहीं क्रिप्टोग्राफी का संबंध सूचनाओं को सुरक्षित रखने और गोपनीय संचार से है। रक्षा संचार व्यवस्था में इन तकनीकों की संभावनाओं को समझना विद्यार्थियों के लिए उपयोगी अनुभव हो सकता है।
ड्रोन और मानवरहित विमान तकनीक: आधुनिक युद्ध और निगरानी व्यवस्था में ड्रोन की भूमिका लगातार बढ़ रही है। मानवरहित विमान तकनीक का इस्तेमाल निगरानी, मानचित्रण, कठिन क्षेत्रों की जानकारी जुटाने और विभिन्न परिचालन कार्यों में किया जा सकता है। इस क्षेत्र में विद्यार्थियों को ड्रोन तकनीक और उसके संभावित रक्षा उपयोगों को समझने का अवसर मिलेगा।
रोबोटिक्स और स्वायत्त प्रणाली: रोबोटिक्स ऐसी तकनीक है, जिसमें मशीनों को विशेष कार्य करने के लिए विकसित किया जाता है। स्वायत्त प्रणालियां कुछ निर्धारित परिस्थितियों में मानवीय हस्तक्षेप के बिना भी काम कर सकती हैं। रक्षा क्षेत्र में इनका उपयोग जोखिम वाले स्थानों पर निगरानी और अन्य विशेष कार्यों के लिए उपयोगी हो सकता है।
अंतरिक्ष और उपग्रह तकनीक: सेना की संचार व्यवस्था, स्थान निर्धारण, मौसम संबंधी जानकारी और निगरानी में अंतरिक्ष तकनीक की भूमिका महत्वपूर्ण है। उपग्रहों से मिलने वाली सूचनाएं रक्षा संबंधी योजनाओं और विभिन्न परिचालन गतिविधियों में मदद करती हैं।
उन्नत हथियार प्रणाली और रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स: आधुनिक हथियार प्रणालियों के संचालन और नियंत्रण में इलेक्ट्रॉनिक तकनीकों का महत्वपूर्ण योगदान है। इस क्षेत्र में विद्यार्थियों को रक्षा उपकरणों की तकनीकी कार्यप्रणाली और उनसे संबंधित नवाचारों की जानकारी हासिल करने का अवसर मिल सकता है।
5जी, 6जी और संचार तकनीक: तेज और सुरक्षित संचार व्यवस्था किसी भी सैन्य संगठन की महत्वपूर्ण जरूरत होती है। नई पीढ़ी की संचार तकनीकें सूचनाओं के आदान-प्रदान को अधिक प्रभावी बनाने की क्षमता रखती हैं।
वित्तीय तकनीक और मीडिया: इस इंटर्नशिप में तकनीकी विषयों के अलावा वित्तीय तकनीक, जिसे फिनटेक कहा जाता है, तथा जनसंचार और मीडिया को भी शामिल किया गया है। इसके अतिरिक्त मंदारिन भाषा के अनुवाद और उपयोग से जुड़ा क्षेत्र भी कार्यक्रम का हिस्सा है। इससे स्पष्ट है कि यह अवसर केवल इंजीनियरिंग या कंप्यूटर विज्ञान के विद्यार्थियों तक सीमित विषयों वाला कार्यक्रम नहीं है।

किन विद्यार्थियों को मिल सकता है आवेदन का मौका?
भारतीय सेना की इस इंटर्नशिप में आवेदन करने से पहले पात्रता संबंधी शर्तों को समझना बेहद जरूरी है। अलग-अलग तकनीकी और गैर-तकनीकी परियोजनाओं के लिए शैक्षणिक योग्यता और आवश्यक कौशल अलग हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा, रोबोटिक्स और संचार तकनीक से संबंधित परियोजनाओं में संबंधित विषयों की पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों को प्राथमिकता मिल सकती है।
इसी तरह मीडिया और जनसंचार से संबंधित परियोजनाओं के लिए पत्रकारिता, जनसंचार अथवा संबंधित विषयों की शैक्षणिक पृष्ठभूमि उपयोगी हो सकती है। वित्तीय तकनीक से जुड़ी परियोजनाओं में वित्त, प्रबंधन, अर्थशास्त्र और संबंधित विषयों का ज्ञान रखने वाले उम्मीदवारों के लिए अवसर हो सकते हैं।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि सभी परियोजनाओं के लिए एक जैसी शैक्षणिक योग्यता, आयु सीमा या अनुभव संबंधी शर्तें लागू होने की पुष्टि उपलब्ध कार्यक्रम विवरण में नहीं की गई है। इसलिए किसी एक विषय की योग्यता को पूरे कार्यक्रम के लिए अनिवार्य या पर्याप्त नहीं माना जाना चाहिए। उम्मीदवारों को जिस परियोजना में आवेदन करना है, उसकी अलग से निर्धारित पात्रता देखनी होगी।
इसके अतिरिक्त उम्मीदवारों को पूरे प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लेने की उपलब्धता और संबंधित केंद्र पर प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित होने की जरूरत को भी ध्यान में रखना चाहिए। आवेदन करने से पहले अपनी शैक्षणिक योग्यता और संबंधित परियोजना की आवश्यकताओं का मिलान करना बेहतर रहेगा।

कहां और कैसे होगा चयनित विद्यार्थियों का प्रशिक्षण?
इस इंटर्नशिप कार्यक्रम के लिए नॉर्दर्न कमांड के अंतर्गत तीन स्थानों का उल्लेख किया गया है। इनमें उधमपुर, श्रीनगर और लेह शामिल हैं। ये तीनों स्थान सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं और यहां रक्षा संबंधी गतिविधियों के लिए आधुनिक तकनीक तथा प्रभावी संचार व्यवस्था की विशेष जरूरत रहती है।
कार्यक्रम के पहले 15 दिनों में ऑनलाइन प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके बाद 60 दिनों का प्रत्यक्ष प्रशिक्षण निर्धारित है। इस दौरान विद्यार्थियों को संबंधित परियोजना के अनुसार काम करने और व्यावहारिक जानकारी हासिल करने का अवसर मिलेगा।
इस तरह की इंटर्नशिप का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है, क्योंकि विद्यार्थियों को वास्तविक कार्यक्षेत्र की जरूरतों को समझने का मौका मिलता है। कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में पढ़ाई के दौरान विद्यार्थी किसी तकनीक के सिद्धांत और उसकी कार्यप्रणाली के बारे में सीखते हैं, लेकिन किसी वास्तविक परियोजना पर काम करने का अनुभव उन्हें व्यावसायिक दुनिया की चुनौतियों से परिचित कराता है।
हालांकि, प्रशिक्षण केंद्र का आवंटन, परियोजना की प्रकृति और कार्य की जिम्मेदारियां चयनित उम्मीदवारों के विषय तथा संबंधित परियोजना की जरूरतों के अनुसार निर्धारित की जा सकती हैं। इसलिए आवेदन के समय उपलब्ध विवरण को ध्यानपूर्वक पढ़ना आवश्यक है।

5 नवंबर है आवेदन की अंतिम तारीख, जानें ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया
भारतीय सेना की इस इंटर्नशिप में आवेदन करने के इच्छुक उम्मीदवारों को 5 नवंबर 2026 तक आवेदन करना होगा। आवेदन की प्रक्रिया ऑनलाइन रखी गई है। इसके लिए अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद के राष्ट्रीय इंटर्नशिप पोर्टल का उपयोग किया जा रहा है।
उम्मीदवार नीचे दिए गए चरणों के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं।
पहला चरण: सबसे पहले अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद के राष्ट्रीय इंटर्नशिप पोर्टल पर जाएं। इसके लिए आधिकारिक वेबसाइट https://internship.aicte-india.org/ खोलें।
दूसरा चरण: पोर्टल पर भारतीय सेना की इंटर्नशिप से संबंधित उपलब्ध अवसरों को खोजें। उम्मीदवार सीधे भारतीय सेना के इंटर्नशिप डैशबोर्ड https://internship.aicte-india.org/dashboards/indianarmy पर भी जा सकते हैं।
तीसरा चरण: उपलब्ध परियोजनाओं की सूची में अपनी शैक्षणिक योग्यता और रुचि के अनुसार उपयुक्त अवसर का चयन करें।
चौथा चरण: संबंधित परियोजना की पात्रता, आवश्यक कौशल, प्रशिक्षण की अवधि, कार्यस्थल, मानदेय और आवेदन की अंतिम तिथि की जानकारी ध्यानपूर्वक पढ़ें।
पांचवां चरण: यदि आपने पहले से पोर्टल पर पंजीकरण नहीं किया है, तो अपनी आवश्यक जानकारी देकर पंजीकरण करें। पहले से पंजीकृत उम्मीदवार अपने खाते में प्रवेश कर सकते हैं।
छठा चरण: आवेदन पत्र में मांगी गई शैक्षणिक और व्यक्तिगत जानकारी भरें। आवश्यक विवरण और दस्तावेजों की जानकारी सही-सही दर्ज करें।
सातवां चरण: सभी जानकारियों की जांच करने के बाद आवेदन जमा कर दें। आवेदन पूरा होने के बाद पोर्टल पर उपलब्ध स्थिति और आगे जारी होने वाले निर्देशों पर नजर रखें।
उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि अंतिम तारीख का इंतजार करने के बजाय समय रहते आवेदन पूरा कर लें। पोर्टल पर परियोजना संबंधी कोई अतिरिक्त निर्देश या दस्तावेज मांगे जाने पर उनका पालन करना जरूरी होगा।

आवेदन से पहले इन जरूरी बातों का रखें ध्यान
भारतीय सेना की इंटर्नशिप में आवेदन करते समय उम्मीदवारों को कुछ महत्वपूर्ण बातों पर विशेष ध्यान देना चाहिए। सबसे पहले संबंधित परियोजना की पात्रता और आवेदन की शर्तों को अच्छी तरह समझ लें। केवल मानदेय को देखकर आवेदन करना उचित नहीं होगा। उम्मीदवार को यह भी देखना चाहिए कि जिस क्षेत्र में वह प्रशिक्षण लेना चाहता है, उसकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि और कौशल उस परियोजना के अनुरूप हैं या नहीं।
इसके अलावा, कार्यक्रम के 60 दिन प्रत्यक्ष प्रशिक्षण के लिए निर्धारित हैं। इसलिए चयनित उम्मीदवारों को संबंधित प्रशिक्षण केंद्र पर पहुंचने और निर्धारित अवधि तक उपलब्ध रहने की तैयारी करनी चाहिए। उधमपुर, श्रीनगर और लेह में प्रशिक्षण से जुड़ी यात्रा और रहने की व्यवस्था के संबंध में आधिकारिक निर्देशों की जानकारी पहले प्राप्त कर लेना भी जरूरी है।
उम्मीदवारों को पुलिस सत्यापन, पहचान संबंधी दस्तावेजों और शैक्षणिक प्रमाणपत्रों से जुड़ी आवश्यकताओं के बारे में संबंधित परियोजना की सूचना देखनी चाहिए। सेना के प्रतिष्ठानों में सुरक्षा नियमों का पालन करना भी अनिवार्य होगा। किसी भी प्रकार की निजी जानकारी या दस्तावेज केवल आधिकारिक पोर्टल पर ही साझा करें। आवेदन के नाम पर किसी अनधिकृत व्यक्ति को पैसे न दें।
एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि इंटर्नशिप पूरी करने के बाद भारतीय सेना में स्थायी नौकरी मिलने की कोई गारंटी इस कार्यक्रम के विवरण में नहीं दी गई है। इसे रोजगार नियुक्ति के बजाय व्यावहारिक प्रशिक्षण और कौशल विकास का अवसर समझना चाहिए।

रक्षा क्षेत्र में भविष्य बनाने वाले युवाओं के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह अवसर?
भारत में रक्षा क्षेत्र तेजी से तकनीकी बदलाव के दौर से गुजर रहा है। अब सेना की कार्यप्रणाली केवल पारंपरिक हथियारों और सैन्य उपकरणों तक सीमित नहीं रह गई है। आधुनिक समय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा, ड्रोन, रोबोटिक्स, उपग्रह संचार, डेटा विश्लेषण और स्वचालित प्रणालियां भी राष्ट्रीय सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बन रही हैं।
सीमा सुरक्षा से लेकर निगरानी, संचार और सूचनाओं के विश्लेषण तक तकनीक की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में तकनीकी रूप से प्रशिक्षित युवाओं की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती जा रही है। भारतीय सेना का यह कार्यक्रम विद्यार्थियों को इसी बदलते परिवेश से परिचित कराने की दिशा में एक पहल है।
इस कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि इसमें केवल तकनीकी विषयों को शामिल नहीं किया गया है। मीडिया, जनसंचार, भाषा अनुवाद और वित्तीय तकनीक जैसे क्षेत्रों को भी स्थान दिया गया है। इससे अलग-अलग शैक्षणिक पृष्ठभूमि वाले विद्यार्थियों के लिए रक्षा क्षेत्र से जुड़ी परियोजनाओं को समझने का अवसर तैयार होता है।
विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में काम करने का अनुभव विद्यार्थियों को अपनी क्षमताओं का आकलन करने में भी मदद कर सकता है। वे समझ सकते हैं कि उनकी पढ़ाई में हासिल किया गया ज्ञान वास्तविक परिस्थितियों में किस तरह उपयोगी साबित हो सकता है। इसके साथ ही अनुशासन, समय प्रबंधन, टीम के साथ काम करने और समस्या का समाधान खोजने जैसे व्यावसायिक गुणों को विकसित करने का अवसर भी मिल सकता है।

विद्यार्थियों के लिए सुनहरा अवसर, लेकिन अंतिम तिथि का रखें ध्यान
भारतीय सेना की नॉर्दर्न कमांड की 2026-27 की यह इंटर्नशिप उन युवाओं के लिए उपयोगी अवसर है, जो आधुनिक रक्षा तकनीक, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में अपना भविष्य तलाश रहे हैं। 75 दिनों का प्रशिक्षण, प्रतिमाह 30,000 रुपये तक का मानदेय और पूरी अवधि में अधिकतम 75,000 रुपये प्राप्त करने का अवसर इसे विद्यार्थियों के लिए आकर्षक बनाता है।
हालांकि, आवेदन करने से पहले उम्मीदवारों को अपनी योग्यता के अनुसार उपलब्ध परियोजना का चयन करना चाहिए। साथ ही प्रशिक्षण केंद्र, उपस्थिति, मानदेय और अन्य नियमों की आधिकारिक जानकारी अवश्य जांचनी चाहिए।
इच्छुक उम्मीदवार 5 नवंबर 2026 तक राष्ट्रीय इंटर्नशिप पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। कार्यक्रम की शुरुआत 1 दिसंबर 2026 से प्रस्तावित है। योग्य विद्यार्थियों के लिए यह अवसर अपनी प्रतिभा को निखारने, आधुनिक रक्षा तकनीकों को समझने और देश की सुरक्षा से जुड़े नवाचारों का हिस्सा बनने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

Geeta Singh
Geeta Singh

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