
संवाद 24 डेस्क। भारतीय सेना के तहत अग्निपथ योजना के प्रथम बैच के चार साल के कार्यकाल के पूरा होने के साथ ही अब पूर्व अग्निवीरों को भारतीय रेलवे में भर्तियों में आरक्षण का अधिकार मिलने जा रहा है। यह एक ऐसा कदम है जो सेवाकाल समाप्त होने के बाद सैन्य कर्मियों को रोजगार सुनिश्चित कर उनकी दोबारा सार्थक सेवा की दिशा में मार्गदर्शित करेगा।
भारतीय रेलवे और भारतीय सेना के बीच एक “को-ऑपरेशन फ्रेमवर्क” (Framework of Cooperation) पर सहमति बन गई है जिसमें पूर्व अग्निवीरों तथा सेवानिवृत्त सैनिकों को रेलवे के लेवल-1 (Group-D) तथा लेवल-2 और उससे ऊपर के पदों में आरक्षण और विशेष प्रावधान उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे अग्निपथ-बद्ध सैनिकों को उनकी सेवा के पश्चात् सम्मानजनक नागरिक करियर पाने का अवसर मिलेगा।
अग्निपथ योजना और अग्निवीरों की स्थिति
भारतीय रक्षा व्यवस्था में अग्निपथ योजना एक बड़ा सुधार था, जिसे जून 2022 में लागू किया गया। इसके अंतर्गत सैनिकों को चार साल की सेवा के लिए “अग्निवीर” के रूप में भर्ती किया जाता है। चार वर्ष के कार्यकाल के बाद 25% अग्निवीरों को स्थायी रूप से रखा जाता है जबकि 75% को सामान्य नागरिक जीवन में लौटना होता है।
पहले बैच का कार्यकाल 2026 में समाप्त होने वाला है, और जब अग्निवीरों को सशस्त्र बल से मुक्त किया जाएगा तब उनके सामने दोबारा नौकरी तथा आर्थिक सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियाँ भी आएँगी। इसी पृष्ठभूमि में रेलवे और भारतीय सेना का यह साझेदारी ढांचा लागू हुआ है, ताकि सेवा समाप्ति के पश्चात् भी इन युवाओं को रोजगार विकल्प समझदारी से उपलब्ध कराए जाएँ।
नई नीति क्या कहती है?
भारत सरकार, रेल मंत्रालय और सेना के बीच हुए समझौते के अनुसार अब रेल भर्ती प्रक्रिया में अग्निवीरों के लिए आरक्षण का प्रावधान होगा। इसका उद्देश्य यह है कि वे रेलवे में स्थायी नौकरी की प्रतिस्पर्धा में बेहतर स्थान हासिल कर सकें।
मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
. आरक्षण की श्रेणियाँ
लेवल-1 (Group-D) पदों में 10% आरक्षण
लेवल-2 एवं उससे ऊपर के पदों में 5% आरक्षण इसके साथ ही, पूर्व सैनिकों के लिए भी अलग से अधिक आरक्षण प्रावधान रखा गया है — लेवल-1 में 20% तथा लेवल-2 में 10% आरक्षण।
ये आरक्षण रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) तथा रेलवे भर्ती सेल (RRC) दोनों के अंतर्गत आने वाली भर्तियों में लागू होंगे। लेवल-1 की भर्तियाँ RRC के माध्यम से और लेवल-2 व उससे ऊपर की भर्तियाँ RRB के माध्यम से आयोजित होती हैं।
रेलवे-सेना फ्रेमवर्क ऑफ को-ऑपरेशन का कत्ता
रेलवे और भारतीय सेना ने मिलकर एक “Framework of Cooperation” जारी किया है। इसका उद्देश्य है:
सेवा समाप्ति के पश्चात् अग्निवीरों तथा सैनिकों के लिए अधिक मौके उपलब्ध कराना
रोजगार और समायोजन सहायता तंत्र विकसित करना
रेलवे में रोजगार पाने के अवसरों के प्रति जागरूकता फैलाना
सैनिकों के सैन्य कौशल तथा अनुशासन का नागरिक सेवा क्षेत्र में सक्रिय उपयोग सुनिश्चित करना
इस ढांचे के तहत रेलवे ने कहा है कि सेना तथा रेल मंत्रालय के वरिष्ठ नेतृत्व का मानना है कि रेलवे तथा सेना के कर्मियों में अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, तकनीकी दक्षता जैसी गुणों की समानता है। इन्हीं योग्यताओं का उपयोग रेलवे के लिए राष्ट्र निर्माण के क्षेत्र में किया जा सकता है।
नीति के तहत आरक्षित पदों की स्थिति
रेल मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार वर्तमान में:
वर्ष 2024-25 की भर्तियों में 14,788 पद पहले से ही पूर्व सैनिकों के लिए आरक्षित किए गए थे
इनमें 6,485 लेवल-1 पद और
8,303 लेवल-2 एवं उससे ऊपर के पद शामिल हैं
अब इस आरक्षण को अग्निवीरों के लिए भी लागू किया जाएगा, जिससे वे भी इन आरक्षित पदों पर आवेदन कर सकते हैं। ऐसे पदों के लिए आवेदन प्रक्रिया पहले से ही जारी है और अग्निवीरों को इसे ध्यान में रखकर आवेदन करना होगा।
आरक्षण के अतिरिक्त प्रावधान
आरक्षण के अलावा अन्य विशेष सुविधाएँ भी दी जा रही हैं:
. शारीरिक दक्षता परीक्षा में छूट
अधिसूचना के अनुसार अगर भर्ती प्रक्रिया में शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET/PET) शामिल होती है तो अग्निवीरों को विशेष छूट दी जा सकती है — जिसकी घोषणा सम्बंधित विभागों द्वारा की जाएगी।
. आयु में विश्राम
पहले बैच के अग्निवीरों को भर्ती प्रक्रिया में आयु सीमा में 5 वर्ष की अतिरिक्त छूट मिल सकती है। यह राहत विशेष रूप से उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण होगी जिनका सेवा-काल कम उम्र में समाप्त हुआ।
नीति के पीछे के मुख्य तर्क
यह कदम सिर्फ रोजगार का अवसर नहीं है, बल्कि सेना सेवा से नागरिक जीवन में संक्रमण को सरल बनाने का एक बड़ा प्रयास है। इसके पीछे के कुछ प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:
. सेना-रेलवे कौशल मेल
सेना में अनुशिक्षण और कठिन परिस्थितियों में काम करने का अनुभव प्राप्त करते हैं, जो रेलवे की नौकरी के लिए अत्यंत उपयोगी होते हैं। अनुशासन, टीम-वर्क, नेतृत्व और तकनीकी दक्षता ऐसे गुण हैं जो सीधे रेलवे सर्किल में लाभदायक सिद्ध होते हैं।
. सेवानिवृत्ति के बाद स्थिर करियर
अग्निवीरों का चार वर्ष का कार्यकाल समाप्त होने के बाद अक्सर उन्हें नौकरी की तलाश करनी पड़ती है। यह आरक्षण उन्हें रेलवे जैसे बड़े संगठन में स्थिर नौकरियाँ पाने का अवसर देता है और आर्थिक-सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
. कौशल का उपयोग और राष्ट्रीय विकास
सेना में प्रशिक्षण और नेतृत्व क्षमता को रेलवे जैसे बड़े संगठन में लाया जाए तो यह न केवल व्यक्ति के लिए लाभदायक है, बल्कि राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करता है।
व्यापक प्रभाव और आलोचना
. सकारात्मक प्रभाव
पूर्व सैनिकों व अग्निवीरों को आत्मनिर्भर बनाता है।
रेलवे को अनुभवी और अनुशासित कर्मी मिलते हैं।
भर्ती प्रक्रिया में विविधता और समान अवसर सुनिश्चित होते हैं।
. संभावित आलोचना
कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि आरक्षण से आम युवा उम्मीदवारों के लिए अवसर सीमित हो सकते हैं।
नीति-निर्माण के दौरान समुचित शिक्षा तथा कौशल तालमेल भी आवश्यक है ताकि भर्ती प्रक्रिया निष्पक्ष एवं गुणवत्तापूर्ण रहे।
भारतीय रेलवे और भारतीय सेना के बीच बनाए गए इस सहयोगात्मक फ़्रेमवर्क के कारण अग्निवीरों को रेलवे भर्ती में आरक्षण तथा विशेष अवसर प्राप्त होंगे जो उनके सेवा के पश्चात् जीवन में एक महत्वपूर्ण सकारात्मक बदलाव का अवसर हैं। यह नीति न केवल अग्निवीरों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति को सशक्त बनाएगी, बल्कि रेलवे जैसी महत्त्वपूर्ण संगठन को अनुशासित और नेतृत्व गुणों से संपन्न कर्मियों को अवसर प्रदान करेगी।
सब मिलाकर, यह निर्णय यह दर्शाता है कि सरकार और रणनीतिक संस्थाएँ संरचित रूप से उन लोगों को सम्मान और अवसर देना चाहती हैं जिन्होंने राष्ट्र की रक्षा में अपना समय और ऊर्जा समर्पित किया है।






