आखिर बैरिस्टर क्यों पहनते हैं सफेद विग? 17वीं सदी की वह परंपरा, जो आज भी अदालतों में जिंदा है

संवाद 24 डेस्क। यदि आपने कभी ब्रिटेन की अदालतों की तस्वीरें या फिल्में देखी हों, तो एक बात जरूर ध्यान गई होगी—जज और बैरिस्टर काले गाउन के साथ सफेद घुंघराले विग पहने दिखाई देते हैं। आधुनिक दौर में, जब लगभग हर पेशे का पहनावा समय के साथ बदल चुका है, तब भी अदालतों में यह सदियों पुरानी परंपरा क्यों कायम है? आखिर इस विग का कानून या न्याय से क्या संबंध है? यह केवल एक पोशाक नहीं, बल्कि इतिहास, परंपरा, निष्पक्षता और न्यायिक गरिमा का प्रतीक है। हाल ही में इस विषय पर एक रिपोर्ट ने फिर से लोगों की जिज्ञासा बढ़ा दी है।

17वीं सदी में कैसे शुरू हुई यह परंपरा
इतिहासकारों के अनुसार, अदालतों में विग पहनने की शुरुआत 17वीं सदी के उत्तरार्ध में हुई। इंग्लैंड के राजा चार्ल्स द्वितीय (Charles II) के शासनकाल में यूरोप में विग पहनना फैशन और प्रतिष्ठा का प्रतीक बन गया था। फ्रांस के राजा लुई चौदहवें और इंग्लैंड के शाही दरबार में विग का चलन तेजी से बढ़ा। धीरे-धीरे न्यायाधीशों और बैरिस्टरों ने भी इसे अपने औपचारिक परिधान का हिस्सा बना लिया। लगभग 1680 के बाद अदालतों में विग पहनना सामान्य प्रथा बन गया।

फैशन से परंपरा तक का सफर
शुरुआत में विग केवल फैशन का हिस्सा थी, लेकिन समय के साथ यह न्यायिक व्यवस्था की पहचान बन गई। 18वीं और 19वीं सदी तक आम लोगों ने विग पहनना लगभग छोड़ दिया, लेकिन अदालतों में इसे बनाए रखा गया। बाद में अंग्रेजी कॉमन लॉ परंपरा के तहत अदालतों में विग और गाउन को औपचारिक ड्रेस कोड का हिस्सा माना जाने लगा।

विग पहनने के पीछे केवल परंपरा नहीं, कई व्यावहारिक कारण भी
विशेषज्ञों के अनुसार, अदालतों में विग पहनने के पीछे कई महत्वपूर्ण उद्देश्य रहे हैं।
पहला, यह न्यायाधीश और बैरिस्टर की व्यक्तिगत पहचान को पीछे छोड़कर उनके संवैधानिक पद को प्रमुखता देता है। अदालत में व्यक्ति नहीं, बल्कि कानून बोलता है। इसलिए समान पोशाक निष्पक्षता का संदेश देती है।
दूसरा, विग सभी वकीलों को एक समान रूप देती है। इससे सामाजिक हैसियत, आर्थिक स्थिति या व्यक्तिगत व्यक्तित्व का प्रभाव कम होता है और पेशेवर समानता का भाव मजबूत होता है।
तीसरा, यह अदालत की गरिमा और अनुशासन का प्रतीक मानी जाती है। औपचारिक पोशाक न्यायिक प्रक्रिया के प्रति सम्मान का वातावरण तैयार करती है।

घोड़े के बालों से बनती थीं पारंपरिक विग
पारंपरिक बैरिस्टर विग मुख्य रूप से घोड़े के बालों से बनाई जाती थीं। बाद में इनमें अन्य प्राकृतिक और आधुनिक कृत्रिम रेशों का भी उपयोग होने लगा। इन विगों को हाथ से तैयार किया जाता है और अच्छी गुणवत्ता वाली एक विग कई वर्षों तक इस्तेमाल की जा सकती है। आज भी ब्रिटेन में कुछ विशेष कारीगर इस पारंपरिक कला को जीवित रखे हुए हैं।

क्या हर अदालत में आज भी विग पहनना अनिवार्य है?
इस प्रश्न का उत्तर ‘नहीं’ है। समय के साथ कई देशों और कई प्रकार की अदालतों में नियमों में बदलाव हुआ है। ब्रिटेन में आज भी आपराधिक मामलों की कई अदालतों में बैरिस्टर और जज विग पहनते हैं, लेकिन पारिवारिक, दीवानी और कुछ अन्य न्यायालयों में इसका उपयोग काफी हद तक समाप्त या सीमित कर दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ऑफ यूनाइटेड किंगडम में भी सामान्य सुनवाई के दौरान विग का उपयोग नहीं किया जाता।

भारत में क्यों खत्म हो गई यह परंपरा
भारत में अंग्रेजी शासन के दौरान जज और बैरिस्टर ब्रिटिश परंपरा के अनुसार विग पहनते थे। स्वतंत्रता के बाद धीरे-धीरे भारतीय न्यायपालिका ने इस परंपरा को समाप्त कर दिया। वर्तमान में भारतीय अदालतों में काला कोट, सफेद शर्ट, सफेद बैंड और काला गाउन ही औपचारिक वेशभूषा का हिस्सा हैं। भारतीय जलवायु और बदलती न्यायिक आवश्यकताओं को देखते हुए विग को ड्रेस कोड से हटा दिया गया।

दुनिया के अन्य देशों में क्या स्थिति है
ब्रिटेन के अलावा कुछ राष्ट्रमंडल देशों—जैसे ऑस्ट्रेलिया और कुछ कैरेबियाई देशों—में सीमित रूप से विग की परंपरा अभी भी दिखाई देती है। वहीं अमेरिका, भारत और अधिकांश यूरोपीय देशों में यह प्रथा लगभग समाप्त हो चुकी है। कई देशों ने आधुनिक न्यायिक व्यवस्था के अनुरूप सरल और व्यावहारिक ड्रेस कोड अपनाया है।

परंपरा बनाम आधुनिकता की बहस
कानूनी जगत में समय-समय पर यह बहस होती रही है कि विग की परंपरा जारी रहनी चाहिए या नहीं। समर्थकों का मानना है कि यह न्यायपालिका की स्वतंत्रता, निष्पक्षता और गरिमा का प्रतीक है। वहीं आलोचकों का कहना है कि आधुनिक न्याय व्यवस्था में इसकी व्यावहारिक आवश्यकता नहीं रह गई है और यह आम लोगों तथा अदालतों के बीच अनावश्यक दूरी का एहसास कराती है।

महिलाओं के लिए भी समान नियम
ब्रिटेन में जब महिलाओं ने बैरिस्टर के रूप में काम करना शुरू किया, तब उनके लिए भी वही विग और वही ड्रेस कोड लागू किया गया जो पुरुष बैरिस्टर पहनते थे। इसका उद्देश्य न्यायिक पेशे में समानता बनाए रखना था। हाल के वर्षों में धार्मिक और सांस्कृतिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए कुछ परिस्थितियों में छूट भी दी गई है।

क्या भविष्य में समाप्त हो जाएगी यह परंपरा?
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भी ब्रिटेन की कुछ अदालतों में विग की परंपरा बनी रह सकती है। हालांकि न्यायिक सुधारों के साथ इसके उपयोग का दायरा और सीमित हो सकता है। अदालतें अब परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

बैरिस्टर और जजों की सफेद विग केवल एक पुरानी पोशाक नहीं है, बल्कि लगभग साढ़े तीन सौ वर्षों के न्यायिक इतिहास की जीवंत विरासत है। इसकी शुरुआत भले ही फैशन से हुई हो, लेकिन समय के साथ यह न्यायपालिका की निष्पक्षता, समानता, अनुशासन और गरिमा का प्रतीक बन गई। भारत जैसे देशों ने बदलते समय के साथ इस परंपरा को छोड़ दिया, जबकि ब्रिटेन ने इसे अपनी न्यायिक पहचान के रूप में काफी हद तक संरक्षित रखा है। यह परंपरा बताती है कि न्याय केवल कानून का पालन नहीं, बल्कि उसकी गरिमा और विश्वास को बनाए रखने की भी प्रक्रिया है।

Geeta Singh
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