सोने-चांदी के दाम में बड़ी गिरावट से ग्राहकों को राहत, लेकिन क्या यह खरीदारी का सही मौका है? जानिए 22 सितंबर का पूरा बाजार हाल

संवाद 24 डेस्क। सोने और चांदी की कीमतों में बीते कारोबारी सत्र में आई तेज गिरावट ने घरेलू सर्राफा बाजार का रुख एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। सोमवार, 21 सितंबर 2026 को दिल्ली के सर्राफा बाजार में 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना 200 रुपये सस्ता होकर 1,56,400 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। इससे पहले शुक्रवार को इसका भाव 1,56,600 रुपये प्रति 10 ग्राम था। दूसरी ओर चांदी की कीमत में अपेक्षाकृत बड़ी गिरावट दर्ज की गई और यह 5,000 रुपये टूटकर 2.42 लाख रुपये प्रति किलोग्राम रह गई।
हालांकि 22 सितंबर के कारोबार में तस्वीर पूरी तरह एकतरफा नहीं रही। घरेलू वायदा बाजार में सोने और चांदी ने पिछले सत्र की गिरावट के बाद कुछ सुधार के संकेत दिए। ऐसे में आम खरीदारों के लिए यह समझना जरूरी है कि सर्राफा बाजार में एक दिन की गिरावट का अर्थ यह नहीं होता कि कीमतें लगातार नीचे ही जाती रहेंगी। सोने-चांदी की कीमतें वैश्विक बाजार, मुद्रा विनिमय दर, ब्याज दरों, भू-राजनीतिक घटनाक्रम और निवेशकों की धारणा जैसे कई कारकों से प्रभावित होती हैं।

सोने की कीमत में कितनी आई गिरावट?
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 21 सितंबर को 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना 200 रुपये की गिरावट के साथ 1,56,400 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। यह गिरावट पिछले कारोबारी सत्र की तुलना में मामूली दिखाई देती है, लेकिन इसी अवधि में चांदी में 5,000 रुपये प्रति किलोग्राम की कमी ने बाजार का ध्यान अधिक आकर्षित किया।
वायदा बाजार में भी सोमवार को दबाव दिखाई दिया। एनडीटीवी प्रॉफिट की रिपोर्ट के अनुसार, 21 सितंबर को अक्टूबर महीने के सोने के वायदा अनुबंध में दोपहर तक करीब 988 रुपये की गिरावट दर्ज हुई और भाव 1,53,393 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास रहा। इसी दौरान दिसंबर डिलीवरी वाली चांदी लगभग 1,814 रुपये की गिरावट के साथ 2,39,789 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास कारोबार कर रही थी।
इससे स्पष्ट है कि खुदरा सर्राफा बाजार और वायदा बाजार में दर्ज भावों में अंतर हो सकता है। ग्राहक को आभूषण खरीदते समय केवल किसी एक बाजार भाव को अंतिम कीमत नहीं मानना चाहिए।

चांदी में 5,000 रुपये की गिरावट ने क्यों खींचा ध्यान?
सोने की तुलना में चांदी की कीमत में सोमवार को अधिक स्पष्ट गिरावट देखने को मिली। दिल्ली में स्थानीय व्यापारियों के अनुसार चांदी 2.47 लाख रुपये प्रति किलोग्राम से घटकर 2.42 लाख रुपये पर आ गई।
चांदी की कीमत पर केवल निवेश मांग का प्रभाव नहीं पड़ता। इसका औद्योगिक उपयोग भी व्यापक है। इलेक्ट्रॉनिक्स, सौर ऊर्जा और विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में चांदी की मांग होती है। इसलिए वैश्विक आर्थिक गतिविधि और औद्योगिक मांग से जुड़ी अपेक्षाएं भी इसके मूल्य को प्रभावित कर सकती हैं।
इसी कारण चांदी में कभी-कभी सोने की तुलना में अधिक तेज उतार-चढ़ाव दिखाई देता है। आम उपभोक्ता के लिए इसका अर्थ यह है कि केवल एक-दो दिन की गिरावट देखकर भविष्य की कीमत का निश्चित अनुमान लगाना उचित नहीं होगा।

22 सितंबर को फिर संभला बाजार
21 सितंबर की गिरावट के बाद 22 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजार में कुछ सुधार दिखाई दिया। मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार 22 सितंबर की शुरुआत में हाजिर सोना करीब 4,350 डॉलर प्रति औंस के ऊपर रहा और अमेरिकी सोना वायदा भी मामूली बढ़त के साथ कारोबार कर रहा था। घरेलू बाजार में पिछले शुक्रवार के बंद भाव के आधार पर 24 कैरेट सोने का भाव 1,52,620 रुपये प्रति 10 ग्राम तथा चांदी 2,35,054 रुपये प्रति किलोग्राम बताया गया।
वहीं कारोबार के दौरान अक्टूबर डिलीवरी वाला एमसीएक्स सोना करीब 0.85 प्रतिशत नीचे 1,53,069 रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी करीब 0.89 प्रतिशत नीचे 2,39,455 रुपये प्रति किलोग्राम बताई गई। इससे यह स्पष्ट होता है कि अलग-अलग बाजारों, समय और अनुबंधों के कारण सोने-चांदी के भाव में अंतर दिखाई दे सकता है।

अमेरिकी ब्याज दर और डॉलर का सोने पर क्यों पड़ता है असर?
सोने की कीमत को प्रभावित करने वाले प्रमुख अंतरराष्ट्रीय कारकों में अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी बांड प्रतिफल शामिल हैं। सोना ब्याज देने वाली परिसंपत्ति नहीं है। इसलिए जब अमेरिकी बांड प्रतिफल बढ़ता है और ब्याज दरों के ऊंचे बने रहने की संभावना मजबूत होती है, तो कुछ निवेशकों के लिए ब्याज देने वाले साधन अपेक्षाकृत आकर्षक हो सकते हैं। इससे सोने पर दबाव पड़ सकता है।
21 सितंबर की गिरावट के संदर्भ में एनडीटीवी प्रॉफिट ने अमेरिकी ट्रेजरी प्रतिफल में वृद्धि और आगे ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंकाओं को कीमती धातुओं पर दबाव का प्रमुख कारण बताया। रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी दो वर्षीय ट्रेजरी प्रतिफल करीब 4.76 प्रतिशत तक पहुंच गया था।
हालांकि यह संबंध हमेशा सीधा नहीं होता। वैश्विक अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने पर सोने को सुरक्षित निवेश के रूप में मांग भी मिल सकती है। यही वजह है कि एक ही समय में अलग-अलग कारक सोने की कीमत को विपरीत दिशाओं में प्रभावित कर सकते हैं।

रुपये की मजबूती से भारतीय बाजार को मिली अतिरिक्त राहत
भारतीय बाजार में सोने की कीमत केवल अंतरराष्ट्रीय भाव से तय नहीं होती। डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यदि रुपया मजबूत होता है, तो आयातित सोने की घरेलू लागत पर कुछ राहत मिल सकती है। इसके विपरीत रुपये में कमजोरी आने पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत स्थिर रहने के बावजूद भारत में सोना महंगा हो सकता है।
21 सितंबर की घरेलू गिरावट के पीछे अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कमजोरी के साथ अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की मजबूती को एक कारण बताया गया था।

क्या आम ग्राहकों के लिए यह खरीदारी का मौका है?
सोने और चांदी की कीमत में गिरावट निश्चित रूप से आभूषण खरीदने वाले ग्राहकों के लिए कुछ राहत ला सकती है, लेकिन इसे सीधे निवेश का अवसर घोषित करना उचित नहीं होगा। बाजार में कीमतें तेजी से ऊपर-नीचे हो रही हैं और 22 सितंबर को भी उतार-चढ़ाव बना हुआ है।
विश्व स्वर्ण परिषद के हालिया भारतीय बाजार विश्लेषण के अनुसार अगस्त में सोने की कीमत में मजबूत तेजी के बाद सितंबर में घरेलू कीमतों में लगभग 4.6 प्रतिशत की गिरावट आई थी। परिषद ने यह भी बताया कि ऊंची कीमतों और अस्थिरता के कारण कुछ उपभोक्ता खरीदारी को टाल रहे हैं, जबकि विवाह से जुड़ी मांग अपेक्षाकृत मजबूत बनी हुई है।
इसलिए आभूषण की वास्तविक जरूरत रखने वाला ग्राहक कीमतों की तुलना करके खरीदारी कर सकता है, लेकिन केवल इस उम्मीद में बड़ी रकम लगाना कि कीमत तुरंत बढ़ेगी या घटेगी, जोखिमपूर्ण हो सकता है।

आभूषण खरीदते समय केवल सोने का भाव न देखें
सर्राफा बाजार में प्रदर्शित सोने का भाव और ग्राहक द्वारा भुगतान की जाने वाली अंतिम कीमत अलग हो सकती है। आभूषण की कीमत में सोने की शुद्धता, वजन, निर्माण शुल्क, वस्तु एवं सेवा कर तथा अन्य लागू शुल्क शामिल हो सकते हैं।
इसलिए ग्राहक को खरीदारी के समय केवल 22 या 24 कैरेट सोने के प्रति 10 ग्राम भाव की जानकारी लेकर संतुष्ट नहीं होना चाहिए। बिल में सोने का शुद्ध वजन, शुद्धता, निर्माण शुल्क और कर की अलग-अलग जानकारी देखना जरूरी है। आभूषण खरीदते समय हॉलमार्क और संबंधित प्रमाणन की जांच करना भी उपभोक्ता के हित में है।

सोने की कीमत आगे किस दिशा में जा सकती है?
निकट भविष्य में सोने की दिशा कई वैश्विक संकेतकों पर निर्भर करेगी। अमेरिकी केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति, डॉलर सूचकांक, अमेरिकी बांड प्रतिफल, पश्चिम एशिया की स्थिति, कच्चे तेल की कीमत और वैश्विक निवेश मांग प्रमुख कारक बने रह सकते हैं।
मनीकंट्रोल से बातचीत में एलकेपी सिक्योरिटीज के विशेषज्ञ ने सोने के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में 4,250 डॉलर के स्तर को महत्वपूर्ण समर्थन क्षेत्र बताया और एमसीएक्स पर 1,51,000 से 1,56,000 रुपये के दायरे का उल्लेख किया था। ये बाजार विश्लेषण हैं, निश्चित भविष्यवाणी नहीं।
यही बात चांदी पर भी लागू होती है। चांदी में औद्योगिक मांग और निवेश गतिविधि दोनों महत्वपूर्ण हैं, इसलिए इसकी कीमत में तेज उतार-चढ़ाव की संभावना बनी रह सकती है।

त्योहारी और विवाह सीजन पर भी रहेगी नजर
भारत में सोने की मांग पर त्योहार और विवाह का मौसम महत्वपूर्ण प्रभाव डालते हैं। विश्व स्वर्ण परिषद के सितंबर विश्लेषण के अनुसार अगस्त में मजबूत तेजी के बाद कीमतों में सुधार से खुदरा खरीदारों में कुछ प्रतीक्षा की प्रवृत्ति दिखाई दी, हालांकि विवाह संबंधी मांग अपेक्षाकृत स्थिर रही।
आने वाले महीनों में त्योहारी और विवाह संबंधी मांग बाजार की दिशा के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है। यदि कीमतों में अस्थिरता बनी रहती है, तो खरीदारों और आभूषण कारोबारियों दोनों की रणनीति प्रभावित हो सकती है।

आज के बाजार से ग्राहक क्या समझें?
21 सितंबर की गिरावट ने सोने-चांदी के ऊंचे स्तरों से होने वाले सुधार की संभावना को सामने रखा, लेकिन 22 सितंबर का बाजार यह भी दिखाता है कि कीमती धातुओं में कीमतें एक ही दिशा में लगातार नहीं चलतीं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 4,350 डॉलर प्रति औंस के आसपास और घरेलू वायदा बाजार में सोना 1.53 लाख रुपये से अधिक के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया।
इसलिए ग्राहकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वे बाजार में एक दिन की गिरावट या तेजी को देखकर जल्दबाजी में निर्णय न लें। आभूषण की जरूरत है तो शुद्धता और अंतिम बिल पर ध्यान दें और निवेश के उद्देश्य से खरीदारी करने वालों को अपने जोखिम, निवेश अवधि और वित्तीय लक्ष्य को ध्यान में रखना चाहिए।

सोने और चांदी में 21 सितंबर को आई गिरावट ने निश्चित रूप से आम खरीदारों का ध्यान खींचा है। दिल्ली में सोना 200 रुपये और चांदी 5,000 रुपये प्रति किलोग्राम सस्ती हुई, जबकि वायदा बाजार में भी दोनों धातुओं पर दबाव दिखाई दिया। लेकिन 22 सितंबर को बाजार में कुछ सुधार के संकेत भी मिले, जिससे यह स्पष्ट है कि कीमती धातुओं की चाल फिलहाल अस्थिर बनी हुई है।
आम ग्राहकों के लिए संदेश साफ है—गिरावट से खरीदारी की लागत कम हो सकती है, लेकिन केवल गिरावट को देखकर यह निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा कि कीमत अब लगातार कम ही होगी। सोना और चांदी खरीदने से पहले वर्तमान स्थानीय भाव, शुद्धता, निर्माण शुल्क, कर और अंतिम बिल की जांच करना सबसे महत्वपूर्ण है। निवेश के मामले में बाजार विशेषज्ञों की राय को जानकारी के रूप में देखा जाना चाहिए, निश्चित लाभ के आश्वासन के रूप में नहीं।

Geeta Singh
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