पान मसाला, तंबाकू होगा महंगा, 15 से 35% तक बढ़ सकती हैं कीमतें, कारोबार पर कड़ी निगरानी, लापरवाही पर जुर्माना
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संवाद 24 लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पान मसाला, तंबाकू और सिगरेट का सेवन करने वालों की जेब पर जल्द ही अतिरिक्त बोझ पड़ने वाला है। एक फरवरी 2026 से इन उत्पादों पर 40 प्रतिशत जीएसटी के साथ स्वास्थ्य एवं राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर और अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लागू किया जा रहा है। नई कर प्रणाली लागू होने के बाद पान मसाला और तंबाकू की कीमतों में 15 से 35 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है।
उत्पादन क्षमता के आधार पर लगेगा उपकर
नई व्यवस्था के तहत पान मसाला और तंबाकू पर कर उत्पादन क्षमता के आधार पर तय होगा। फैक्टरी संचालकों को यह बताना अनिवार्य होगा कि उनकी इकाई में कितनी मशीनें हैं और उनकी अधिकतम रेटेड स्पीड क्या है। इसी आधार पर उपकर की गणना की जाएगी। यह उपकर जीएसटी और उत्पाद शुल्क से अलग होगा और प्रत्येक महीने की शुरुआत में सात तारीख से पहले जमा करना अनिवार्य रहेगा। समय से भुगतान न करने पर 10 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा।
90 दिनों में होगा मशीनों का भौतिक सत्यापन
जीएसटी और एक्साइज विभाग की टीमें घोषणा के 90 दिनों के भीतर फैक्ट्रियों में लगी मशीनों का भौतिक सत्यापन करेंगी। प्रत्येक फैक्टरी को अलग-अलग पंजीकरण कराना होगा। जानकारों के अनुसार यह व्यवस्था पहले लागू रही कंपाउंडिंग सिस्टम की तर्ज पर लाई जा रही है, ताकि उत्पादन और कर अदायगी पर सीधी नजर रखी जा सके।
क्यों बढ़ाई जा रही है निगरानी
मर्चेंट चैंबर ऑफ उत्तर प्रदेश की जीएसटी कमेटी के चेयरमैन संतोष कुमार गुप्ता के अनुसार सरकार का मानना है कि पान मसाला और तंबाकू उत्पादों के निर्माता अपने वास्तविक उत्पादन और बिक्री के आंकड़े सही तरीके से घोषित नहीं करते, जिससे बड़े पैमाने पर कर चोरी होती है। इसी वजह से इस उद्योग को संवेदनशील मानते हुए स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर लागू किया गया है, जो पुराने क्षतिपूर्ति उपकर का स्थान लेगा।
कीमतें बढ़ने से उपभोक्ताओं पर असर
कानपुर में पान मसाला की करीब 12 उत्पादन इकाइयां हैं और शहर में इस कारोबार का तीन हजार करोड़ रुपये से अधिक का घोषित-अघोषित सालाना कारोबार बताया जा रहा है। द किराना मर्चेंट एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अलंकार ओमर के अनुसार, नई कर व्यवस्था का सीधा असर उपभोक्ताओं पर पड़ेगा और कीमतों में 15 से 35 प्रतिशत तक इजाफा हो सकता है। इससे बिक्री में गिरावट और अवैध कारोबार बढ़ने की आशंका से भी इन्कार नहीं किया जा सकता।
मशीनों से होती है बड़े पैमाने पर कर चोरी
विशेषज्ञों के मुताबिक एक पान मसाला मशीन यदि पांच घंटे तक लगातार चले तो लगभग 15 हजार पाउच तैयार कर सकती है। कारोबारी अक्सर कई शिफ्टों में उत्पादन करते हैं, लेकिन कागजों में कम मशीनें और कम उत्पादन दिखाते हैं। इसी वजह से तैयार माल, कच्चे माल और पैकिंग में बड़े पैमाने पर कर चोरी होती रही है। नई व्यवस्था के जरिए इसी पर अंकुश लगाने की कोशिश की जा रही है।
सरकार की मंशा जहां कर चोरी पर रोक लगाने और राजस्व बढ़ाने की है, वहीं नई कर प्रणाली से उपभोक्ताओं और कारोबारियों दोनों पर असर पड़ना तय है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि कीमतें बढ़ने के बाद बाजार की मांग किस हद तक प्रभावित होती है और क्या अवैध कारोबार पर वास्तव में लगाम लग पाती है या नहीं।






