KGMU में लव जिहाद मामले को लेकर VHP–बजरंग दल का प्रदर्शन, STF जांच की मांग,कुलपति को सौंपा 6 सूत्री ज्ञापन
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संवाद 24 डेस्क। लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में कथित लव जिहाद और धर्मांतरण के मामले को लेकर सोमवार को विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी करते हुए कुलपति से मुलाकात की और STF से निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए 6 सूत्री ज्ञापन सौंपा।
प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि मामले की गंभीरता के बावजूद विश्वविद्यालय स्तर पर गठित फैक्ट फाइंडिंग कमेटी से निष्पक्ष जांच संभव नहीं है। उनका कहना था कि जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी—जैसे STF—को सौंपी जाए। (नोट: नारेबाजी के दौरान आपत्तिजनक और हिंसक भाषा के आरोप भी सामने आए, जिनकी प्रशासनिक स्तर पर समीक्षा की मांग की गई है।)
सेवानिवृत्ति के बाद पद देने पर आपत्ति
प्रदर्शनकारियों ने सैयद अख्तर अब्बास नामक अधिकारी को सेवानिवृत्ति के बाद भी KGMU में जिम्मेदारी दिए जाने पर आपत्ति जताई। संगठन ने उन्हें तत्काल कुलपति के OSD पद से हटाने, उनकी नियुक्ति और आरोपों की स्वतंत्र सरकारी एजेंसी से जांच, और दोष सिद्ध होने पर रिकवरी व कार्रवाई की मांग की।
फैक्ट फाइंडिंग कमेटी पर सवाल
VHP ने KGMU प्रशासन की फैक्ट फाइंडिंग कमेटी पर भरोसा न जताते हुए इसे भंग करने की मांग की। ज्ञापन में कुछ डॉक्टरों और प्रोफेसरों पर महिला उत्पीड़न से जुड़े मामलों का उल्लेख करते हुए विश्वविद्यालय से बाहर की समिति बनाने की मांग की गई—जिसमें महिला आयोग की सदस्य, सेवानिवृत्त IAS/IPS और सेवानिवृत्त न्यायाधीश शामिल हों।
आउटसोर्सिंग नियुक्तियों की जांच
आउटसोर्सिंग के जरिए हो रही नियुक्तियों में पक्षपात के आरोप लगाते हुए प्रदर्शनकारियों ने इसकी जांच राज्य/केंद्र की बाहरी संस्था से कराने की मांग की। संगठन ने चेतावनी दी कि मांगें न माने जाने पर आंदोलन तेज किया जाएगा।
संगठन का दावा: कुछ मांगें मानी गईं
VHP के संगठन मंत्री समरेंद्र सिंह ने बताया कि कुलपति ने उनकी बात सुनी और दो मांगें स्वीकार कीं, जबकि अन्य मांगों पर शासन को पत्र लिखने का आश्वासन दिया।
मामला कैसे सामने आया
पीड़ित महिला डॉक्टर KGMU में MD पैथोलॉजी की छात्रा है। 17 दिसंबर को उसने कथित रूप से दवा की ओवरडोज लेकर आत्महत्या का प्रयास किया, जिसके बाद मामला उजागर हुआ। पीड़िता के पिता ने आरोप लगाया कि सहपाठी डॉ. रमीज ने उस पर धर्म परिवर्तन और विवाह का दबाव बनाया। शिकायत राज्य महिला आयोग और मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर की गई।
इसके बाद 24 दिसंबर को विशाखा कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर KGMU प्रशासन ने डॉ. रमीज को निलंबित कर परिसर में प्रवेश पर रोक लगाई और FIR दर्ज की गई। 26 दिसंबर को विश्वविद्यालय ने कथित कट्टरपंथी गतिविधियों की जांच के लिए 5 सदस्यीय समिति बनाई, जिसने 27 दिसंबर से जांच शुरू की और 7 दिन में रिपोर्ट देने की बात कही है।
फिलहाल, मामले में प्रशासनिक व जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं।






