
संवाद 24 संवाददाता। संपत्ति के सौदों में पारदर्शिता और कर अनुपालन की अनिवार्यता के बीच आगरा से एक गंभीर मामला सामने आया है। आयकर विभाग ने मंगलवार को सदर तहसील स्थित उपनिबंधक द्वितीय कार्यालय में औचक जांच कर करोड़ों रुपये के बैनामों की जानकारी छुपाए जाने की आशंका को बल दिया है। प्रारंभिक जांच में ऐसे संकेत मिले हैं कि नियमों की अनदेखी कर बड़े पैमाने पर नकद लेन-देन दर्ज किए गए, जबकि इनकी सूचना विभाग को नियमानुसार उपलब्ध नहीं कराई गई।
विभागीय सूत्रों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2019-20 से लेकर वर्तमान तक करीब साढ़े छह वर्षों में हुए बैनामों की पड़ताल की गई। सरसरी जांच में ही कई ऐसे बैनामे सामने आए जिनमें 20 हजार रुपये से अधिक की नकद राशि का उल्लेख है, जबकि कानून इसकी अनुमति नहीं देता। इसके अलावा, 30 लाख रुपये से अधिक के संपत्ति सौदों की सूचना आयकर विभाग को देना अनिवार्य है, लेकिन उपनिबंधक द्वितीय कार्यालय द्वारा इस नियम का नियमित पालन नहीं किया गया।
आयकर विभाग का अनुमान है कि जिन बैनामों की जानकारी साझा नहीं की गई, उनकी कुल धनराशि एक हजार करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। यह न केवल कर चोरी की संभावना की ओर इशारा करता है, बल्कि संपत्ति बाजार में काले धन के प्रवाह पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। जांच टीम ने कार्यालय से रिकॉर्ड जब्त कर लिया है और उपनिबंधक को शेष अभिलेख शीघ्र उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
जांच के दौरान कार्यालय में अफरातफरी का माहौल रहा। सुबह करीब 11:30 बजे पहुंची टीम ने शाम छह बजे तक दस्तावेजों की पड़ताल की। अधिकारियों का कहना है कि रिकॉर्ड के विस्तृत विश्लेषण के बाद उन करदाताओं और सौदेबाजों पर कार्रवाई की जाएगी, जिन्होंने संपत्ति लेन-देन की सही जानकारी छुपाई या नियमों का उल्लंघन किया।
इस कार्रवाई में आयकर अधिकारी वरुण गोयल, आयकर निरीक्षक संतोष केसरी और शुभम जायसवाल, कार्यालय अधीक्षक राजकुमार सोनी तथा कर सहायक प्रखर श्रीवास्तव शामिल रहे। विभाग की यह पहल स्पष्ट संकेत देती है कि संपत्ति बाजार में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और कर कानूनों के सख्त अनुपालन के लिए अब ढिलाई नहीं बरती जाएगी। आने वाले दिनों में इस जांच के नतीजे कई बड़े नामों और सौदों को बेनकाब कर सकते हैं।






