
RSS प्रमुख बोले— भारत को अपनी सीमाओं में रहकर हरसंभव मदद करनी चाहिए, क्योंकि हिंदुओं का एकमात्र राष्ट्र भारत
संवाद 24 कोलकाता। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे हमलों को लेकर चिंता जताते हुए कहा है कि वहां हिंदू अल्पसंख्यक हैं, इसी वजह से उनके हालात लगातार मुश्किल होते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि बांग्लादेश में हिंदुओं को सुरक्षित रहना है तो उन्हें संगठित रहना होगा और दुनियाभर के हिंदुओं को उनकी सहायता के लिए आगे आना चाहिए।
कोलकाता में RSS के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित एक संवाद कार्यक्रम में बोलते हुए मोहन भागवत ने कहा कि भारत को भी अपनी अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के भीतर रहते हुए जितनी संभव हो सके, उतनी मदद करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हिंदुओं के लिए भारत ही एकमात्र देश है, इसलिए भारत की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है।
भागवत ने इस विषय पर भारत सरकार की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार को इस दिशा में गंभीरता से ध्यान देना होगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि संभव है सरकार पहले से ही कुछ प्रयास कर रही हो, लेकिन कूटनीति से जुड़ी कई बातें सार्वजनिक नहीं की जा सकतीं। बावजूद इसके, उन्होंने कहा कि हालात ऐसे हैं कि कुछ न कुछ ठोस कदम उठाना जरूरी है।
अपने संबोधन में RSS प्रमुख ने हिंदू राष्ट्र की अवधारणा पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि भारत एक हिंदू राष्ट्र है और इसे साबित करने की कोई आवश्यकता नहीं है, ठीक वैसे ही जैसे यह साबित नहीं किया जाता कि सूरज पूरब से उगता है। उनके अनुसार, जो भी भारत को अपनी मातृभूमि मानता है और भारतीय संस्कृति को स्वीकार करता है, वह स्वाभाविक रूप से हिंदू राष्ट्र की अवधारणा को स्वीकार करता है।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि भविष्य में संसद संविधान में संशोधन कर ‘हिंदू राष्ट्र’ शब्द जोड़ने का निर्णय लेती है या नहीं लेती है, इससे संघ को कोई फर्क नहीं पड़ता। भागवत के अनुसार, वास्तविकता यही है कि भारत हिंदुओं का राष्ट्र है और यही संघ की मूल विचारधारा भी है।
पश्चिम बंगाल में नई बाबरी मस्जिद के निर्माण से जुड़े बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए मोहन भागवत ने इसे राजनीतिक साजिश करार दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे मुद्दे वोटों की राजनीति के लिए उठाए जाते हैं, जिनसे न तो मुसलमानों का भला होता है और न ही हिंदुओं का। उन्होंने इसे समाज के लिए नुकसानदायक बताया।
भागवत ने अपने बयान में बांग्लादेश का जिक्र हाल की एक गंभीर घटना के संदर्भ में किया। तीन दिन पहले ढाका के पास भालुका इलाके में एक हिंदू युवक की कथित तौर पर धर्म का अपमान करने के आरोप में पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। रिपोर्ट्स के अनुसार, युवक को नग्न अवस्था में पेड़ से लटकाकर आग लगा दी गई थी। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें भीड़ द्वारा नारेबाजी करते हुए देखा गया।
मृतक की पहचान दीपू चंद्र दास के रूप में हुई है। बाद में जांच में यह सामने आया कि उस पर लगाए गए ईशनिंदा के आरोप निराधार थे। बांग्लादेश की रैपिड एक्शन बटालियन के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है जिससे यह साबित हो कि युवक ने सोशल मीडिया पर धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाली कोई टिप्पणी की थी।
इस पूरी पृष्ठभूमि में मोहन भागवत का बयान बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी सहायता को लेकर नई बहस को जन्म दे रहा है।






