फर्रुखाबाद में शीतलहर का कहर: अलाव बने जीवन रेखा, नगर पालिका की उदासीनता पर उठे सवाल
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संवाद 24 संवाददाता। जनपद में कड़ाके की ठंड और शीतलहर ने जनजीवन को पूरी तरह से प्रभावित कर दिया है। गुरुवार को हालात ऐसे रहे कि पूरे दिन सूर्य के दर्शन नहीं हुए। सुबह से लेकर देर रात तक घना कोहरा और सर्द हवाएं लोगों की परेशानी बढ़ाती रहीं। आवश्यक काम होने पर ही लोग घरों से बाहर निकले, जबकि बाजारों और सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा। भीषण ठंड से बचने के लिए दुकानदारों, ठेले-रेहड़ी वालों और राहगीरों को जगह-जगह अलाव का सहारा लेते देखा गया। बाजारों में गर्म कपड़ों की मांग बढ़ गई है। कोई कैप खरीदता दिखा तो कोई मफलर और दस्ताने। ठंड का असर केवल इंसानों पर ही नहीं, बल्कि आवारा पशु भी जलते अलाव के पास खड़े होकर राहत लेते नजर आए।
स्थानीय दुकानदारों ने नगर पालिका परिषद पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि अलाव की व्यवस्था केवल गिने-चुने स्थानों तक सीमित है, जबकि अधिकांश बाजार और भीड़भाड़ वाले इलाकों में कोई इंतजाम नहीं किया गया। मजबूरी में दुकानदारों ने आपस में लकड़ियां इकट्ठा कर स्वयं अलाव जलाए हैं। एसबीआई एटीएम पर तैनात गार्ड मानसिंह पाल ने बताया कि ठंड अत्यधिक है और धूप न निकलने से हालात और बिगड़ गए हैं। उन्होंने कहा कि यह अलाव उन्होंने खासतौर पर सर्दी से कांप रही आवारा गायों के लिए जलाया है, जिससे लोगों को भी राहत मिल रही है।

नेहरू रोड त्रिपोलिया चौक पर अलाव ताप रहे स्थानीय व्यापारी निमिष गुप्ता ने बताया कि पिछले चार दिनों से ठंड अपने चरम पर है। सुबह और शाम घना कोहरा छाया रहता है, जिससे वाहन चलाने में भी दिक्कत होती है। नगर पालिका की ओर से लकड़ी न डलवाए जाने के कारण बाजार के लोगों ने खुद ही व्यवस्था की है। चांदपुर क्षेत्र में मेडिकल स्टोर संचालक सिद्धांत गुप्ता और अन्य व्यापारियों ने भी ठंड को असहनीय बताते हुए नगर पालिका की निष्क्रियता पर नाराजगी जताई। उनका कहना है कि लगातार कई दिनों से धूप नहीं निकली है और शीतलहर का प्रकोप बना हुआ है।
कुल मिलाकर, फर्रुखाबाद में कड़ाके की सर्दी ने लोगों की दिनचर्या अस्त-व्यस्त कर दी है। अलाव ही लोगों के लिए राहत का एकमात्र सहारा बने हुए हैं, जबकि नगर पालिका की तैयारियों पर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि सार्वजनिक स्थानों पर जल्द से जल्द अलाव की समुचित व्यवस्था की जाए, ताकि आमजन और बेसहारा पशुओं को राहत मिल सके।






