एयरपोर्ट पर प्रोटोकॉल तोड़कर हुआ था स्वागत, अब 7 साल बाद मेहमान बनकर जॉर्डन पहुंचेंगे PM मोदी; भारत की 40% खाद जरूरत यहीं से पूरी

संवाद 24, नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जॉर्डन, इथियोपिया और ओमान की त्रिपक्षीय विदेश यात्रा पर रवाना हो गए हैं। यात्रा के पहले चरण में वे जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला द्वितीय के निमंत्रण पर अम्मान पहुंचे। यह दौरा न सिर्फ कूटनीतिक रिश्तों के लिहाज से अहम है, बल्कि भारत-जॉर्डन संबंधों के 75 साल पूरे होने के कारण भी खास माना जा रहा है।

दरअसल, साल 2018 में पीएम मोदी फिलिस्तीन की ऐतिहासिक यात्रा पर जा रहे थे। उस समय भारत से फिलिस्तीन के लिए कोई सीधी उड़ान नहीं थी, इसलिए उनका विमान जॉर्डन की राजधानी अम्मान में करीब दो घंटे के लिए ट्रांजिट स्टॉप पर उतरा। आमतौर पर ऐसे छोटे ठहराव पर केवल औपचारिक अधिकारी ही मिलते हैं, लेकिन जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला खुद पीएम मोदी से मिलने एयरपोर्ट पहुंचे।

इस मुलाकात के करीब 15 दिन बाद जब किंग अब्दुल्ला भारत दौरे पर आए, तो पीएम मोदी ने प्रोटोकॉल तोड़ते हुए एयरपोर्ट जाकर उनका स्वागत किया। अब करीब 7 साल बाद पीएम मोदी एक बार फिर जॉर्डन के मेहमान बनकर वहां पहुंचे हैं।

भारत-जॉर्डन रिश्तों के 75 साल

भारत और जॉर्डन के बीच 1950 में राजनयिक संबंध स्थापित हुए थे। वर्ष 2025 में इन संबंधों के 75 साल पूरे हो चुके हैं। इसी ऐतिहासिक अवसर पर पीएम मोदी का यह दौरा दोनों देशों के रिश्तों को नई ऊंचाई देने वाला माना जा रहा है।

भारत, जॉर्डन का चौथा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। वित्त वर्ष 2023-24 में दोनों देशों के बीच करीब 26,033 करोड़ रुपये का द्विपक्षीय व्यापार हुआ। इसमें भारत का निर्यात लगभग 13,266 करोड़ रुपये रहा। दोनों देशों ने आने वाले समय में व्यापार को बढ़ाकर 5 अरब डॉलर (करीब 45,275 करोड़ रुपये) तक ले जाने का लक्ष्य रखा है।

खाद और फॉस्फेट में जॉर्डन की बड़ी भूमिका

जॉर्डन भारत के लिए उर्वरक कच्चे माल का बड़ा स्रोत है। भारत अपने कुल रॉक फॉस्फेट आयात का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा जॉर्डन से खरीदता है। इसके अलावा भारतीय कंपनियों ने जॉर्डन के फॉस्फेट और टेक्सटाइल सेक्टर में 1.5 अरब डॉलर से अधिक का निवेश किया है।
वहीं जॉर्डन भारत से मशीनरी, पेट्रोलियम उत्पाद, अनाज, रसायन, मीट, ऑटो पार्ट्स और औद्योगिक सामान आयात करता है।

IMEC कॉरिडोर पर अहम बातचीत संभव

पीएम मोदी के इस दौरे के दौरान इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (IMEC) पर भी चर्चा होने की संभावना है। इस कॉरिडोर की घोषणा 2023 में भारत में हुई G20 समिट के दौरान की गई थी। इसका उद्देश्य भारत, मिडिल ईस्ट और यूरोप के बीच एक तेज और किफायती ट्रेड रूट तैयार करना है।

IMEC को चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) का विकल्प माना जा रहा है। गाजा संघर्ष के कारण इस परियोजना पर असमंजस बना हुआ था, लेकिन हालात सामान्य होते ही यह एक बार फिर चर्चा में आ गई है। जॉर्डन और इजराइल के बीच रेल कनेक्टिविटी इस कॉरिडोर का अहम हिस्सा है, जिस पर काम अभी बाकी है।

40% समय और 30% लागत की बचत

रिपोर्ट्स के मुताबिक IMEC के पूरा होने पर भारत से यूरोप तक कार्गो पहुंचाने में करीब 40 प्रतिशत समय की बचत होगी और लागत में भी लगभग 30 प्रतिशत की कमी आएगी। फिलहाल भारत से जर्मनी तक कार्गो पहुंचने में करीब 36 दिन लगते हैं, जबकि इस कॉरिडोर से लगभग 14 दिन की बचत संभव है।

रणनीतिक और ऐतिहासिक दौरा

तेल संसाधनों के अभाव के बावजूद जॉर्डन फॉस्फेट और पोटाश जैसे खनिजों के कारण मिडिल ईस्ट में अहम स्थान रखता है। साथ ही हाशिमी राजवंश और क्षेत्रीय स्थिरता में उसकी भूमिका भी इसे भारत का महत्वपूर्ण साझेदार बनाती है।

ऐसे में पीएम मोदी का यह दौरा सिर्फ द्विपक्षीय रिश्तों को मजबूत करने तक सीमित नहीं है, बल्कि मिडिल ईस्ट और यूरोप को जोड़ने वाली भारत की दीर्घकालिक रणनीति का भी अहम हिस्सा माना जा रहा है।

Samvad 24 Office
Samvad 24 Office

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *