कानपुर का नशीला कनेक्शन: 1.81 करोड़ की कोडीन, मेरठ का सिंडिकेट और NDPS की जगह BNS की हल्की धाराएँ

संवाद 24 संवाददाता। उत्तर प्रदेश की औद्योगिक नगरी कानपुर एक बार फिर नशीले सिरप की तस्करी के बड़े नेटवर्क के केंद्र में है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) की ताज़ा जाँच में कानपुर की 12 मेडिकल फर्मों का सीधा तार मेरठ के कुख्यात आसिम-वसीम सिंडिकेट से जुड़ा पाया गया है। इनमें सबसे बड़ा नाम है – बिरहाना रोड की प्रसिद्ध अग्रवाल ब्रदर्स मेडिकल फर्म।


सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि अग्रवाल ब्रदर्स के गोदाम से नवंबर 2025 में 1.81 करोड़ रुपये मूल्य की कोडीन युक्त नशीली दवाएँ बरामद हुईं, फिर भी पुलिस ने NDPS एक्ट (Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act) की सख्त धाराओं के बजाय भारतीय न्याय संहिता (BNS) की हल्की-फुल्की धाराओं में ही मुकदमा दर्ज किया।


क्या मिला जाँच में?
कानपुर की कुल 12 फर्में मेरठ के सिंडिकेट को कोडीन सिरप सप्लाई कर रही थीं।
इनमें अग्रवाल ब्रदर्स सबसे बड़ा नाम।
जून 2025 में पहली बार नाम आया, लेकिन कार्रवाई नवंबर में तब हुई जब खाद्य सुरक्षा आयुक्त डॉ. रोशन जैकब स्वयं कानपुर आईं और अग्रवाल ब्रदर्स पर छापा मारा।
शहर के 9 मेडिकल स्टोर व फर्मों से कोडीन युक्त दवाएँ बरामद हुईं।
इनमें सिर्फ 2 के खिलाफ NDPS में मुकदमा, 6 पर BNS की हल्की धाराएँ, एक फर्म के खिलाफ तो तहरीर तक नहीं दी गई!


NDPS क्यों नहीं लगा?
ड्रग इंस्पेक्टर ने स्पष्ट रूप से NDPS एक्ट में मुकदमा दर्ज करने की तहरीर दी थी, लेकिन पुलिस ने उसे नजरअंदाज कर दिया। जानकारों का कहना है कि NDPS में न्यूनतम 10 साल की सजा और जमानत लगभग नामुमकिन होती है, जबकि BNS की धाराओं में 3-7 साल की सजा और आसानी से जमानत मिल जाती है।


बड़ा सवाल
जब 1.81 करोड़ की नशीली दवा बरामद हो रही हो, अंतरराज्यीय सिंडिकेट चल रहा हो, तो NDPS एक्ट लगाने में देरी या उसे टालना क्या सिर्फ “प्रक्रियात्मक खामी” है या इसके पीछे कोई दबाव काम कर रहा है


कानपुर अब तक क्यों बचा रहा?
पिछले 3-4 साल में उत्तर प्रदेश में कोडीन सिरप की तस्करी के ज्यादातर बड़े मामले मेरठ, गाजियाबाद, लखनऊ और प्रयागराज से सामने आए। कानपुर पहली बार इतने बड़े स्तर पर इस नेटवर्क में दिखा है। स्थानीय ड्रग इंस्पेक्टरों का कहना है कि कई बड़ी फर्में वर्षों से “लीगल खामी” का फायदा उठाकर बिना प्रिस्क्रिप्शन कोडीन सिरप बेच रही थीं।


अब आगे क्या?
FSDA ने सभी 12 फर्मों के लाइसेंस निलंबित करने की सिफारिश की है। साथ ही मेरठ पुलिस के साथ संयुक्त टीम बनाकर पूरे नेटवर्क को तोड़ने की तैयारी है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल अभी भी यही है – 1.81 करोड़ की बरामदगी के बावजूद NDPS एक्ट में मुकदमा क्यों नहीं?

Pavan Singh
Pavan Singh

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