
लखनऊ/रामपुर: रामपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट ने फर्जी पैन कार्ड मामले में सपा नेता आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को सात-सात साल की सजा सुनाई है। कोर्ट के फैसले के तुरंत बाद पुलिस ने दोनों को हिरासत में ले लिया और कड़ी सुरक्षा में रामपुर जेल ले जाया गया। कोर्ट ने दोनों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
जेल पहुंचते समय आजम खान के हाथ में चश्मे का केस और दो पैकेट बिस्किट थे। उनके पीछे बड़े बेटे अदीब भी मौजूद थे, जिन्होंने जेल गेट पर पिता और भाई से बात की। अब्दुल्ला अपने पिता के पीछे शांत खड़े दिखाई दिए। जेल में दाखिल होने से पहले आजम खान ने कहा कि अदालत ने उन्हें दोषी माना है और वे फैसले का सम्मान करते हैं।
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने आजम खान की सजा पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सत्ता का दुरुपयोग करने वालों को अंततः न्याय का सामना करना पड़ता है।
कैसे फंसे आजम और अब्दुल्ला? मामला क्या है
आजम खान 2017 में अखिलेश सरकार में नगर विकास मंत्री थे। आरोप है कि उन्होंने लखनऊ नगर निगम से बेटे अब्दुल्ला का फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनवाया था। इसी फर्जी दस्तावेज के आधार पर अब्दुल्ला ने दो अलग-अलग पैन कार्ड बनवाए और चुनाव लड़ा। BSP उम्मीदवार नवाब काजिम अली खान ने शिकायत की कि नामांकन के समय अब्दुल्ला की उम्र 25 साल नहीं थी। जांच में सामने आया कि उन्होंने फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया था। बाद में उनकी विधायकी रद्द कर दी गई।
यह मामला भाजपा नेता आकाश सक्सेना की शिकायत पर 2019 में दर्ज हुआ था। जांच में पाया गया कि अब्दुल्ला के पास दो जन्म तिथियों वाले पैन कार्ड थे—एक में जन्म वर्ष 1990 और दूसरे में 1993। असली जन्म तिथि 1 जनवरी 1993 के मुताबिक वह 2017 में चुनाव लड़ने के योग्य नहीं थे।
कोर्ट का फैसला और कौन-कौन सी धाराएं लगाई गईं
एमपी-एमएलए कोर्ट के जज शोभित बंसल ने आजम खान और अब्दुल्ला को दस्तावेजों की जालसाजी और धोखाधड़ी का दोषी पाया। कोर्ट ने उन्हें धारा 467 के तहत 7 साल, धारा 120-बी के तहत 1 साल, धारा 468 और 420 में 3-3 साल तथा धारा 471 के तहत 2 साल की सजा सुनाई है। यह साफ नहीं है कि पहले जेल में बिताई गई अवधि को इस सजा में जोड़ा जाएगा या नहीं।
आजम के वकील ने कहा कि वे फैसले का अध्ययन कर हाईकोर्ट में अपील दाखिल करेंगे।
आजम के खिलाफ कितने केस हैं
आजम खान के खिलाफ कुल 104 मुकदमे दर्ज हैं। इनमें से 11 मामलों में अदालत फैसले सुना चुकी है। 6 मामलों में उन्हें सजा हुई और 5 में वे बरी हुए हैं। दो महीने पहले ही वे सीतापुर जेल से बाहर आए थे, जबकि अब्दुल्ला नौ महीने पहले हरदोई जेल से रिहा हुए थे।

आकाश सक्सेना कौन हैं?
रामपुर शहर सीट के भाजपा विधायक आकाश सक्सेना इस मामले में वादी हैं और अब तक 43 मामलों में सीधे पक्षकार रहे हैं। 2022 के उपचुनाव में उन्होंने आजम के करीबी आसिम रजा को 25,703 वोटों से हराया था। उनके पिता शिव बहादुर सक्सेना उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री रह चुके हैं।






