15 नवंबर 2025 का वैदिक पंचांग
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संवाद 24 (आचार्य मधुसूदन अग्निहोत्री)
वैदिक पंचांग
अंग्रेजी दिनांक – 15 नवम्बर 2025, शनिवार
कालगणना
विक्रम संवत् – 2082
शक संवत् – 1947
कलियुग – 5127
संवत्सर – सिद्धार्थी
अयन – दक्षिणायण
ऋतु – हेमंत
मास, पक्ष एवं वार विवरण
मास – मार्गशीर्ष
पक्ष – कृष्ण
तिथि – एकादशी रात्रि 10:52 तक, तत्पश्चात् द्वादशी
नक्षत्र, योग एवं करण
नक्षत्र – उत्तराफाल्गुनी पूरे दिन और रात्रि
योग – वैधृति दोपहर 11:02 तक, तत्पश्चात् विष्कुंभ
करण – गर रात्रि 10:52 तक, तत्पश्चात् वणिज
सूर्य, काल एवं मुहूर्त
सूर्योदय – 06:41
सूर्यास्त – 05:42
ब्रह्ममुहूर्त – प्रातः 04:58 से 05:50 तक
अभिजीत मुहूर्त – 11:49 से 12:33 तक
निशिता मुहूर्त – रात्रि 11:45 से 12:38 (16 नवम्बर) तक
भद्रा – नहीं
पंचक – नहीं
दिशाशूल – उत्तर दिशा में
राहुकाल – प्रातः 09:23 से 10:47 तक (उज्जैन समयानुसार)
व्रत पर्व विवरण
उत्पन्ना एकादशी – एकादशी का व्रत करने से पापों का क्षय होता है तथा मन में सात्विकता का संचार होता है।
तुलसी-विवाह का विशेष महत्व अगले दिन रहेगा।
विशेष जानकारी
एकादशी तिथि पर अन्न का सेवन वर्जित माना गया है।
इस दिन भगवान विष्णु के नाम का स्मरण और दान पुण्य में वृद्धि करता है।
दिशा विवेक
- उत्तर दिशा में यात्रा अशुभ मानी जाती है, अतः तिलक लगाकर आवश्यक यात्रा करें।
- पूजा अर्चना सदैव पूर्व और उत्तर दिशा में करें।
- दक्षिण की ओर मुख करके पूजा करने से मानसिक अशांति बढ़ती है।
सोते समय
दक्षिण की ओर सिर करके सोना आयु एवं स्थिरता देता है।
पूर्व की ओर सिर रखने से स्मरणशक्ति बढ़ती है।
विद्यार्थियों के लिए उपाय
आज के दिन अध्ययन कक्ष में सरस्वती मंत्र “ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः” का 21 बार जप करें।
सफेद पुष्प चढ़ाने से बुद्धि और वाणी में सौम्यता बढ़ती है।

