बिहार में जनादेश का बड़ा उलटफेर: राजग की प्रचंड वापसी, महागठबंधन बुरी तरह सिमटा

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संवाद 24 | दिल्ली/पटना
बिहार विधानसभा चुनाव में इस बार जनता ने ऐसा फैसला सुनाया जिसने पूरे राजनीतिक परिदृश्य को हिला दिया। राज्य में राजग ने तेज लहर के साथ जोरदार जीत दर्ज की, जबकि महागठबंधन को उम्मीदों के विपरीत बड़ी शिकस्त का सामना करना पड़ा। विभिन्न क्षेत्रों में अप्रत्याशित परिणामों ने राजनीति के समीकरण पलट दिए और कई सीटों पर मुकाबला बेहद दिलचस्प रहा।

राजग को भारी समर्थन, भाजपा बनी सबसे बड़ी पार्टी

प्रदेश भर में राजग को मिले व्यापक समर्थन ने चुनाव के रुझान बदल दिए। भाजपा 90 सीटों के साथ इस चुनाव की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। जदयू को भी अच्छा प्रदर्शन मिला और उसने 85 सीटें जीत लीं। लोजपा ने 19 सीटों पर कब्जा किया, जबकि हम को 5 सीटें मिलीं। कुल मिलाकर गठबंधन ने 243 सदस्यीय सदन में 199 के आसपास सीटों पर बढ़त लेकर मजबूत स्थिति बनाई।
राजग ने ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहरी इलाकों तक लगभग सभी क्षेत्रों में उल्लेखनीय बढ़त बनाई। कई सीटों पर भाजपा और जदयू को एक-तरफा समर्थन मिलता नज़र आया।

महागठबंधन को करारा झटका, 33 सीटों पर सिमटा महागठबंधन का प्रमुख दल

उद्धव महागठबंधन को इस चुनाव में उम्मीदों पर खरा उतरना मुश्किल रहा। आरजेडी-कांग्रेस गठबंधन को जनता का भरोसा नहीं मिल सका और महागठबंधन की प्रमुख पार्टी केवल 33 सीटों पर सिमट कर रह गई। आरजेडी ने 25 सीटें जीतीं, जबकि कांग्रेस 6 सीटों तक सीमित रह गई।
यह प्रदर्शन 2020 के चुनावों की तुलना में बेहद कमजोर रहा, जहाँ विपक्ष ने कई स्थानों पर कड़ा मुकाबला पेश किया था। इस बार कई सीटों पर वोट प्रतिशत भी उल्लेखनीय रूप से कम हुआ।

तीसरा मोर्चा भी मजबूत हुआ, AIMIM ने बनाई अपनी जगह

इस बार तीसरे मोर्चे में शामिल एआईएमआईएम ने भी कुछ क्षेत्रों में प्रभाव दिखाया। पार्टी ने कुल 5 सीटों पर जीत दर्ज की। सीमांचल क्षेत्रों में पार्टी को खासा समर्थन मिला, जहाँ मुस्लिम बहुल इलाकों में उसकी पकड़ मजबूत दिखाई दी। जनसुराज को भी एक सीट हासिल हुई।
इस प्रदर्शन ने संकेत दिया कि प्रदेश में पारंपरिक दो-ध्रुवीय राजनीति के अलावा अन्य दल भी तेजी से अपना आधार विकसित कर रहे हैं।

वर्षों के वोट पैटर्न में भी परिवर्तन दर्ज

वर्ष 2020 की तुलना में इस बार विभिन्न दलों के वोट प्रतिशत में कई महत्वपूर्ण बदलाव दिखे।

  • भाजपा का वोट शेयर लगभग 19% के आसपास दर्ज हुआ।
  • जदयू का मत प्रतिशत लगभग 15% रहा।
  • आरजेडी का वोट शेयर करीब 23% के आसपास रहा।
  • कांग्रेस को लगभग 9% वोट मिले।
  • लोजपा लगभग 5% वोट प्रतिशत हासिल करने में सफल रही।

ये आँकड़े बताते हैं कि मतदाताओं ने इस बार वोटिंग पैटर्न में स्पष्ट परिवर्तन किया है।

नेताओं की छवि और रणनीति का रहा महत्वपूर्ण प्रभाव

चुनावी मैदान में कुछ प्रमुख चेहरों ने पार्टी के प्रदर्शन को नई दिशा दी। राजग की ओर से नेतृत्व पर भरोसा और केंद्र-राज्य के संयुक्त विकास एजेंडे ने वोटरों पर असर डाला। इसके साथ ही संगठन स्तर पर की गई चुनावी तैयारी, बूथ स्तर पर मजबूत प्रबंधन और प्रचार रणनीति ने भी जीत में योगदान दिया।
वहीं महागठबंधन आंतरिक समन्वय की कमी और उम्मीदवार चयन जैसी चुनौतियों से उभर नहीं सका। कई क्षेत्रों में उसके वोट ट्रांसफर का समीकरण भी बिगड़ा।

प्रधानमंत्री का बयान: नकारात्मक राजनीति ने विपक्ष को कमजोर किया

चुनाव परिणामों के बाद प्रधानमंत्री ने विपक्ष पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि नकारात्मक राजनीति जनता को स्वीकार नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्य में जनता ने विकास को प्राथमिकता दी, जबकि विपक्ष केवल आलोचना और भ्रमित करने वाली राजनीति करता रहा।
उनके अनुसार कांग्रेस जैसी पार्टियों में लगातार आंतरिक विभाजन बढ़ रहा है और जनसमर्थन लगातार कम होता जा रहा है।

वरिष्ठ नेताओं ने परिणामों को जनता का विश्वास बताया

राज्य और केंद्र के वरिष्ठ नेताओं ने इस जीत को बिहार के मतदाताओं का भरोसा और राज्य में स्थिर शासन की इच्छा बताया। उनका कहना है कि विकास कार्यों, कल्याणकारी योजनाओं और सरकारी कार्यप्रणाली पर जनता ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी, जिसका लाभ पार्टी गठबंधन को मिला।
दूसरी ओर विपक्षी नेताओं ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन, संगठनात्मक कमियों और उम्मीदवारों के बीच तालमेल की कमी को खराब प्रदर्शन का कारण बताया।

Samvad 24 Office
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