
संवाद 24 नई दिल्ली। दीपों और खुशियों का महापर्व दिवाली आज पूरे देश में मनाया जा रहा है, लेकिन देश की राजधानी दिल्ली के बाशिंदों के लिए यह सुबह किसी बुरे सपने से कम साबित नहीं हुई। सूरज की पहली किरण के साथ ही समूचा दिल्ली-एनसीआर घने और जहरीले स्मॉग की चादर में लिपटा नजर आया। त्योहार के उत्साह के बीच हवा की गुणवत्ता (AQI) एक बार फिर गिरकर ‘बहुत खराब’ से ‘गंभीर’ श्रेणी के मुहाने पर पहुंच चुकी है। चारों तरफ पसरी धुंध और आंखों में चुभते धुएं के कारण ऐसा प्रतीत हो रहा है मानो देश का दिल एक विशालकाय गैस चैंबर में तब्दील हो चुका है, जहां हर सांस के साथ लोगों के फेफड़ों में जहर घुल रहा है।
कई इलाकों में AQI 400 के पार, रेड जोन में आधी दिल्ली
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्रों से प्राप्त ताजा आंकड़ों के अनुसार, राजधानी के 59 सक्रिय स्टेशनों में से कई महत्वपूर्ण केंद्रों पर AQI का कांटा 400 के खतरनाक स्तर को पार कर गया है। जहांगीरपुरी, पंजाबी बाग, रोहिणी, आरके पुरम, विवेक विहार और आईआईटी दिल्ली जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में हवा की स्थिति अत्यधिक चिंताजनक बनी हुई है, जहां सूचकांक 440 से 455 तक दर्ज किया गया। दृश्यता बेहद कम हो जाने से सड़कों पर वाहनों की रफ्तार धीमी पड़ गई है और सुबह टहलने निकले लोगों को बिना मास्क सांस लेना दूभर हो गया है।
मौसम की सुस्ती और पराली का धुआं बना जानलेवा
पर्यावरण विशेषज्ञों और मौसम विज्ञानियों का कहना है कि वर्तमान स्थिति कई प्रतिकूल कारकों के एक साथ जुड़ने का परिणाम है। उत्तर भारत में गुलाबी ठंड की दस्तक के साथ ही हवा की रफ्तार सुस्त पड़ गई है। हवा में ठहराव के कारण वातावरण में मौजूद प्रदूषक तत्व जमीन के ऊपरी हिस्से में ही फंस कर रह गए हैं। इसके साथ ही पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने की घटनाएं, वाहनों से निकलने वाला अनियंत्रित धुआं और औद्योगिक उत्सर्जन राजधानी की हवा को लगातार दमघोंटू बना रहे हैं। वायु गुणवत्ता पूर्व चेतावनी प्रणाली (Air Quality Early Warning System) ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि अगले दो दिनों तक राहत मिलने के कोई आसार नहीं हैं।
ग्रैप-3 की पाबंदियां और सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस
हालात की गंभीरता को भांपते हुए प्रशासन ने पूरे एनसीआर में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के तीसरे चरण की सख्त पाबंदियां लागू कर दी हैं। इसके तहत गैर-जरूरी निर्माण और तोड़फोड़ की गतिविधियों पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है, साथ ही सड़कों पर प्रदूषण नियंत्रण के लिए पानी और एंटी-स्मॉग गन से छिड़काव तेज कर दिया गया है। शीर्ष अदालत ने प्रदूषण के इस भयावह खतरे को देखते हुए केवल हरित पटाखों (Green Crackers) को तय समय सीमा के भीतर जलाने की अनुमति दी है। बावजूद इसके, जानकारों का मानना है कि यदि आतिशबाजी पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हुआ तो आज रात के बाद हवा की स्थिति आपदा स्तर तक पहुंच सकती है।
डॉक्टरों की सख्त हिदायत: बुजुर्ग और बच्चे बरतें विशेष सावधानी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों और प्रमुख अस्पतालों के डॉक्टरों ने नागरिकों के लिए विशेष स्वास्थ्य एडवाइजरी जारी की है। चिकित्सकों का कहना है कि हवा में सूक्ष्म कणों (PM2.5 और PM10) की भारी मात्रा न केवल फेफड़ों बल्कि दिल और दिमाग के लिए भी गंभीर खतरा पैदा कर रही है। खासकर अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, हृदय रोग से पीड़ित व्यक्तियों, बुजुर्गों और छोटे बच्चों को अनावश्यक रूप से बाहर न निकलने की सलाह दी गई है। लोगों से अपील की गई है कि घर के भीतर एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें, बाहर निकलते समय अनिवार्य रूप से एन-95 मास्क लगाएं और त्योहार के दौरान पर्यावरण के प्रति अपनी साझा जिम्मेदारी निभाएं।






