
शिकायत के अनुसार, मोहम्मदाबाद थाना क्षेत्र के सनौड़ा ईश्वरी गांव निवासी रीना शर्मा का मायका छिबरामऊ थाना क्षेत्र के कुंवरपुर बनवारी में है। जुलाई 2024 में उनके पड़ोस में रहने वाले विकास ने उन्हें बताया कि उसके रिश्तेदार अखिलेश का इंदरगढ़ थाना क्षेत्र के मझिला गांव में एक इंटर कॉलेज है, जहां सरकारी नौकरी के पद रिक्त हैं। इसी जानकारी के आधार पर रीना अपने पति रामकुमार के साथ कॉलेज पहुंचीं। वहां उनकी मुलाकात अखिलेश और कॉलेज प्रबंधक राजेंद्र प्रसाद से कराई गई।
दो पदों पर नौकरी का दिया गया था भरोसा
रीना शर्मा के मुताबिक, कॉलेज प्रबंधन की ओर से संस्थान के एडेड होने से संबंधित दस्तावेज भी दिखाए गए। इसके बाद उन्हें शारीरिक शिक्षा (फिजिकल टीचर) और उनके पति को पुस्तकालयाध्यक्ष (लाइब्रेरियन) के पद पर नियुक्त कराने का भरोसा दिया गया। आरोप है कि दोनों की नियुक्ति के नाम पर उनसे बड़ी रकम की मांग की गई, जिसके बाद उन्होंने अपने और पति के बैंक खातों के माध्यम से धनराशि उपलब्ध कराई।
छह महीने बाद भी नियुक्ति नहीं, डेढ़ साल तक चलता रहा इंतजार
शिकायतकर्ता का आरोप है कि रकम देने के करीब छह महीने बाद भी जब नियुक्ति पत्र नहीं मिला तो संबंधित लोगों ने कुछ और समय इंतजार करने को कहा। नौकरी मिलने की उम्मीद में दंपती लगभग डेढ़ साल तक इंतजार करते रहे, लेकिन उन्हें न तो नियुक्ति पत्र मिला और न ही नौकरी से संबंधित कोई ठोस जानकारी दी गई। इसके बाद दंपती ने अपनी जमा की गई रकम वापस मांगनी शुरू कर दी।
रकम मांगने पर धमकी देने का आरोप
रीना शर्मा ने पुलिस अधीक्षक को दिए शिकायती पत्र में आरोप लगाया कि जब उन्होंने और उनके पति ने अपनी रकम वापस मांगी तो उन्हें कथित तौर पर जान से मारने की धमकी दी गई। मामले को लेकर उन्होंने पुलिस अधीक्षक से न्याय की गुहार लगाई और पूरे प्रकरण की शिकायत की।
एसपी के आदेश पर चार लोगों के खिलाफ मुकदमा
शिकायत के आधार पर पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर अखिलेश कुमार, राजेंद्र, निशा और विकास के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। अब जांच के दौरान बैंक खातों के माध्यम से हुए लेनदेन, कॉलेज के दस्तावेजों और नौकरी दिलाने के नाम पर किए गए दावों की वास्तविकता की पड़ताल महत्वपूर्ण होगी।
सरकारी नौकरी के नाम पर ठगी से सावधान रहने की जरूरत
कन्नौज जनपद में इससे पहले भी नौकरी दिलाने के नाम पर रकम लेने और फर्जी नियुक्ति पत्र देने से जुड़े मामले सामने आ चुके हैं। ऐसे मामलों में युवाओं और अभिभावकों को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है। किसी भी संस्थान में नियुक्ति के नाम पर रकम देने से पहले उसकी मान्यता, रिक्त पदों और चयन प्रक्रिया की आधिकारिक स्तर पर पुष्टि अवश्य करनी चाहिए।






