US मिडटर्म इलेक्शन: क्या वाशिंगटन में शुरू हो चुका है ‘देसी पावर’ का नया दौर?

​संवाद 24 नई दिल्ली।​ संयुक्त राज्य अमेरिका के मध्यावधि (मिडटर्म) चुनावों के ताजा परिणामों ने एक बार फिर वैश्विक पटल पर भारतवंशियों के बढ़ते सियासी प्रभाव को साबित कर दिया है। चुनावी अखाड़े में उतरे भारतीय मूल के कई प्रमुख डेमोक्रेटिक नेताओं ने जबर्दस्त जीत हासिल करते हुए अमेरिकी राजनीति में अपनी ताकत का लोहा मनवाया है। वर्जीनिया से लेकर फ्लोरिडा और मैरीलैंड तक, भारतीय चेहरों ने कड़े मुकाबलों में जीत की नई पटकथा लिख दी है।

​​सुहास सुब्रमण्यम की प्रचंड जीत, मिला दूसरा कार्यकाल​
​वर्जीनिया के 10वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से भारतीय मूल के दिग्गज डेमोक्रेट सुहास सुब्रमण्यम ने एकतरफा मुकाबले में ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। अब तक हुई करीब 95 फीसदी मतों की गिनती में सुब्रमण्यम ने लगभग 63 फीसदी वोट हासिल कर अपने रिपब्लिकन प्रतिद्वंद्वी डेव बेकविथ को भारी अंतर से पछाड़ दिया, जिन्हें महज 37 फीसदी वोट मिले। ​सुहास सुब्रमण्यम ने पहली बार 2024 में जीत दर्ज कर वर्जीनिया से अमेरिकी संसद में पहुंचने वाले पहले भारतीय-अमेरिकी बनकर इतिहास रचा था। इस ताजा और शानदार जनादेश के साथ उन्हें प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) में लगातार दो साल का दूसरा कार्यकाल मिल गया है। इस सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी अहसेन मलिक भी अपनी दावेदारी पेश कर रहे थे, लेकिन जनता ने सुब्रमण्यम के कामकाज पर अटूट भरोसा जताया।

​​मैरीलैंड में अरुणा मिलर का परचम बरकरार​
​पड़ोसी राज्य मैरीलैंड से भी भारतीय समुदाय के लिए उत्साहजनक परिणाम सामने आए हैं। डेमोक्रेटिक पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ रहीं मैरीलैंड की मौजूदा लेफ्टिनेंट गवर्नर अरुणा मिलर ने एक बार फिर शानदार वापसी की है। गवर्नर वेस मूर के साथ मिलकर चुनाव लड़ रहीं अरुणा मिलर ने रिपब्लिकन उम्मीदवार रॉब क्रोप को करारी शिकस्त दी। ​अरुणा मिलर की इस जीत का रणनीतिक महत्व बेहद खास है। वह अमेरिका के किसी भी राज्य में शीर्ष कार्यकारी पद (एग्जीक्यूटिव पोस्ट) पर काबिज सबसे प्रमुख भारतीय-अमेरिकी हस्तियों में गिनी जाती हैं। उनके दोबारा चुने जाने से अमेरिकी प्रशासन में दक्षिण एशियाई समुदाय की आवाज और भी मजबूत होगी।

​​फ्लोरिडा में पिया डांडिया ने पलटी बाजी​
​इस चुनाव में सबसे चौंकाने वाला और रोमांचक मुकाबला फ्लोरिडा के 22वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट में देखा गया, जहां की सांसें थाम देने वाली चुनावी जंग पूरे देश के मीडिया की सुर्खियों में थी। डेमोक्रेटिक उम्मीदवार पिया डांडिया ने बेहद नजदीकी और कांटे की टक्कर में रिपब्लिकन प्रतिद्वंद्वी केसी असकर को मात दी। ​करीब 97.6 फीसदी वोटों की गिनती तक पिया डांडिया 51.9 प्रतिशत मतों के साथ विजयी रहीं, जबकि असकर को 48.1 प्रतिशत वोट मिले। फ्लोरिडा का यह क्षेत्र अमेरिकी कांग्रेस के निचले सदन (हाउस) में बहुमत के संतुलन को तय करने वाले बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण चुनावी अखाड़ों में से एक माना जा रहा था।

​​ओहायो में विवेक रामास्वामी को लगा झटका​
​जहां एक तरफ डेमोक्रेटिक खेमे के भारतवंशी चेहरों ने जश्न मनाया, वहीं रिपब्लिकन पार्टी की तरफ से ओहायो के गवर्नर पद की दौड़ में उतरे चर्चित युवा नेता विवेक रामास्वामी के लिए शुरुआती रुझान निराशाजनक रहे हैं। लगभग 50 फीसदी मतों की गिनती के बाद डेमोक्रेटिक उम्मीदवार एमी एक्टन ने करीब 53 फीसदी वोट पाकर मजबूत बढ़त बना ली है, जबकि रामास्वामी 44 फीसदी वोटों के साथ पीछे चल रहे हैं। ​अमेरिकी राजनीति में भारतीय समुदाय अब केवल वोट बैंक या चंदा देने वाले समूह तक सीमित नहीं रहा, बल्कि नीति निर्धारण और शासन की मुख्यधारा में अपनी अमिट छाप छोड़ रहा है। इन मध्यावधि चुनावों ने यह साफ कर दिया है कि अमेरिकी सत्ता के गलियारों में अब ‘समोसा कॉकस’ और भारतीय प्रतिनिधित्व का दबदबा तेजी से विस्तार ले रहा है।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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