वोटिंग से ठीक पहले केशम द्वीप पर अमेरिकी बमबारी, क्या छिड़ गया नया वैश्विक संकट?

​संवाद 24 नई दिल्ली।मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) के सुलगते हालात के बीच एक बेहद सनसनीखेज और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खलबली मचा देने वाला घटनाक्रम सामने आया है। संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनातनी ने उस वक्त एक खतरनाक मोड़ ले लिया, जब अमेरिकी सेना ने रणनीतिक रूप से दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री गलियारे ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) में स्थित ईरान के प्रमुख केशम द्वीप (Qeshm Island) पर गुपचुप तरीके से भीषण हवाई हमले कर दिए। अचानक हुए इन लक्षित हमलों के बाद पूरा द्वीप सिलसिलेवार धमाकों की आवाज़ से दहल उठा, जिसने वैश्विक कूटनीति और तेल आपूर्ति गलियारे की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

​चुनावी माहौल और गुप्त सैन्य ऑपरेशन का खेल
यह पूरी सैन्य कार्रवाई बेहद चौंकाने वाले समय पर अंजाम दी गई है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया और प्रमुख अमेरिकी रक्षा अधिकारियों के हवाले से छनकर आ रही जानकारियों के अनुसार, इजरायली नेतृत्व ने अमेरिकी प्रशासन पर ईरान के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाने का दबाव बनाया था। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू द्वारा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से चुनाव के तुरंत बाद ईरान के सैन्य ठिकानों पर सीधी कार्रवाई करने का आग्रह किया गया था। हालांकि, वाशिंगटन ने मामले को सार्वजनिक रूप से बड़ा युद्ध बनाने की घोषणा किए बिना ऑपरेशन को पूरी तरह गोपनीय और सीमित दायरे में रखने की रणनीति अपनाई, ताकि खुला टकराव दिखने से पहले ही रणनीतिक ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचाया जा सके।

​केशम द्वीप का रणनीतिक महत्व और धमाकों की गूंज
केशम द्वीप फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को जोड़ने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण ईरानी द्वीप माना जाता है। दुनिया भर में होने वाले कुल कच्चे तेल व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा इसी तंग समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है। यहां ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के मिसाइल ठिकाने, रडार सिस्टम और तटीय सैन्य चौकियां मौजूद हैं। अमेरिकी रक्षा सूत्रों का कहना है कि इसी इलाके से अमेरिकी और सहयोगी जहाजों पर उत्पन्न हो रहे संभावित खतरों को बेअसर करने के उद्देश्य से सटीक गाइडेड हथियारों के जरिए हमला बोला गया। धमाकों की तीव्रता इतनी ज्यादा थी कि कई किलोमीटर दूर तक तटीय क्षेत्रों में कंपन महसूस किया गया।

​विश्व शांति और वैश्विक बाजार पर क्या होगा असर?
इस गुप्त हवाई कार्रवाई के बाद पूरे खाड़ी क्षेत्र में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है। ईरान की तरफ से जवाबी कार्रवाई की आशंका ने अंतरराष्ट्रीय रक्षा विश्लेषकों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। यदि ईरान इस हमले के विरोध में होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों की आवाजाही को बाधित करने का प्रयास करता है, तो इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ना तय है। राजनयिक जानकारों का मानना है कि खुले संघर्ष से बचने के लिए ऑपरेशन को भले ही “सीमित और गुप्त” बताया गया हो, लेकिन यह कार्रवाई दोनों देशों को सीधे युद्ध के मुहाने पर लाकर खड़ा कर सकती है। फिलहाल सैन्य विशेषज्ञ और विश्व समुदाय तेहरान के अगले आधिकारिक कदम और बयान पर कड़ी नजर बनाए हुए हैं।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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