ऑर्कुट की वापसी की तैयारी: कभी युवाओं की पहली पसंद रहा सोशल नेटवर्क क्यों हुआ बंद, अब फिर क्यों जगी उम्मीद?

संवाद 24 डेस्क। इंटरनेट की दुनिया में कुछ नाम ऐसे हैं, जो केवल तकनीक के इतिहास का हिस्सा नहीं होते, बल्कि लाखों लोगों की यादों और भावनाओं से भी जुड़े होते हैं। ऑर्कुट ऐसा ही एक नाम है। एक समय था जब भारत में इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले युवाओं के लिए ऑर्कुट पर खाता बनाना, दोस्तों को जोड़ना, उनकी तस्वीरें देखना और उनके संदेश पढ़ना बेहद खास अनुभव हुआ करता था। किसी की प्रोफाइल पर संदेश छोड़ना, मित्रता की प्रशंसा लिखना और अपनी पसंद के समुदायों से जुड़ना उस दौर की डिजिटल जिंदगी का महत्वपूर्ण हिस्सा था। फेसबुक, इंस्टाग्राम और छोटे वीडियो वाले मंचों के लोकप्रिय होने से पहले ऑर्कुट ने लोगों को इंटरनेट पर दोस्ती और बातचीत का एक नया तरीका दिया था।
अब लगभग 12 साल बाद एक बार फिर ऑर्कुट का नाम चर्चा में है। इसके संस्थापक ऑर्कुट ब्यूयुक्कोकटेन ने इस पुराने सामाजिक मंच की भावना को नए रूप में वापस लाने की पहल की है। उन्होंने लोगों से एक ऐसे नए सामाजिक मंच के निर्माण के लिए समर्थन मांगा है, जहां लोकप्रियता, पसंद और लगातार सामग्री देखने की होड़ के बजाय वास्तविक मित्रता, समुदाय और मानवीय संबंधों को प्राथमिकता मिले। इस पहल ने उन लोगों के बीच उत्सुकता बढ़ा दी है, जिन्होंने अपने जीवन का एक महत्वपूर्ण ऑनलाइन दौर ऑर्कुट पर बिताया था। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि फिलहाल पुराने ऑर्कुट मंच की आधिकारिक वापसी नहीं हुई है। इसकी जगह एक नए और अधिक मानवीय सामाजिक नेटवर्क की परिकल्पना के लिए लोगों का समर्थन जुटाया जा रहा है।

ऑर्कुट क्या था और कैसे बना इंटरनेट की दुनिया का लोकप्रिय नाम?
ऑर्कुट की शुरुआत वर्ष 2004 में हुई थी। इसे तुर्किये मूल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर ऑर्कुट ब्यूयुक्कोकटेन ने विकसित किया था। उस समय वह गूगल में कार्यरत थे। यह परियोजना शुरुआत में एक प्रयोग के रूप में सामने आई, लेकिन धीरे-धीरे इसने दुनिया के कई देशों में अपनी अलग पहचान बना ली। खासतौर पर भारत और ब्राजील में इसे जबरदस्त लोकप्रियता मिली।
ऑर्कुट का सबसे बड़ा आकर्षण इसका सरल स्वरूप था। उस दौर में इंटरनेट की गति आज की तुलना में काफी कम थी और स्मार्टफोन भी आम लोगों की पहुंच में नहीं थे। अधिकांश लोग कंप्यूटर और साइबर कैफे के माध्यम से इंटरनेट का इस्तेमाल करते थे। ऐसे समय में ऑर्कुट ने लोगों को एक ऐसा मंच दिया, जहां वे अपनी व्यक्तिगत प्रोफाइल बना सकते थे, दोस्तों को जोड़ सकते थे और अपनी रुचियों के अनुसार अलग-अलग समुदायों का हिस्सा बन सकते थे।
इस मंच पर उपयोगकर्ता अपनी तस्वीरें साझा कर सकते थे, अपने बारे में जानकारी लिख सकते थे और मित्रों के साथ संवाद कर सकते थे। इसकी लोकप्रियता का एक बड़ा कारण यह था कि यहां केवल परिचित लोगों से ही नहीं, बल्कि समान रुचि रखने वाले अनजान लोगों से भी जुड़ने का अवसर मिलता था। इस तरह ऑर्कुट ने इंटरनेट पर सामाजिक संबंध बनाने की संस्कृति को लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

स्क्रैपबुक से प्रशंसापत्र तक, क्यों खास था ऑर्कुट का अनुभव?
ऑर्कुट को लोकप्रिय बनाने में इसके कुछ खास फीचर की अहम भूमिका थी। इनमें स्क्रैपबुक सबसे अधिक चर्चित थी। यह उपयोगकर्ता की प्रोफाइल पर मौजूद एक ऐसा स्थान था, जहां उसके दोस्त सार्वजनिक संदेश छोड़ सकते थे। जन्मदिन की शुभकामनाएं देना हो, किसी बात पर मजाक करना हो या पुराने मित्र से बातचीत शुरू करनी हो, स्क्रैपबुक का इस्तेमाल खूब किया जाता था।
इसके अलावा प्रशंसापत्र यानी टेस्टिमोनियल की सुविधा भी काफी लोकप्रिय थी। इसके माध्यम से कोई मित्र दूसरे व्यक्ति के बारे में कुछ अच्छी बातें लिख सकता था। इन संदेशों में दोस्ती, स्वभाव और आपसी संबंधों का उल्लेख होता था। कई लोग अपने प्रोफाइल पर मिले प्रशंसापत्रों को गर्व के साथ दिखाते थे।
ऑर्कुट में समुदायों की व्यवस्था भी बेहद खास थी। यहां फिल्मों, संगीत, खेल, कॉलेज, शहरों, खानपान और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी हजारों रुचियों पर आधारित समूह मौजूद थे। कोई व्यक्ति अपनी पसंद के विषय से जुड़े समुदाय में शामिल होकर चर्चा कर सकता था। इन समुदायों ने समान विचार रखने वाले लोगों को एक-दूसरे से जोड़ने का काम किया।
एक अन्य चर्चित सुविधा यह थी कि उपयोगकर्ता यह देख सकते थे कि उनकी प्रोफाइल किसने देखी है। इससे लोगों में अपनी प्रोफाइल को लेकर उत्सुकता बनी रहती थी। आज के सामाजिक मंचों पर लोकप्रियता का आकलन पसंद और अनुयायियों की संख्या से किया जाता है, लेकिन ऑर्कुट के दौर में मित्रों के संदेश और प्रशंसापत्र अधिक महत्वपूर्ण माने जाते थे।

आखिर क्यों पिछड़ गया लोकप्रियता के शिखर पर पहुंचा ऑर्कुट?
किसी भी सामाजिक मंच की सफलता केवल उसके शुरुआती आकर्षण पर निर्भर नहीं करती, बल्कि समय के साथ बदलती उपयोगकर्ता की जरूरतों को पूरा करना भी जरूरी होता है। ऑर्कुट के साथ भी यही हुआ। शुरुआत में तेजी से लोकप्रिय होने के बाद धीरे-धीरे इसके सामने कई चुनौतियां आने लगीं। सबसे बड़ी चुनौती फेसबुक के रूप में सामने आई।
फेसबुक ने लोगों को मित्रों से जुड़ने के साथ-साथ तस्वीरें साझा करने, गतिविधियों की जानकारी देने और एक ही स्थान पर मित्रों की नई पोस्ट देखने की सुविधा दी। इसका स्वरूप लगातार बदल रहा था और नए फीचर जोड़े जा रहे थे। दूसरी ओर ऑर्कुट अपने पुराने अनुभव और सुविधाओं के साथ आगे बढ़ता रहा। धीरे-धीरे उपयोगकर्ताओं को फेसबुक अधिक आधुनिक और सुविधाजनक लगने लगा।
मोबाइल इंटरनेट के विस्तार ने भी इस बदलाव को गति दी। जैसे-जैसे स्मार्टफोन आम लोगों तक पहुंचे, वैसे-वैसे सामाजिक मंचों का इस्तेमाल करने का तरीका बदलने लगा। लोग चाहते थे कि वे कहीं भी और कभी भी अपने मित्रों से जुड़ सकें। फेसबुक ने मोबाइल उपयोगकर्ताओं के लिए अपने अनुभव को बेहतर बनाया और तेजी से नए लोगों तक पहुंच बनाई। ऑर्कुट इस प्रतिस्पर्धा में अपनी पुरानी लोकप्रियता बरकरार नहीं रख पाया।

फेसबुक ने कैसे बदल दिया सोशल मीडिया का पूरा बाजार?
ऑर्कुट और फेसबुक के बीच प्रतिस्पर्धा केवल दो वेबसाइटों की लोकप्रियता की लड़ाई नहीं थी, बल्कि यह इंटरनेट पर सामाजिक संपर्क के बदलते स्वरूप का संकेत भी थी। फेसबुक ने समाचार फीड, तस्वीरों के आदान-प्रदान और मित्रों की गतिविधियों को एक जगह दिखाने की व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया।
ब्राजील जैसे देशों में ऑर्कुट की मजबूत पकड़ थी, लेकिन वर्ष 2011 के आसपास फेसबुक ने वहां भी उसे पीछे छोड़ना शुरू कर दिया। भारत में भी फेसबुक का विस्तार तेजी से हुआ। नए उपयोगकर्ताओं को आकर्षित करने के साथ-साथ उसने पुराने उपयोगकर्ताओं को भी अपने मंच पर बनाए रखने में सफलता हासिल की।
ऑर्कुट ने भी समय के साथ बदलाव करने की कोशिश की थी। वर्ष 2009 में इसका नया संस्करण पेश किया गया, लेकिन कुछ उपयोगकर्ताओं को उसमें किए गए बदलाव पसंद नहीं आए। कुछ शोधों में यह भी उल्लेख मिलता है कि नए स्वरूप को लेकर असंतोष और फेसबुक की बढ़ती लोकप्रियता ने ब्राजील में ऑर्कुट के कमजोर होने की प्रक्रिया को तेज किया। इससे स्पष्ट होता है कि किसी भी तकनीकी मंच के लिए बदलाव करना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है कि बदलाव उपयोगकर्ताओं की अपेक्षाओं के अनुरूप हो।

गूगल ने 2014 में क्यों बंद कर दी ऑर्कुट की सेवा?
ऑर्कुट की लोकप्रियता में गिरावट आने के बाद इसे संचालित करना गूगल की प्राथमिकताओं में पीछे होता चला गया। कंपनी उस समय अपने दूसरे उत्पादों और सामाजिक मंचों को विकसित करने पर अधिक ध्यान दे रही थी। यूट्यूब, ब्लॉगर और गूगल प्लस जैसे मंचों पर उपयोगकर्ताओं की गतिविधियां बढ़ रही थीं।
30 जून 2014 को गूगल ने आधिकारिक रूप से घोषणा की कि ऑर्कुट की सेवा 30 सितंबर 2014 से बंद कर दी जाएगी। कंपनी ने अपने निर्णय के पीछे यह तर्क दिया था कि उसके दूसरे सामाजिक मंचों और सेवाओं के समुदाय ऑर्कुट की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में कंपनी अपने संसाधनों और प्रयासों को उन सेवाओं को बेहतर बनाने में लगाना चाहती थी।
यह निर्णय उन लोगों के लिए निराशाजनक था, जो वर्षों से ऑर्कुट का इस्तेमाल कर रहे थे। हालांकि, कंपनी ने उपयोगकर्ताओं को अपनी पुरानी तस्वीरें, प्रोफाइल और पोस्ट डाउनलोड करने के लिए गूगल टेकआउट की सुविधा दी थी। इसके अलावा सार्वजनिक समुदायों की सामग्री का अभिलेख भी सुरक्षित रखने की व्यवस्था की गई थी।
30 सितंबर 2014 को ऑर्कुट की सेवा आधिकारिक तौर पर बंद हो गई। इसके साथ ही इंटरनेट के शुरुआती सामाजिक मंचों के एक महत्वपूर्ण अध्याय का अंत हो गया। गूगल के आधिकारिक विवरण के अनुसार, ऑर्कुट के सार्वजनिक समुदायों के अभिलेख में लगभग 5.1 करोड़ समुदाय, 12 करोड़ विषय और एक अरब से अधिक गतिविधियां दर्ज थीं। ये आंकड़े बताते हैं कि इस मंच ने अपने समय में कितने बड़े स्तर पर लोगों को एक-दूसरे से जोड़ा था।

12 साल बाद फिर क्यों चर्चा में आया ऑर्कुट?
ऑर्कुट के बंद होने के बाद लंबे समय तक इसकी वापसी को लेकर कोई ठोस घोषणा नहीं हुई थी। हालांकि, इसके संस्थापक समय-समय पर एक नए सामाजिक मंच के विचार की ओर संकेत करते रहे। वर्ष 2022 में ऑर्कुट की आधिकारिक वेबसाइट पर एक संदेश के माध्यम से कुछ नया बनाने की बात सामने आई थी।
अक्टूबर 2026 में इस चर्चा ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया। ऑर्कुट ब्यूयुक्कोकटेन ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से लोगों से समर्थन मांगा। उनका उद्देश्य ऐसा सामाजिक मंच विकसित करने की संभावना तलाशना है, जो लोगों के बीच वास्तविक संबंधों, दोस्ती और समुदायों को फिर से केंद्र में लाए।
इस अभियान में लोगों से वेबसाइट पर जाकर अपना समर्थन दर्ज कराने की अपील की गई है। उपयोगकर्ता अपना नाम, ईमेल पता और देश की जानकारी देकर इस पहल से जुड़ सकते हैं। इसके बाद उन्हें एक डिजिटल समर्थक कार्ड मिलता है, जिसे वे अपने मित्रों और परिचितों के साथ साझा कर सकते हैं।
नवंबर 2026 की शुरुआत में इस अभियान को लाखों लोगों का समर्थन मिलने की खबरें सामने आई हैं। संबंधित रिपोर्टों में अलग-अलग समय पर समर्थकों की संख्या में वृद्धि दर्ज की गई है। इससे पता चलता है कि पुराने ऑर्कुट को याद करने वाले लोगों के साथ-साथ एक अलग तरह के सामाजिक मंच की तलाश करने वाले उपयोगकर्ता भी इस विचार में रुचि दिखा रहे हैं।
हालांकि, यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। वेबसाइट पर समर्थन दर्ज कराने का अर्थ यह नहीं है कि नया ऑर्कुट खाता बन गया है या पुरानी सेवा दोबारा शुरू हो गई है। फिलहाल यह एक सार्वजनिक समर्थन अभियान है। नए मंच की निश्चित शुरुआत, मोबाइल अनुप्रयोग, सुविधाओं और उपलब्धता को लेकर कोई आधिकारिक समय-सारणी घोषित नहीं की गई है।

नए ऑर्कुट की सोच में क्या होगा खास?
ऑर्कुट के संस्थापक का मानना है कि पिछले दो दशकों में सामाजिक माध्यमों का मूल उद्देश्य कहीं पीछे छूट गया है। शुरुआत में इन मंचों को लोगों को जोड़ने, नए मित्र बनाने और विचार साझा करने का माध्यम माना जाता था। लेकिन अब कई मंचों पर अधिक से अधिक समय बिताने, ज्यादा पसंद हासिल करने और लगातार नई सामग्री देखने की प्रवृत्ति हावी हो गई है।
ब्यूयुक्कोकटेन चाहते हैं कि नया सामाजिक मंच लोगों के वास्तविक संबंधों को प्राथमिकता दे। उनकी सोच में मित्रता, विश्वास, आपसी सम्मान और साझा रुचियों पर आधारित समुदायों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उपयोगकर्ता केवल दूसरों की पोस्ट देखने वाले दर्शक न बनें, बल्कि बातचीत और विचारों के आदान-प्रदान में सक्रिय भागीदार बनें।
इस प्रस्तावित व्यवस्था में समुदायों को विशेष महत्व दिया जा सकता है। उदाहरण के लिए, संगीत पसंद करने वाले लोग संगीत से जुड़े समूहों में बातचीत कर सकेंगे। किताबें पढ़ने वाले लोग अपने पसंदीदा लेखकों और पुस्तकों पर चर्चा कर सकेंगे। इसी तरह शिक्षा, खेल, यात्रा, कला और स्थानीय गतिविधियों से जुड़े लोगों के लिए भी साझा मंच तैयार करने की कल्पना की जा सकती है।
इस विचार का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह भी है कि सामाजिक मंच का उद्देश्य केवल उपयोगकर्ता का ध्यान आकर्षित करना नहीं होना चाहिए। उसे ऐसे संबंध बनाने में मदद करनी चाहिए, जो इंटरनेट की सीमा से बाहर वास्तविक जीवन में भी उपयोगी साबित हों।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता और फर्जी खातों से क्यों बढ़ रही है चिंता?
नए ऑर्कुट की परिकल्पना के पीछे एक बड़ी वजह इंटरनेट पर भरोसे का लगातार कमजोर होना भी है। आज कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मदद से तस्वीरें, वीडियो, आवाज और लिखित सामग्री तैयार करना आसान हो गया है। कई बार वास्तविक और कृत्रिम सामग्री के बीच अंतर करना भी मुश्किल हो जाता है।
इसके अलावा सामाजिक मंचों पर फर्जी खाते, स्वचालित खाते और भ्रामक सामग्री फैलाने की समस्या भी बनी हुई है। किसी व्यक्ति की तस्वीर और आवाज की नकल करके गलत जानकारी प्रसारित की जा सकती है। इससे ऑनलाइन बातचीत में विश्वास का संकट पैदा होता है।
ऑर्कुट ब्यूयुक्कोकटेन का मानना है कि तकनीक का इस्तेमाल इंसानों के बीच संबंध मजबूत करने के लिए होना चाहिए, न कि उनकी जगह लेने के लिए। उनके विचार में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग लोगों को समान रुचियों वाले व्यक्तियों से जोड़ने और अच्छे समुदाय बनाने में किया जा सकता है। लेकिन इसके साथ यह सुनिश्चित करना भी जरूरी होगा कि उपयोगकर्ता वास्तविक लोगों से ही बातचीत कर रहे हों।
आने वाले समय में यदि नया ऑर्कुट इस दिशा में काम करता है, तो उसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह फर्जी खातों और कृत्रिम सामग्री की पहचान के लिए कितनी प्रभावी व्यवस्था विकसित कर पाता है। केवल तकनीक का इस्तेमाल करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उपयोगकर्ताओं के विश्वास को बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण होगा।

क्या पुराने ऑर्कुट की सभी सुविधाएं फिर देखने को मिलेंगी?
ऑर्कुट की वापसी की चर्चा के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या नए मंच पर पुराने ऑर्कुट की स्क्रैपबुक, प्रशंसापत्र, मित्र सूची और समुदाय जैसी सुविधाएं फिर से देखने को मिलेंगी?
फिलहाल इस संबंध में कोई आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। संस्थापक ने पुराने ऑर्कुट की भावना और मानवीय संबंधों को प्राथमिकता देने की बात कही है, लेकिन नए मंच का पूरा स्वरूप सामने नहीं आया है।
संभव है कि पुराने ऑर्कुट के कुछ विचार नए समय की तकनीक के अनुसार विकसित किए जाएं। उदाहरण के लिए, समुदायों को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है और उपयोगकर्ताओं को अपनी रुचियों के आधार पर नए लोगों से जुड़ने की सुविधा दी जा सकती है। लेकिन ये संभावित विचार हैं, घोषित सुविधाएं नहीं।
यह भी संभव है कि नए मंच में गोपनीयता और सुरक्षा को पहले से अधिक महत्व दिया जाए। उपयोगकर्ताओं को यह नियंत्रण मिलना चाहिए कि उनकी तस्वीरें, व्यक्तिगत जानकारी और गतिविधियां कौन देख सकता है। डिजिटल दुनिया में व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा अब किसी भी सामाजिक मंच के लिए बुनियादी आवश्यकता बन चुकी है।

क्या दूसरी बार सफल हो पाएगा ऑर्कुट?
ऑर्कुट की वापसी की कोशिश जितनी दिलचस्प है, इसकी सफलता की राह उतनी ही चुनौतीपूर्ण दिखाई देती है। वर्ष 2004 में जब ऑर्कुट शुरू हुआ था, तब सामाजिक माध्यमों का बाजार आज जितना प्रतिस्पर्धी नहीं था। उस समय इंटरनेट पर लोगों को जोड़ने वाले मंच सीमित थे और ऑर्कुट ने अपनी अलग पहचान बनाई थी।
लेकिन वर्ष 2026 में परिस्थितियां पूरी तरह बदल चुकी हैं। फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स और रेडिट जैसे मंचों के पास पहले से बड़ी संख्या में सक्रिय उपयोगकर्ता हैं। वीडियो, संदेश, सीधा प्रसारण और समुदाय आधारित बातचीत जैसी सुविधाएं पहले ही कई मंचों पर उपलब्ध हैं। ऐसे में नया ऑर्कुट लोगों को अपने पुराने मंचों से हटकर एक नई जगह आने के लिए कोई ठोस कारण देना होगा।
दूसरी चुनौती उपयोगकर्ताओं को लंबे समय तक जोड़े रखने की होगी। लाखों लोगों का किसी अभियान पर समर्थन देना और रोजाना किसी मंच का इस्तेमाल करना दो अलग-अलग बातें हैं। पुरानी यादों के कारण लोग किसी नए मंच के प्रति उत्साहित हो सकते हैं, लेकिन नियमित उपयोग तभी करेंगे जब उन्हें वहां उपयोगी सुविधाएं, अच्छे समुदाय और वास्तविक संवाद का अनुभव मिलेगा।
इसके अलावा आंकड़ों की सुरक्षा, व्यक्तिगत गोपनीयता, फर्जी खातों पर नियंत्रण और आपत्तिजनक सामग्री की निगरानी जैसी जिम्मेदारियां भी नए मंच के सामने होंगी। इन सभी चुनौतियों का समाधान किए बिना किसी सामाजिक नेटवर्क के लिए लंबे समय तक टिके रहना आसान नहीं होगा।

क्या ऑर्कुट की वापसी सोशल मीडिया की दुनिया में नया बदलाव ला सकती है?
ऑर्कुट की वापसी की पहल केवल एक पुराने सामाजिक मंच को फिर से शुरू करने की कोशिश नहीं है, बल्कि यह आज के डिजिटल समाज में बदलती जरूरतों पर भी सवाल खड़ा करती है। क्या लोग वास्तव में ऐसे सामाजिक माध्यम चाहते हैं, जहां लोकप्रियता और दिखावे के बजाय दोस्ती और आपसी बातचीत को महत्व मिले? क्या उपयोगकर्ता लगातार सामग्री देखते रहने के बजाय अपने पसंदीदा समुदायों के साथ समय बिताना पसंद करेंगे?
इन सवालों के जवाब आने वाले समय में मिलेंगे। हालांकि, इस पहल से इतना जरूर स्पष्ट होता है कि आधुनिक सामाजिक माध्यमों की सुविधाओं के बावजूद वास्तविक मानवीय जुड़ाव की जरूरत आज भी बनी हुई है।
ऑर्कुट का पुराना दौर उन लोगों के लिए खास रहा है, जिन्होंने इंटरनेट की दुनिया में अपनी पहली मित्रता और बातचीत का अनुभव इसी मंच पर हासिल किया था। अब इसके संस्थापक उसी भावना को नई तकनीक और बदलते समय के अनुरूप वापस लाना चाहते हैं।
फिलहाल ऑर्कुट की वापसी को लेकर उत्साह जरूर है, लेकिन इसकी वास्तविक शुरुआत और स्वरूप को लेकर इंतजार करना होगा। यदि नया मंच पुराने ऑर्कुट की आत्मीयता को आधुनिक तकनीक, बेहतर सुरक्षा और उपयोगी सुविधाओं के साथ जोड़ने में सफल होता है, तो यह सामाजिक माध्यमों की दुनिया में एक नई शुरुआत साबित हो सकता है। लेकिन केवल पुरानी यादें किसी मंच को सफल नहीं बना सकतीं। उसे आज के उपयोगकर्ताओं की जरूरतों को समझना और उनके विश्वास पर खरा उतरना होगा।

Geeta Singh
Geeta Singh

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