
संवाद 24 नई दिल्ली। बंगाल की खाड़ी से उठे भीषण चक्रवाती तूफान ‘अर्णब’ ने आखिरकार आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में दस्तक दे दी है। बुधवार की सुबह यानम और काकीनाडा के समुद्री तटवर्ती हिस्से में तूफान की लैंडफॉल प्रक्रिया शुरू होते ही प्रकृति का रौद्र रूप देखने को मिला। समंदर में 10 से 15 फीट ऊंची लहरें उठकर तटीय सड़कों और बस्तियों से टकराने लगीं, जिससे तटवर्ती इलाकों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, तूफान के केंद्र के तट को पार करने की प्रक्रिया बेहद तीव्र रही और करीब तीन घंटे तक इसका प्रचंड प्रभाव जमीन पर महसूस किया गया।
150 किमी/घंटा के झोंकों ने हिलाया जनजीवन
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, तूफान जब बापटला और विशाखापत्तनम के मध्य यानम के दक्षिणी तट से टकराया, तब हवा की निरंतर रफ्तार 125 से 135 किलोमीटर प्रति घंटा दर्ज की गई। हवा के झोंके 150 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच रहे थे। उम्मीद से कहीं अधिक तेजी से आगे बढ़ने के कारण यह तूफान अनुमानित समय से पहले ही तटीय सीमा में दाखिल हो गया। अंधाधुंध हवाओं और मूसलाधार बारिश के चलते विशाखापत्तनम, काकीनाडा, मछलीपट्टनम और बापटला सहित कई उत्तरी व मध्य जिलों में भारी जलभराव हो गया है। सैकड़ों विशालकाय पेड़, बिजली के खंभे और होर्डिंग्स उखड़कर सड़कों पर आ गिरे, जिससे कई प्रमुख शहरों की बिजली व्यवस्था और आवागमन पूरी तरह ठप हो गया।
युद्धस्तर पर बचाव अभियान: 84 हजार से ज्यादा लोग सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट
हालात की गंभीरता को देखते हुए आंध्र प्रदेश सरकार और आपदा प्रबंधन तंत्र पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आपातकालीन समीक्षा बैठक कर राहत और बचाव कार्यों की कमान संभाल रखी है। राज्यभर में 2,199 से अधिक चक्रवात राहत शिविर (शेल्टर होम) सक्रिय किए गए हैं। अब तक तटीय बस्तियों और निचले इलाकों से 84,000 से अधिक नागरिकों को सुरक्षित शरणस्थलों में स्थानांतरित किया जा चुका है। प्रशासन ने मानवीय संवेदना और प्राथमिकता को ध्यान में रखते हुए विशेष अभियान चलाकर 2,360 से अधिक गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और जिला अस्पतालों में भर्ती कराया है, ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति में तुरंत चिकित्सकीय सहायता मिल सके। तटीय क्षेत्रों में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की 12 टीमें और राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की 10 टीमें कटर, बोट्स और वायरलेस उपकरणों के साथ लगातार गिरे पेड़ों को हटाकर रास्तों को बहाल करने में जुटी हुई हैं।
थमे ट्रेनों के पहिए, उड़ानें निरस्त और स्कूल-कॉलेज बंद
प्रचंड तूफान और अंधड़ के खतरे को देखते हुए विशाखापत्तनम और विजयवाड़ा हवाई अड्डों से विमान सेवाओं का संचालन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। एयर इंडिया और इंडिगो जैसी प्रमुख एयरलाइंस ने एहतियातन विजयवाड़ा और विशाखापत्तनम आने-जाने वाली अधिकांश उड़ानों को रद्द कर दिया है। भारतीय रेलवे ने भी सुरक्षा के दृष्टिकोण से 20 से अधिक ट्रेनों को निरस्त कर दिया है और कई लंबी दूरी की गाड़ियों को परिवर्तित मार्गों से चलाया जा रहा है। तटीय जिलों के सभी शिक्षण संस्थानों – स्कूलों और कॉलेजों में अनिश्चितकालीन अवकाश घोषित कर दिया गया है। राज्य सरकार ने मछुआरों को अगले आदेश तक गहरे समुद्र में न जाने की सख्त ताकीद की है और तटवर्ती बंदरगाहों पर उच्चतम स्तर के खतरे के संकेत लगा दिए गए हैं।
ओडिशा, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना तक दिखेगा असर
मौसम विभाग की चेतावनी के मुताबिक, चक्रवात ‘अर्णब’ का असर केवल आंध्र प्रदेश तक ही सीमित नहीं रहने वाला है। पड़ोसी राज्य ओडिशा के 16 संवेदनशील जिलों में पहले ही स्कूलों को बंद कर 48,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित शिविरों में पहुंचाया जा चुका है। इसके अतिरिक्त, मौसम विभाग ने ओडिशा, तेलंगाना और छत्तीसगढ़ के कई संभागों के लिए ‘अत्यधिक भारी बारिश’ का रेड व ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। उत्तर भारत और पूर्वी राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल के मौसम में भी इस चक्रवात के कारण व्यापक बदलाव देखने को मिल रहा है, जहां तेज हवाओं के साथ बादलों की आवाजाही और रुक-रुक कर बारिश का दौर शुरू होने की प्रबल संभावना है। स्थानीय प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि वे लैंडफॉल समाप्त होने के बाद भी घरों से बाहर न निकलें, जर्जर मकानों और पेड़ों के नीचे जाने से बचें तथा केवल आधिकारिक दिशा-निर्देशों पर ही भरोसा करें।






