
संवाद 24 डेस्क।भारतीय खानपान में व्रत और त्योहारों का विशेष स्थान है। नवरात्र, महाशिवरात्रि और जन्माष्टमी जैसे अवसरों पर लोग अपनी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भोजन का चयन करते हैं। ऐसे समय में कुट्टू के आटे से बनने वाली पूरी एक लोकप्रिय पारंपरिक व्यंजन के रूप में सामने आती है। बाहर से कुरकुरी और भीतर से नरम यह पूरी आलू की सब्जी, दही या फलाहारी चटनी के साथ बेहद स्वादिष्ट लगती है। इसकी खासियत यह है कि इसे सामान्य गेहूं के आटे के बजाय कुट्टू के आटे से बनाया जाता है, जिसका उपयोग भारत में लंबे समय से व्रत के भोजन में किया जाता रहा है।
कुट्टू की पूरी केवल स्वाद के लिए ही पसंद नहीं की जाती, बल्कि इसके पीछे भारतीय खाद्य परंपरा, मौसमी खानपान और उपवास के दौरान भोजन संबंधी मान्यताओं का भी योगदान है। अलग-अलग क्षेत्रों में इसे बनाने के तरीके में थोड़ा अंतर देखने को मिलता है। कहीं इसमें उबले हुए आलू मिलाए जाते हैं, तो कहीं कुट्टू के आटे में सेंधा नमक और पानी डालकर आटा तैयार किया जाता है। सही अनुपात और तलने की उचित तकनीक अपनाकर घर पर भी स्वादिष्ट, सुनहरी और अच्छी तरह फूली हुई कुट्टू की पूरी बनाई जा सकती है।
क्या है कुट्टू का आटा और क्यों है इसकी खास पहचान?
कुट्टू को अंग्रेजी में बकव्हीट कहा जाता है। नाम में गेहूं शब्द होने के बावजूद यह सामान्य गेहूं जैसा अनाज नहीं, बल्कि एक अलग प्रकार का बीज है। इसे छीलकर और पीसकर आटा तैयार किया जाता है। भारत में कुट्टू का आटा विशेष रूप से व्रत के भोजन में लोकप्रिय है, हालांकि इसके उपयोग और सेवन से संबंधित नियम अलग-अलग परिवारों तथा धार्मिक परंपराओं में भिन्न हो सकते हैं।
कुट्टू के आटे की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसमें गेहूं की तरह ग्लूटेन नहीं होता। इसमें कार्बोहाइड्रेट, कुछ मात्रा में प्रोटीन, रेशा और विभिन्न खनिज पाए जाते हैं। हालांकि, बाजार में उपलब्ध आटे की शुद्धता और प्रसंस्करण के तरीके के अनुसार उसकी विशेषताओं में अंतर हो सकता है। जिन लोगों को सीलिएक रोग या ग्लूटेन से संबंधित समस्या है, उन्हें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आटा और उससे जुड़े अन्य उत्पाद ग्लूटेन के संपर्क से मुक्त हों।
कुट्टू का आटा सामान्य गेहूं के आटे की तरह आसानी से बंधने वाला नहीं होता। उसमें ग्लूटेन की अनुपस्थिति के कारण पूरी बेलते समय टूटने या किनारों से बिखरने की समस्या हो सकती है। इसी वजह से कई रसोइयों में उबले आलू मिलाकर आटा गूंथने की परंपरा है। आलू आटे को बांधने में मदद करता है और पूरी को बेहतर बनावट देता है।
कुट्टू की पूरी बनाने के लिए आवश्यक सामग्री
घर पर स्वादिष्ट कुट्टू की पूरी बनाने के लिए बहुत अधिक सामग्री की आवश्यकता नहीं होती। सही मात्रा में आटा, उबले आलू, सेंधा नमक और पानी पर्याप्त हैं। तलने के लिए तेल या घी का उपयोग किया जा सकता है। व्रत में सेंधा नमक का इस्तेमाल आम है, लेकिन इसकी अनुमति व्यक्ति की धार्मिक परंपरा पर निर्भर करती है।
सामग्री की पूरी सूची इस प्रकार है:
कुट्टू का आटा – 2 कप
उबले हुए आलू – 2 मध्यम आकार के
सेंधा नमक – स्वादानुसार
पानी – आवश्यकतानुसार
तेल या घी – पूरी तलने के लिए
सूखा कुट्टू का आटा – बेलने में आवश्यकता के अनुसार
इन मात्राओं से लगभग 10 से 14 मध्यम आकार की पूरियां बन सकती हैं। पूरियों की संख्या उनके आकार और मोटाई पर निर्भर करेगी। यदि परिवार के सदस्यों की संख्या अधिक है, तो सामग्री की मात्रा उसी अनुपात में बढ़ाई जा सकती है।
ध्यान रखें कि आलू उबालने के बाद उनमें अतिरिक्त पानी नहीं रहना चाहिए। आलू जितने अधिक पानी वाले होंगे, आटा उतना ही चिपचिपा हो सकता है। इसी प्रकार कुट्टू के आटे की जरूरत के अनुसार पानी धीरे-धीरे मिलाना चाहिए, ताकि आटा बहुत नरम या गीला न हो जाए।
सबसे पहले करें तैयारी, ताकि पूरी बनेगी सही आकार की
कुट्टू की पूरी बनाने का पहला चरण सामग्री को तैयार करना है। सबसे पहले आलू को अच्छी तरह धोकर उबाल लें। उबले हुए आलू को ठंडा होने दें, फिर उनका छिलका उतारकर बारीक मैश कर लें। आलू में गांठें नहीं रहनी चाहिए, क्योंकि बड़ी गांठें आटा गूंथने और पूरी बेलने में परेशानी पैदा कर सकती हैं।
अब एक बड़े बर्तन में कुट्टू का आटा लें और उसमें मैश किए हुए आलू डालें। स्वादानुसार सेंधा नमक मिलाएं। सभी सामग्री को हाथों से अच्छी तरह मिलाएं, जिससे आलू आटे में समान रूप से घुल जाएं। इसके बाद जरूरत के अनुसार थोड़ा-थोड़ा पानी डालते हुए आटा गूंथें।
यहां सबसे महत्वपूर्ण बात पानी की मात्रा है। कुट्टू का आटा पानी जल्दी सोख सकता है और अधिक पानी पड़ने पर चिपचिपा हो जाता है। इसलिए शुरुआत में बहुत कम पानी डालें और आवश्यकता पड़ने पर ही मात्रा बढ़ाएं। आटा इतना सख्त होना चाहिए कि उसकी छोटी लोई आसानी से बनाई जा सके, लेकिन वह इतना कठोर भी न हो कि बेलते समय किनारों से टूटने लगे।
आटा गूंथने की सही तकनीक से दूर होगी टूटने की समस्या
कुट्टू की पूरी बनाने में सबसे बड़ी चुनौती आटे को बांधना है। सामान्य गेहूं के आटे में मौजूद ग्लूटेन उसे लचीलापन देता है, जबकि कुट्टू के आटे में यह गुण नहीं होता। इसलिए इसे गूंथते समय धैर्य और सावधानी की जरूरत होती है।
आटा तैयार होने के बाद उसे कुछ मिनट के लिए ढककर रख सकते हैं, ताकि नमी समान रूप से फैल जाए। हालांकि, इसे बहुत लंबे समय तक खुला नहीं छोड़ना चाहिए, क्योंकि इसकी सतह सूख सकती है। यदि आटा हाथों में अधिक चिपक रहा हो, तो थोड़ी मात्रा में कुट्टू का आटा मिलाएं। दूसरी ओर, यदि आटा बहुत सूखा हो और दबाने पर बिखरने लगे, तो हाथों को हल्का गीला करके दोबारा गूंथें।
आटे को तैयार करते समय आलू और कुट्टू के आटे का संतुलन बनाए रखना जरूरी है। आलू अधिक होने पर आटा चिपचिपा हो सकता है, जबकि आटा अधिक होने पर पूरी कठोर या भुरभुरी बन सकती है। अभ्यास के साथ इसकी सही बनावट पहचानना आसान हो जाता है।
पूरी बेलने का तरीका: अपनाएं यह आसान घरेलू उपाय
आटा तैयार होने के बाद उसके छोटे-छोटे हिस्से लेकर गोल लोइयां बना लें। लोइयों का आकार लगभग समान रखें, ताकि सभी पूरियां एक साथ और समान रूप से तल सकें। अब एक साफ प्लास्टिक शीट, बटर पेपर या चिकनी सतह का इस्तेमाल करके पूरियां बेलें।
बेलने के लिए सतह पर बहुत कम सूखा कुट्टू का आटा छिड़कें। लोई को धीरे-धीरे दबाते हुए गोल आकार दें। ध्यान रखें कि पूरी बहुत पतली न हो, क्योंकि ऐसा करने पर वह तलते समय टूट सकती है। दूसरी ओर, बहुत मोटी पूरी अंदर से अच्छी तरह पकने में अधिक समय ले सकती है।
यदि बेलन से पूरी बार-बार टूट रही हो, तो लोई को दो साफ प्लास्टिक शीटों के बीच रखकर धीरे-धीरे दबाएं। इससे उसे गोल आकार देना आसान हो जाता है। पूरी को बेलने के बाद तुरंत तलने के लिए तैयार रखें, ताकि उसकी सतह सूखकर दरारदार न हो जाए।
गर्म तेल में तलने का सही तरीका
कुट्टू की पूरी को स्वादिष्ट बनाने में तलने की तकनीक की अहम भूमिका होती है। इसके लिए एक गहरी कड़ाही में पर्याप्त तेल या घी गर्म करें। तेल का तापमान मध्यम से तेज गर्म होना चाहिए, लेकिन वह धुआं छोड़ने न लगे। तेल बहुत ठंडा होने पर पूरी अधिक तेल सोख सकती है, जबकि बहुत अधिक गर्म तेल में उसका बाहरी हिस्सा जल्दी गहरा हो सकता है।
तेल गर्म होने पर एक पूरी डालकर देखें। यदि वह धीरे-धीरे ऊपर आने लगे और आसपास छोटे बुलबुले दिखाई दें, तो तापमान उपयुक्त हो सकता है। पूरी को सावधानी से तेल में डालें और कलछी से हल्का दबाएं। इससे वह फूलने में मदद पा सकती है।
जब पूरी एक तरफ से सुनहरी होने लगे, तो उसे पलट दें और दूसरी तरफ भी तल लें। तैयार पूरी को निकालकर अतिरिक्त तेल निकलने दें। इसी प्रक्रिया से बाकी पूरियां भी तलें। एक बार में बहुत अधिक पूरियां न डालें, क्योंकि इससे तेल का तापमान अचानक कम हो सकता है।
तली हुई पूरियों को कुछ देर जालीदार बर्तन या कागज पर रखने से अतिरिक्त तेल निकल सकता है। इन्हें लंबे समय तक ढककर रखने के बजाय थोड़ी देर बाद परोसना बेहतर रहता है, ताकि इनकी बनावट बनी रहे।
कुट्टू की पूरी को स्वादिष्ट बनाने के लिए अपनाएं ये खास सुझाव
कुट्टू की पूरी बनाने में कुछ छोटी-छोटी बातें बड़ा अंतर पैदा करती हैं। सबसे पहले, आटे को हमेशा जरूरत के अनुसार ही गूंथें। बहुत अधिक मात्रा में पानी डालने से उसे संभालना मुश्किल हो सकता है। आलू अच्छी तरह मैश किए हुए हों, ताकि आटा एकसार बने और बेलते समय उसमें दरारें न आएं।
दूसरी महत्वपूर्ण बात है लोई का आकार। बहुत बड़ी लोई से पूरी बेलना कठिन हो सकता है, जबकि बहुत छोटी लोई से पूरी का आकार असमान रह सकता है। मध्यम आकार की लोइयां बनाने से काम आसान हो जाता है। बेलते समय जरूरत से ज्यादा सूखा आटा इस्तेमाल करने से बचें, क्योंकि अतिरिक्त सूखा आटा तलने के दौरान तेल में जल सकता है।
तेल का तापमान भी ध्यान देने योग्य है। पूरी डालने से पहले तेल पर्याप्त गर्म होना चाहिए। यदि पूरी फूल नहीं रही है, तो इसका कारण आटे की बनावट, पूरी की मोटाई या तेल का उचित तापमान न होना हो सकता है। आटे में आलू की सही मात्रा और पूरी को समान मोटाई में बेलने से बेहतर परिणाम मिलने की संभावना बढ़ती है।
कुट्टू की पूरी के साथ क्या परोसें?
कुट्टू की पूरी का स्वाद कई तरह के फलाहारी व्यंजनों के साथ बढ़ जाता है। पारंपरिक रूप से इसे आलू की सब्जी के साथ पसंद किया जाता है। उबले आलू, जीरा, हरी मिर्च, सेंधा नमक और उपलब्ध फलाहारी मसालों से तैयार हल्की सब्जी इसके साथ अच्छी लगती है।
इसके अलावा सादा दही, जीरे वाला दही या फलाहारी चटनी भी इसके साथ परोसी जा सकती है। कुछ घरों में कुट्टू की पूरी के साथ लौकी की सब्जी या अरबी का फलाहारी व्यंजन बनाया जाता है। भोजन की सामग्री का चयन व्रत के नियमों के अनुसार करना चाहिए। उदाहरण के लिए, कुछ परिवारों में हल्दी, सामान्य नमक या कुछ विशेष मसालों से परहेज किया जाता है, जबकि अन्य परिवारों में नियम अलग हो सकते हैं।
यदि पूरी को मुख्य भोजन के रूप में परोसा जा रहा है, तो उसके साथ दही और सब्जी शामिल करने से भोजन में विविधता आती है। स्वाद के साथ-साथ मात्रा का संतुलन बनाए रखना भी उपयोगी है।
पोषण के लिहाज से कैसा है कुट्टू का आटा?
कुट्टू के आटे में कार्बोहाइड्रेट के साथ प्रोटीन, रेशा और मैग्नीशियम जैसे कुछ खनिज पाए जाते हैं। इसकी पौष्टिकता के कारण इसे विविध आहार का हिस्सा बनाया जा सकता है। हालांकि, कुट्टू की पूरी और कुट्टू के आटे से बनी अन्य चीजों के पोषण में अंतर होता है, क्योंकि पूरी को तलने के दौरान उसमें तेल या घी भी शामिल हो जाता है।
इसलिए कुट्टू की पूरी को केवल इसलिए हल्का या कम कैलोरी वाला भोजन नहीं मानना चाहिए कि वह गेहूं के आटे से नहीं बनी है। उसकी ऊर्जा मात्रा इस्तेमाल किए गए आटे, आलू, तेल और पूरी के आकार पर निर्भर करती है। यदि कोई व्यक्ति अपने भोजन में वसा या ऊर्जा की मात्रा पर ध्यान दे रहा है, तो वह छोटी पूरियां बना सकता है और उन्हें उचित मात्रा में खा सकता है।
कुट्टू का आटा अपने आप में पौष्टिक हो सकता है, लेकिन किसी एक खाद्य पदार्थ को संपूर्ण भोजन नहीं माना जा सकता। संतुलित खानपान के लिए विभिन्न खाद्य समूहों को शामिल करना जरूरी है। इसके अतिरिक्त, कुट्टू से एलर्जी की संभावना भी हो सकती है। पहली बार इसका सेवन करने वाले लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए।
व्रत में कुट्टू की पूरी बनाते समय रखें स्वच्छता और शुद्धता का ध्यान
व्रत के भोजन में सामग्री की शुद्धता का विशेष महत्व होता है। बाजार से कुट्टू का आटा खरीदते समय उसकी पैकिंग, निर्माण तिथि और गुणवत्ता संबंधी जानकारी देखना उपयोगी है। आटे में किसी प्रकार की नमी, असामान्य गंध या कीड़े दिखाई दें, तो उसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
यदि घर में सामान्य आटा और फलाहारी आटा दोनों इस्तेमाल होते हैं, तो उन्हें अलग-अलग और साफ बर्तनों में रखना बेहतर है। इसी तरह तलने के लिए साफ तेल का उपयोग करें। बार-बार गर्म किए गए तेल में तलने से बचना चाहिए। व्रत के दौरान भोजन तैयार करते समय परिवार की धार्मिक परंपराओं के अनुसार सामग्री चुनें और रसोई की स्वच्छता बनाए रखें।
कुट्टू की पूरी बनाकर लंबे समय तक कमरे के तापमान पर रखने के बजाय उसे ताजा परोसना बेहतर है। बची हुई पूरियों को साफ, ढके हुए बर्तन में रखकर उचित तापमान पर सुरक्षित रखें और दोबारा सेवन करने से पहले अच्छी तरह गर्म करें।
थोड़ी सावधानी और सही विधि से बनाएं स्वादिष्ट कुट्टू की पूरी
कुट्टू की पूरी भारतीय व्रत परंपरा का एक लोकप्रिय व्यंजन है, जो अपनी खास बनावट और स्वाद के कारण अनेक घरों में पसंद किया जाता है। इसे बनाने के लिए बहुत अधिक सामग्री की जरूरत नहीं होती। कुट्टू का आटा, उबले आलू, सेंधा नमक और तलने के लिए तेल या घी पर्याप्त हैं। फिर भी इसकी सफलता आटे की सही बनावट, आलू की उचित मात्रा, पूरी बेलने की तकनीक और तेल के तापमान पर निर्भर करती है।
यदि आटा न अधिक गीला हो और न बहुत सूखा, लोइयां समान आकार की हों तथा पूरी को सही तापमान पर तला जाए, तो घर पर भी स्वादिष्ट और सुनहरी पूरियां बनाई जा सकती हैं। इन्हें आलू की सब्जी, दही या अन्य फलाहारी व्यंजनों के साथ परोसकर व्रत के भोजन को खास बनाया जा सकता है।
इस प्रकार कुट्टू की पूरी केवल एक पारंपरिक रेसिपी नहीं, बल्कि भारतीय खानपान की विविधता का भी उदाहरण है। सही सामग्री, स्वच्छता और संतुलित मात्रा का ध्यान रखते हुए इसे त्योहारों और व्रत के अवसरों पर स्वाद के साथ अपनी भोजन परंपरा का हिस्सा बनाया जा सकता है।






