
संवाद 24 डेस्क। व्रत में कुछ नया और स्वादिष्ट खाने का मन हो तो बनाएं फलाहारी डोसा
भारतीय खानपान की परंपरा में व्रत और उपवास का विशेष महत्व है। नवरात्रि, महाशिवरात्रि, एकादशी और अन्य धार्मिक अवसरों पर अनेक लोग अपनी आस्था और पारिवारिक परंपराओं के अनुसार उपवास रखते हैं। ऐसे समय में भोजन का चयन सामान्य दिनों से अलग होता है। गेहूं, चावल, दालों और कई अन्य अनाजों के स्थान पर फलाहारी सामग्री का उपयोग किया जाता है। लेकिन उपवास का अर्थ केवल सीमित विकल्पों में भोजन करना नहीं है, बल्कि उपलब्ध सामग्री से स्वादिष्ट, पौष्टिक और संतोषजनक व्यंजन तैयार करना भी है।
इसी श्रेणी में व्रत का डोसा एक लोकप्रिय और रोचक विकल्प बन सकता है। सामान्य डोसा चावल और उड़द की दाल से तैयार किया जाता है, जबकि फलाहारी डोसे में कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा, साबूदाना, उबले आलू या समा के चावल जैसी सामग्री का उपयोग किया जा सकता है। इन सामग्रियों से तैयार डोसा स्वादिष्ट होने के साथ-साथ उपवास के भोजन में विविधता भी लाता है।
व्रत का डोसा खास तौर पर उन लोगों के लिए उपयोगी है, जो उपवास के दौरान पारंपरिक फलाहारी व्यंजनों से कुछ अलग बनाना चाहते हैं। इसे दही, नारियल की चटनी या व्रत में अनुमत आलू की सब्जी के साथ परोसा जा सकता है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे घर पर उपलब्ध सीमित सामग्री से भी आसानी से बनाया जा सकता है।
व्रत के डोसे की खासियत क्या है?
व्रत का डोसा सामान्य डोसे का फलाहारी रूप है। इसकी विधि और सामग्री परिवार, क्षेत्र तथा व्रत के नियमों के अनुसार बदल सकती है। कुछ लोग कुट्टू और सिंघाड़े के आटे का मिश्रण पसंद करते हैं, जबकि कुछ साबूदाने और आलू से इसका घोल तैयार करते हैं। समा के चावल का उपयोग भी किया जा सकता है, बशर्ते संबंधित उपवास में इसकी अनुमति हो।
इस व्यंजन में इस्तेमाल होने वाली सामग्री इसकी बनावट, स्वाद और कुरकुरेपन को प्रभावित करती है। आलू घोल को बांधने में सहायता करता है, जबकि कुट्टू या सिंघाड़े का आटा उसे आकार देने में मदद करता है। साबूदाना भिगोकर और पीसकर मिलाने पर डोसे को अलग तरह की बनावट मिल सकती है।
हालांकि, व्रत में अनुमत खाद्य पदार्थों की सूची सभी परिवारों और धार्मिक परंपराओं में समान नहीं होती। इसलिए डोसा बनाने से पहले यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि उपयोग की जाने वाली प्रत्येक सामग्री आपके उपवास के नियमों के अनुकूल हो।
व्रत का डोसा बनाने के लिए संपूर्ण सामग्री
नीचे दी गई सामग्री से लगभग 6 से 8 मध्यम आकार के डोसे तैयार किए जा सकते हैं। डोसे की संख्या उनके आकार और घोल की मोटाई के अनुसार कम या अधिक हो सकती है।
मुख्य सामग्री
कुट्टू का आटा – 1 कप
उबले हुए आलू – 2 मध्यम आकार के
साबूदाना – आधा कप
सेंधा नमक – स्वादानुसार
जीरा – आधा छोटा चम्मच, यदि व्रत में अनुमत हो
हरी मिर्च – 1 बारीक कटी हुई, यदि अनुमत हो
ताजा हरा धनिया – 2 बड़े चम्मच, यदि अनुमत हो
पानी – आवश्यकतानुसार
घी या व्रत में अनुमत तेल – डोसा सेंकने के लिए
काली मिर्च का पाउडर – एक चौथाई छोटा चम्मच, वैकल्पिक
परोसने के लिए सामग्री
ताजा दही – 1 कटोरी
नारियल – आधा कप
हरी मिर्च – थोड़ी-सी, यदि अनुमत हो
सेंधा नमक – स्वादानुसार
नींबू का रस – 1 छोटा चम्मच, वैकल्पिक
ध्यान दें: यह कुट्टू, आलू और साबूदाने से बनने वाली एक फलाहारी विधि है। साबूदाना इस्तेमाल करने से पहले उसकी व्रत में स्वीकार्यता जांच लें। यदि आपके यहां साबूदाना या हरी मिर्च की अनुमति नहीं है, तो उन्हें छोड़कर उपयुक्त विकल्प चुन सकते हैं।
सही सामग्री का चुनाव क्यों है जरूरी?
व्रत के डोसे का स्वाद काफी हद तक सामग्री की गुणवत्ता पर निर्भर करता है। कुट्टू का आटा ताजा होना चाहिए और उसमें नमी या बासी गंध नहीं होनी चाहिए। पैकेट पर सामग्री और निर्माण संबंधी जानकारी देखना भी उपयोगी है, खासकर तब जब खाद्य पदार्थ किसी विशेष उपवास के लिए खरीदे जा रहे हों।
साबूदाना लेते समय साफ, सूखे दानों का चुनाव करें। इसमें मौजूद अतिरिक्त धूल या कणों को हटाने के लिए इसे पानी से धोया जा सकता है। आलू ऐसे चुनें जो अच्छी तरह उबल जाएं और आसानी से मैश किए जा सकें। बहुत अधिक पानी वाले आलू घोल को पतला कर सकते हैं, जिससे डोसा तवे पर फैलाना कठिन हो सकता है।
घी से डोसे में सुगंध और पारंपरिक स्वाद आता है। यदि घी का उपयोग नहीं करना चाहते, तो व्रत में अनुमत तेल भी लिया जा सकता है। सामग्री चुनते समय यह भी ध्यान रखें कि तैयार आटा और मसाले किसी ऐसे खाद्य पदार्थ से दूषित न हों, जो आपके उपवास के नियमों में वर्जित है।
व्रत का डोसा बनाने की तैयारी
सबसे पहले साबूदाने को दो से तीन बार साफ पानी से धो लें। इसके बाद इसे पर्याप्त पानी में लगभग चार से छह घंटे या आवश्यकता के अनुसार तब तक भिगोएं, जब तक दाने नरम न हो जाएं। साबूदाने की किस्म के अनुसार भिगोने का समय अलग हो सकता है। यदि दाने अभी भी सख्त हों, तो उन्हें कुछ समय और भिगोने दें।
अब आलू को अच्छी तरह धोकर उबाल लें। ठंडा होने पर उनका छिलका उतारें और गांठें समाप्त होने तक मैश करें। आलू जितने अच्छी तरह मैश होंगे, घोल उतना ही समान बनेगा। इसके बाद भीगे हुए साबूदाने का अतिरिक्त पानी निकाल दें। यदि आवश्यक हो, तो साबूदाने को थोड़ा पीस लें ताकि वह घोल में अच्छी तरह मिल सके।
एक बड़े बर्तन में कुट्टू का आटा डालें। इसमें मैश किए हुए आलू और तैयार साबूदाना मिलाएं। फिर सेंधा नमक, जीरा, काली मिर्च, हरी मिर्च और हरा धनिया डालें। अब थोड़ा-थोड़ा पानी डालते हुए सभी सामग्री को अच्छी तरह मिलाएं।
घोल न बहुत गाढ़ा होना चाहिए और न ही अत्यधिक पतला। इसकी बनावट ऐसी रखें कि इसे चम्मच या कलछी से तवे पर फैलाया जा सके। घोल तैयार होने के बाद इसे लगभग 10 से 15 मिनट के लिए रख दें, ताकि सामग्री अच्छी तरह एक-दूसरे में मिल जाए।
डोसा सेंकने की सही विधि
सबसे पहले एक समतल तवा लें। उसे मध्यम आंच पर गर्म करें। यदि तवा नॉन-स्टिक नहीं है, तो उसकी सतह पर थोड़ा घी या अनुमत तेल लगाएं। तवा बहुत अधिक गर्म होने पर घोल समान रूप से नहीं फैलेगा, जबकि ठंडे तवे पर डोसा ठीक से नहीं सिकेगा।
अब एक कलछी भर घोल तवे के बीच में डालें। सामान्य चावल वाले डोसे की तरह इसे बहुत पतला फैलाने का प्रयास न करें, क्योंकि कुट्टू, आलू और साबूदाने के मिश्रण की बनावट अलग होती है। घोल को हल्के हाथ से गोल आकार में फैलाएं। यदि किनारे टूटने लगें, तो थोड़ी मात्रा में घोल डालकर उन्हें ठीक किया जा सकता है।
डोसे के किनारों पर थोड़ा घी डालें और इसे मध्यम से धीमी आंच पर पकने दें। कुछ मिनट बाद जब नीचे की सतह सुनहरी होने लगे और किनारे तवे से अलग होने लगें, तब सावधानी से पलट दें। दूसरी ओर भी अच्छी तरह सेंकें, ताकि आलू और आटे का मिश्रण पूरी तरह पक जाए।
जब दोनों तरफ हल्का सुनहरा रंग आ जाए और डोसा मनचाही बनावट प्राप्त कर ले, तो उसे प्लेट में निकाल लें। इसी तरह शेष घोल से अन्य डोसे तैयार करें। प्रत्येक डोसे से पहले तवे का तापमान जांचना उपयोगी है, ताकि सभी डोसे लगभग समान रूप से पकें।
डोसे को कुरकुरा बनाने के आसान उपाय
व्रत का डोसा सामान्य डोसे की तरह हमेशा बहुत पतला और कुरकुरा नहीं बनता। इसकी बनावट मुख्य रूप से घोल में मौजूद नमी, आटे की मात्रा और सेंकने के तरीके पर निर्भर करती है। फिर भी कुछ आसान उपाय अपनाकर इसे अधिक स्वादिष्ट बनाया जा सकता है।
सबसे पहले घोल में जरूरत से ज्यादा पानी न डालें। यदि घोल बहुत पतला हो जाए, तो उसमें थोड़ा कुट्टू का आटा या अतिरिक्त मैश किया हुआ आलू मिलाकर बनावट सुधारें। यदि घोल बहुत गाढ़ा है, तो थोड़ा पानी डालकर इसे फैलाने योग्य बनाएं।
दूसरी बात, डोसे को तेज आंच पर तुरंत पकाने के बजाय मध्यम आंच पर पर्याप्त समय दें। इससे अंदर का हिस्सा भी अच्छी तरह पकता है और बाहरी सतह सुनहरी हो सकती है। तवे पर घी की बहुत अधिक मात्रा डालने से डोसा भारी हो सकता है, इसलिए थोड़ी-थोड़ी मात्रा का उपयोग करें।
तीसरी बात, डोसे को बार-बार पलटने से बचें। एक तरफ पर्याप्त पकने के बाद ही उसे पलटें। यदि आपका लक्ष्य अधिक कुरकुरा डोसा बनाना है, तो घोल की मोटाई थोड़ी कम रख सकते हैं, लेकिन इतना ध्यान रखें कि डोसा टूटे नहीं। पहली बार बनाते समय एक छोटा डोसा बनाकर घोल की स्थिरता जांच लेना अच्छा उपाय है।
व्रत के डोसे के साथ कौन-सी चटनी अच्छी लगेगी?
नारियल की फलाहारी चटनी
नारियल की चटनी व्रत के डोसे के साथ एक अच्छा विकल्प है। इसे बनाने के लिए आधा कप ताजा कसा हुआ नारियल, थोड़ा सेंधा नमक, कुछ चम्मच पानी और व्रत में अनुमत हरी मिर्च लें। सभी सामग्री को मिक्सर में पीसकर मुलायम चटनी तैयार करें। आवश्यकतानुसार पानी डालकर इसकी गाढ़ाई नियंत्रित की जा सकती है।
इस चटनी को बिना तड़के के भी परोसा जा सकता है। यदि आपके व्रत में जीरा और घी अनुमत हैं, तो थोड़े जीरे को घी में गर्म करके चटनी में मिलाया जा सकता है। हालांकि, उपवास के नियमों के अनुसार ही मसालों का चयन करें।
दही के साथ परोसने का तरीका
ताजा दही डोसे के स्वाद को संतुलित करता है। इसे एक कटोरी में निकालकर हल्का-सा सेंधा नमक और, यदि अनुमत हो, तो थोड़ा भुना जीरा मिलाया जा सकता है। दही और डोसे का संयोजन स्वाद के साथ भोजन में कुछ प्रोटीन भी जोड़ता है।
डोसे के साथ उबले आलू की हल्की फलाहारी सब्जी भी परोसी जा सकती है। इस प्रकार एक साधारण नाश्ता उपवास के दौरान अधिक संतोषजनक भोजन बन सकता है।
व्रत के डोसे का पोषण महत्व
व्रत का डोसा केवल स्वाद के लिए ही नहीं, बल्कि ऊर्जा प्रदान करने वाले खाद्य पदार्थों के संयोजन के रूप में भी उपयोगी है। इसमें इस्तेमाल होने वाले आलू और साबूदाने से मुख्य रूप से कार्बोहाइड्रेट प्राप्त होते हैं, जो शरीर को ऊर्जा देने में मदद करते हैं। कुट्टू में कार्बोहाइड्रेट के साथ कुछ प्रोटीन, रेशा और विभिन्न खनिज भी पाए जाते हैं।
इस व्यंजन का वास्तविक पोषण मूल्य इस्तेमाल की गई सामग्री, उसकी मात्रा और सेंकने में प्रयुक्त घी या तेल पर निर्भर करता है। अधिक घी डालने से इसकी ऊर्जा मात्रा बढ़ जाती है। वहीं, दही के साथ परोसने से भोजन में प्रोटीन और कैल्शियम की मात्रा बढ़ सकती है।
यह समझना भी जरूरी है कि फलाहारी भोजन अपने आप में संतुलित भोजन की गारंटी नहीं है। यदि पूरे उपवास के दौरान केवल आलू, साबूदाना और अन्य स्टार्चयुक्त खाद्य पदार्थ खाए जाएं, तो प्रोटीन और कुछ अन्य पोषक तत्वों की मात्रा कम रह सकती है। इसलिए अनुमत खाद्य पदार्थों में दही, दूध, मेवे और फल जैसे विकल्प शामिल करना उपयोगी हो सकता है।
व्रत के डोसे को किसी बीमारी का उपचार या विशेष स्वास्थ्य लाभ देने वाला व्यंजन नहीं मानना चाहिए। यह मुख्य रूप से उपवास के दौरान भोजन में विविधता लाने का एक स्वादिष्ट विकल्प है।
व्रत का डोसा बनाते समय किन गलतियों से बचें?
सबसे आम गलती साबूदाने को पर्याप्त समय तक न भिगोना है। सख्त साबूदाने से डोसे की बनावट असमान हो सकती है। इसी तरह, आलू को ठीक से मैश न करने पर घोल में गांठें रह सकती हैं, जिससे डोसा फैलाना मुश्किल हो जाता है।
बहुत ज्यादा पानी मिलाने से डोसा तवे पर टूट सकता है। दूसरी ओर, अत्यधिक गाढ़े घोल से डोसा मोटा बन सकता है और अंदर से ठीक तरह नहीं पक सकता। इसलिए पानी हमेशा धीरे-धीरे मिलाएं।
तवे का तापमान भी महत्वपूर्ण है। अत्यधिक गर्म तवे पर घोल चिपक सकता है या जल्दी रंग बदल सकता है, जबकि बहुत ठंडे तवे पर डोसा देर से सिकेगा। मध्यम आंच पर पकाना आमतौर पर बेहतर परिणाम देता है।
इसके अलावा, व्रत में साधारण नमक, सामान्य मसाले या अन्य निषिद्ध सामग्री का अनजाने में इस्तेमाल करने से बचें। यदि डोसा बच्चों, बुजुर्गों या किसी विशेष आहार संबंधी आवश्यकता वाले व्यक्ति के लिए बना रहे हैं, तो सामग्री और पकाने के तरीके पर विशेष ध्यान दें।
डोसे को कब और कैसे परोसें?
व्रत का डोसा तवे से उतरते ही गर्मागर्म परोसना सबसे अच्छा रहता है। ताजा डोसे की बाहरी सतह और अंदर की नरम बनावट का स्वाद अधिक अच्छा लगता है। इसे नारियल की चटनी, ताजे दही या फलाहारी आलू की सब्जी के साथ परोसा जा सकता है।
यदि परिवार के कई लोगों के लिए डोसा बना रहे हैं, तो सभी डोसे एक साथ बनाकर लंबे समय तक ढककर रखने के बजाय उन्हें जरूरत के अनुसार तैयार करें। लंबे समय तक बंद बर्तन में रखने से उनकी सतह नरम पड़ सकती है। यदि घोल पहले से तैयार किया गया है, तो उसे उचित तापमान पर सुरक्षित रखें और बहुत देर तक कमरे के तापमान पर न छोड़ें।
बचे हुए पके डोसे को भी लंबे समय तक बाहर रखने से बचें। उन्हें जल्द ठंडा करके ढककर फ्रिज में रखें और दोबारा अच्छी तरह गर्म करके खाएं। भोजन की सुरक्षा के लिए विशेषकर गर्म मौसम में यह सावधानी जरूरी है।
उपवास में परंपरा के साथ स्वाद का आनंद
व्रत का डोसा भारतीय फलाहारी भोजन में एक सरल, स्वादिष्ट और उपयोगी विकल्प है। कुट्टू के आटे, आलू और साबूदाने से तैयार यह व्यंजन सामान्य उपवास के भोजन में कुछ नया जोड़ सकता है। इसकी विधि बहुत जटिल नहीं है, लेकिन सामग्री का सही अनुपात, घोल की उचित गाढ़ाई और तवे का सही तापमान अच्छे परिणाम के लिए महत्वपूर्ण हैं।
इसे नारियल की चटनी, दही या अनुमत फलाहारी सब्जी के साथ परोसकर एक संतोषजनक भोजन तैयार किया जा सकता है। साथ ही, व्रत के नियमों का पालन करना, साफ-सफाई का ध्यान रखना और भोजन में विविधता बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है।
इस प्रकार, थोड़ी-सी तैयारी और सही विधि के साथ व्रत का डोसा उपवास के दिनों में स्वाद और सुविधा का सुंदर मेल बन सकता है। यह उन लोगों के लिए खास तौर पर अच्छा विकल्प है, जो अपनी पारंपरिक आस्था का सम्मान करते हुए फलाहारी भोजन को अधिक रोचक बनाना चाहते हैं।






