सूखे मेवों की कीमतों ने बिगाड़ा त्योहारों का बजट, जानिए अब क्या है कारोबारियों की रणनीति

संवाद 24 डेस्क। त्योहारी मौसम में सूखे मेवों की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों का बजट बिगाड़ दिया है। बादाम, पिस्ता और अखरोट जैसे लोकप्रिय मेवों के दाम पिछले साल की तुलना में काफी बढ़ गए हैं। इसके बावजूद दीपावली और अन्य त्योहारों पर उपहार देने की परंपरा के कारण बाजार में मांग बनी हुई है। महंगाई के बीच ग्राहकों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कारोबारी छोटे पैकेट, आकर्षक पैकिंग और बजट के अनुकूल उपहार विकल्पों पर जोर दे रहे हैं। ऐसे में इस बार त्योहारों की खरीदारी का तरीका बदलता दिखाई दे रहा है। लोग उपहार देना तो चाहते हैं, लेकिन बढ़ती कीमतों के कारण मात्रा और खर्च दोनों में संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

त्योहारों की खरीदारी पर महंगाई का असर, सूखे मेवों के दाम में तेज उछाल
भारत में दीपावली, धनतेरस और भाई दूज जैसे त्योहारों के दौरान सूखे मेवों की मांग बढ़ जाती है। परिवारों में इनके सेवन के साथ-साथ रिश्तेदारों, मित्रों और व्यावसायिक सहयोगियों को उपहार देने के लिए भी बादाम, पिस्ता, काजू, अखरोट और किशमिश खरीदी जाती है। आकर्षक डिब्बों में सजाकर दिए जाने वाले सूखे मेवे लंबे समय से त्योहारों के लोकप्रिय उपहारों में शामिल रहे हैं।
हालांकि, इस वर्ष बाजार की तस्वीर कुछ अलग है। सूखे मेवों की कीमतों में वृद्धि के कारण ग्राहकों को पहले की तुलना में अधिक खर्च करना पड़ रहा है। बाजार से जुड़े हालिया अनुमानों के अनुसार, कई प्रमुख सूखे मेवों के दाम पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़े हैं। कुछ किस्मों में बढ़ोतरी इससे भी अधिक दर्ज की गई है। इसका असर खासतौर पर उन ग्राहकों पर पड़ रहा है, जो बड़ी मात्रा में सूखे मेवे खरीदकर उपहार देते हैं।
महंगाई के बावजूद बाजार में खरीदारी पूरी तरह ठप नहीं हुई है। ग्राहक अपनी पसंद और आर्थिक क्षमता के अनुसार खरीदारी कर रहे हैं। कुछ लोग पहले की तुलना में कम मात्रा खरीद रहे हैं, जबकि कुछ ग्राहक महंगे मेवों के साथ अपेक्षाकृत किफायती विकल्पों को भी उपहार के डिब्बों में शामिल कर रहे हैं। इससे कारोबारियों को उम्मीद है कि कीमतों में वृद्धि के बावजूद त्योहारों के दौरान बिक्री बनी रह सकती है।

बादाम से लेकर पिस्ता तक, कितने बढ़ गए दाम?
सूखे मेवों की कीमतों में आई तेजी का अंदाजा बाजार में प्रचलित भावों से लगाया जा सकता है। कारोबार से संबंधित हालिया जानकारी के अनुसार, पिछले वर्ष की तुलना में कई किस्मों के दाम में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। हालांकि, वास्तविक कीमत मेवे की गुणवत्ता, आकार, किस्म, उत्पत्ति के देश और बिक्री के स्थान के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
बाजार में बताए जा रहे कुछ प्रमुख भाव इस प्रकार हैं।
बादाम की कीमत पिछले वर्ष लगभग 800 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर इस वर्ष करीब 1,100 रुपये प्रति किलोग्राम बताई जा रही है। पिस्ता का भाव लगभग 900 रुपये से बढ़कर 1,800 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया है। खजूर की कीमत भी लगभग 250 रुपये से बढ़कर 500 रुपये प्रति किलोग्राम बताई गई है। वहीं, काजू के भाव पिछले वर्ष के 850 से 1,000 रुपये प्रति किलोग्राम के मुकाबले इस वर्ष लगभग 900 से 1,200 रुपये प्रति किलोग्राम के दायरे में हैं। अखरोट की कीमत गुणवत्ता और किस्म के आधार पर लगभग 1,100 से 1,400 रुपये प्रति किलोग्राम बताई जा रही है।
इन भावों को पूरे देश में लागू एक समान खुदरा दर नहीं माना जाना चाहिए। स्थानीय बाजार, थोक और खुदरा बिक्री तथा पैकिंग के खर्च के कारण वास्तविक कीमतों में अंतर हो सकता है। विशेष किस्मों के प्रीमियम मेवे सामान्य गुणवत्ता वाले उत्पादों से काफी महंगे भी हो सकते हैं।

छोटे पैकेट बन रहे हैं ग्राहकों की पहली पसंद
कीमतों में बढ़ोतरी के बीच ग्राहकों ने खरीदारी का तरीका बदलना शुरू कर दिया है। पहले जो लोग उपहार में 250 ग्राम बादाम का पैकेट देते थे, वे अब 100 या 200 ग्राम के छोटे पैकेट खरीद रहे हैं। इससे उपहार देने की परंपरा भी कायम रहती है और खर्च को नियंत्रित करना भी आसान होता है।
कारोबारियों के सामने भी यही चुनौती है कि ग्राहकों को उनके बजट के भीतर बेहतर विकल्प उपलब्ध कराए जाएं। छोटे पैकेट, सीमित मात्रा वाले उपहार और अलग-अलग मेवों के मिश्रण वाले डिब्बे इस दिशा में उपयोगी साबित हो रहे हैं। ग्राहकों को केवल वजन के बजाय पैकेट की कुल कीमत, उसमें शामिल मेवों की मात्रा और गुणवत्ता पर ध्यान देना पड़ रहा है।
त्योहारों में आकर्षक पैकिंग का भी खास महत्व होता है। कंपनियां और कारोबारी ऐसे उपहार तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं, जो देखने में अच्छे हों और जिनकी कीमत भी तय बजट के भीतर रहे। महंगे मेवों की मात्रा घटाकर या उनके साथ दूसरे विकल्प शामिल करके इस जरूरत को पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है।

कंपनियों ने भी बदली उपहार देने की रणनीति
त्योहारी मौसम में कंपनियां अपने कर्मचारियों, ग्राहकों और व्यावसायिक सहयोगियों को उपहार देती हैं। कई संस्थानों में इसके लिए पहले से बजट निर्धारित होता है। जब सूखे मेवों की कीमतें बढ़ती हैं, तो उसी बजट में पहले जितनी मात्रा खरीदना मुश्किल हो जाता है।
ऐसे में कंपनियां उपहार के डिब्बों का वजन कम करने, महंगे मेवों की मात्रा घटाने और अपेक्षाकृत किफायती विकल्प चुनने पर विचार कर रही हैं। कुछ उपहारों में बादाम और पिस्ता के साथ काजू, अखरोट, किशमिश या दूसरे खाद्य पदार्थों को शामिल किया जा सकता है। इससे उपहार का स्वरूप आकर्षक बनाए रखते हुए लागत को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।
यह बदलाव केवल कंपनियों तक सीमित नहीं है। व्यक्तिगत उपहार खरीदने वाले ग्राहक भी अब पहले से कीमतों की तुलना कर रहे हैं। उनके लिए यह जरूरी हो गया है कि वे उपहार की गुणवत्ता से समझौता किए बिना अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार विकल्प चुनें।

आखिर क्यों महंगे हो रहे हैं सूखे मेवे?
सूखे मेवों की कीमतों में वृद्धि के पीछे केवल त्योहारों के दौरान बढ़ने वाली मांग जिम्मेदार नहीं है। अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति, उत्पादन, परिवहन खर्च और विदेशी मुद्रा की विनिमय दर जैसे कई कारक भी इनकी कीमतों को प्रभावित करते हैं।
भारत अपनी जरूरत के लिए कई प्रकार के सूखे मेवों का आयात करता है। बादाम की आपूर्ति में अमेरिका की महत्वपूर्ण भूमिका है, जबकि ईरान और अफगानिस्तान जैसे देश भी विभिन्न मेवों और सूखे फलों के अंतरराष्ट्रीय कारोबार में अहम स्थान रखते हैं। इन देशों से आने वाली आपूर्ति में बाधा या माल पहुंचने में देरी होने पर भारतीय बाजार में उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।
इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका-ईरान संघर्ष से जुड़े व्यापारिक व्यवधानों को भी कीमतों में तेजी की वजह बताया जा रहा है। आपूर्ति सीमित होने और मांग बने रहने की स्थिति में आयातकों को माल जुटाने के लिए अधिक कीमत चुकानी पड़ सकती है। इसका असर अंततः थोक और खुदरा बाजार में दिखाई देता है।

अमेरिका में बादाम का उत्पादन और आपूर्ति भी अहम
भारत में बादाम की कीमतों पर अंतरराष्ट्रीय उत्पादन की स्थिति का सीधा प्रभाव पड़ सकता है। अमेरिका के कैलिफोर्निया क्षेत्र से बड़ी मात्रा में बादाम का उत्पादन और निर्यात होता है। यदि वहां उत्पादन अनुमान से कम रहता है या निर्यात की खेपों में देरी होती है, तो भारतीय आयातकों के लिए समय पर माल उपलब्ध कराना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार से संबंधित हालिया जानकारियों में कैलिफोर्निया की फसल और भारत आने वाली खेपों की देरी को बादाम की कीमतों पर दबाव डालने वाले कारकों में शामिल किया गया है। इसके साथ ही माल ढुलाई का खर्च भी आयात की कुल लागत को प्रभावित करता है।
हालांकि, किसी एक कारण को सभी सूखे मेवों की कीमतों में वृद्धि के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। अलग-अलग उत्पादों के उत्पादन क्षेत्र, आपूर्ति व्यवस्था और मांग में अंतर होता है। इसी वजह से बादाम, पिस्ता, अखरोट, काजू और खजूर की कीमतों में बढ़ोतरी का स्तर भी अलग-अलग हो सकता है।

महंगी ढुलाई और रुपये की कमजोरी ने बढ़ाई मुश्किल
आयातित वस्तुओं की घरेलू कीमत तय करने में परिवहन खर्च और विदेशी मुद्रा विनिमय दर की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में किसी उत्पाद की कीमत स्थिर हो, तब भी उसे भारत तक पहुंचाने का खर्च बढ़ने से उसका अंतिम मूल्य बढ़ सकता है।
यदि रुपये की तुलना में विदेशी मुद्रा मजबूत होती है, तो आयातकों को समान मात्रा में माल खरीदने के लिए अधिक रुपये खर्च करने पड़ सकते हैं। इसके अतिरिक्त समुद्री माल ढुलाई, बीमा, भंडारण और वितरण जैसे खर्च भी अंतिम कीमत को प्रभावित करते हैं।
सूखे मेवों के कारोबार से जुड़ी हालिया रिपोर्टों में कमजोर रुपये, बढ़ती माल ढुलाई लागत और अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति की चुनौतियों को मौजूदा तेजी के प्रमुख कारणों में गिना गया है।

महंगाई के बीच काजू और दूसरे विकल्पों पर बढ़ा ध्यान
बादाम और पिस्ता जैसे मेवे महंगे होने के बाद ग्राहक दूसरे विकल्पों पर भी विचार कर रहे हैं। काजू, किशमिश, बीजों के मिश्रण और अन्य सूखे फलों को उपहार में शामिल करना कुछ खरीदारों के लिए खर्च नियंत्रित करने का तरीका बन सकता है।
हालांकि, किसी विकल्प को हर स्थिति में सस्ता मानना उचित नहीं होगा। अलग-अलग किस्मों और गुणवत्ता के अनुसार इनके भाव बदलते रहते हैं। इसलिए ग्राहकों को खरीदारी से पहले प्रति किलोग्राम कीमत और पैकेट में दी गई वास्तविक मात्रा की तुलना करनी चाहिए।
कारोबारियों के लिए भी यह जरूरी है कि वे अलग-अलग बजट के ग्राहकों को ध्यान में रखते हुए उत्पादों की विविधता बनाए रखें। महंगे मेवों के छोटे पैकेट से लेकर मिश्रित उपहारों तक, कई विकल्प उपलब्ध होने से ग्राहक अपनी जरूरत के अनुसार फैसला कर सकते हैं।

कारोबारियों को दीपावली पर बिक्री बढ़ने की उम्मीद
कीमतों में तेजी के बावजूद सूखे मेवों के बाजार में त्योहारी मांग को लेकर उत्साह बना हुआ है। कारोबारियों का अनुमान है कि इस वर्ष दीपावली के दौरान बिक्री पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 10 प्रतिशत तक बढ़ सकती है। हालांकि, यह बाजार से जुड़ा अनुमान है, न कि पूरे देश की बिक्री के आधिकारिक आंकड़ों से प्रमाणित परिणाम।
त्योहारों पर उपहार देने की परंपरा, परिवारों की खरीदारी और कंपनियों के सामूहिक आदेश बाजार को सहारा दे सकते हैं। दूसरी ओर, बढ़ती कीमतों के कारण कुछ ग्राहक खरीदारी की मात्रा कम कर सकते हैं। कारोबारियों को इस बात का भी ध्यान रखना होगा कि अधिक लागत और बाजार में प्रतिस्पर्धा के बीच उनका लाभ प्रभावित न हो।
इसलिए इस वर्ष बिक्री की सफलता केवल कीमतों पर निर्भर नहीं करेगी। उत्पादों की गुणवत्ता, उचित मूल्य, आकर्षक पैकिंग और ग्राहकों को बजट के अनुकूल विकल्प उपलब्ध कराने की क्षमता भी महत्वपूर्ण होगी।

ग्राहकों के लिए खरीदारी से पहले इन बातों का ध्यान रखना जरूरी
त्योहारों के दौरान सूखे मेवे खरीदते समय केवल आकर्षक पैकिंग देखकर फैसला नहीं करना चाहिए। पैकेट पर लिखी मात्रा, प्रति किलोग्राम कीमत, उत्पाद की गुणवत्ता और पैकिंग की तारीख की जांच करना उपयोगी रहेगा। खुले मेवे खरीदने पर उनकी ताजगी, गंध और भंडारण की स्थिति पर भी ध्यान देना चाहिए।
यदि सूखे मेवे उपहार के लिए खरीदे जा रहे हैं, तो पहले कुल बजट निर्धारित करना बेहतर रहेगा। इसके बाद उसी बजट में उपलब्ध विकल्पों की तुलना की जा सकती है। छोटे पैकेट खरीदते समय यह देखना भी जरूरी है कि पैकिंग के कारण प्रति किलोग्राम कीमत अनावश्यक रूप से अधिक तो नहीं हो रही है।
बड़ी मात्रा में खरीदारी करने वाले ग्राहकों को अलग-अलग दुकानों के भावों की तुलना करनी चाहिए। वहीं, कंपनियां अपने उपहारों की योजना पहले से बनाकर और अलग-अलग मात्रा वाले पैकेटों के मूल्य की जानकारी लेकर खर्च का बेहतर प्रबंधन कर सकती हैं।

महंगे मेवों के बीच बजट के अनुसार बदलेगा त्योहारों का बाजार
इस बार सूखे मेवों का बाजार बढ़ती कीमतों और बनी हुई त्योहारी मांग के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। बादाम, पिस्ता और अखरोट के महंगे होने से ग्राहकों के खर्च पर दबाव पड़ा है, लेकिन उपहार देने की परंपरा और त्योहारों से जुड़ी खरीदारी अब भी बाजार को सहारा दे रही है।
छोटे पैकेट, कम वजन वाले उपहार और अलग-अलग मेवों के मिश्रण कारोबारियों के लिए नए अवसर पैदा कर रहे हैं। वहीं, ग्राहकों के लिए जरूरी है कि वे गुणवत्ता और मात्रा की तुलना करके समझदारी से खरीदारी करें।
आने वाले दिनों में सूखे मेवों की बिक्री की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि बाजार में आपूर्ति कितनी सहज रहती है, आयात की लागत में क्या बदलाव आता है और ग्राहक बढ़ती कीमतों के बीच कितना खर्च करने को तैयार होते हैं। फिलहाल, इस त्योहारी मौसम में उपहारों की चमक बनाए रखने के लिए कारोबारियों और ग्राहकों, दोनों को अपने बजट और विकल्पों के बीच नया संतुलन बनाना पड़ रहा है।

Geeta Singh
Geeta Singh

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