
संवाद 24 पश्चिम बंगाल। शारदीय नवरात्र और दुर्गा पूजा के पावन अवसर पर जहां पूरा शहर रोशनी, ढाक की गूंज और भक्तिमय उल्लास में सराबोर था, वहीं शनिवार की एक मनहूस शाम अचानक मातम और खौफ में तब्दील हो गई। उत्तरी कोलकाता के गिरीश पार्क थाना अंतर्गत चोरबागान इलाके में सजे सर्वजनिन दुर्गा पूजा पंडाल में दर्शन के लिए उमड़ी हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ में एकाएक मची भीषण भगदड़ ने खुशियों के माहौल को आंसुओं में डुबो दिया। इस दर्दनाक हादसे में 19 मासूम श्रद्धालुओं की जान चली गई, जबकि 15 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए पूजा समिति के प्रमुख पदाधिकारियों सहित 12 लोगों को हिरासत में ले लिया है और उनसे सघन पूछताछ शुरू कर दी है।
कैसे शुरू हुआ मौत का तांडव?
प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय सूत्रों के अनुसार, घटना शनिवार शाम करीब 7:40 बजे की है। वीकेंड और त्योहारी सीजन होने के चलते चोरबागान पंडाल के बाहर हजारों ‘पंडाल हॉपर्स’ (दर्शनार्थी) कतारों में लगकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। उसी दौरान अचानक आसमान में घने बादल घिरे और तेज बारिश शुरू हो गई। बारिश की फुहारों और भीगने से बचने के लिए बाहर खड़े लोग एक साथ पंडाल के मुख्य द्वार की तरफ भागे। संकरे प्रवेश द्वार और सीमित निकासी व्यवस्था के चलते भीड़ का दबाव अचानक बेकाबू हो गया। देखते ही देखते आगे खड़े कुछ लोग संतुलन खोकर गीली सड़क पर गिर पड़े। इसके बाद पीछे से आ रही बेकाबू भीड़ उन गिरे हुए लोगों को रौंदते हुए आगे बढ़ने लगी। महज चंद मिनटों के भीतर पूरा इलाका चीख-पुकार, अफरा-तफरी और दर्दनाक रुदन से दहल उठा। सड़क पर चारों ओर टूटी हुई चप्पलें, फटे कपड़े और गिरे हुए छाते बिखरे नजर आ रहे थे।
बाइक पर लादकर ले जाए गए अचेत श्रद्धालु, अस्पताल में मची अफरातफरी
प्रत्यक्षदर्शियों ने उस खौफनाक मंजर को बयां करते हुए बताया कि भगदड़ के बाद चारों ओर सिर्फ कराहते और बेहोश पड़े लोग दिख रहे थे। भीड़ इतनी सघन थी कि एम्बुलेंस को मौके तक पहुंचने में भारी मशक्कत करनी पड़ी। स्थानीय युवाओं और स्वयंसेवकों ने तुरंत मोर्चा संभाला और अचेत पड़े लोगों को मोटरसाइकिलों और निजी वाहनों में लादकर कलकत्ता मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल पहुंचाया।
अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर और इमरजेंसी वार्ड में रातभर चीख-पुकार मची रही। डॉक्टरों की टीम घायलों के त्वरित उपचार में जुटी रही, लेकिन गंभीर चोटों और दम घुटने के कारण 19 लोगों को बचाया नहीं जा सका। कई घायलों की हालत अब भी चिंताजनक बनी हुई है, जिनका गहन चिकित्सा इकाई (ICU) में इलाज जारी है।
प्रशासन का कड़ा एक्शन: 12 हिरासत में, न्यायिक जांच के निर्देश
हादसे की गंभीरता को देखते हुए लालबाजार पुलिस मुख्यालय और राज्य प्रशासन तुरंत हरकत में आ गया। गिरीश पार्क थाने की पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सुरक्षा मानकों में गंभीर लापरवाही बरतने के आरोप में पूजा आयोजकों समेत 12 लोगों को हिरासत में ले लिया। पुलिस इस बात की गहराई से तफ्तीश कर रही है कि क्या आयोजकों ने तय क्षमता से अधिक भीड़ को अनियंत्रित होने दिया और क्या आपातकालीन निकास द्वारों पर पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था मौजूद थी। राज्य सरकार ने स्थिति को संभालने के लिए उच्च स्तरीय बैठक की। मुख्यमंत्री ने घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों को 25-25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की घोषणा की है। इसके अतिरिक्त, हादसे की तह तक जाने और जवाबदेही तय करने के लिए मौजूदा जज की देखरेख में स्पेशल टास्क फोर्स (STF) के गठन का निर्देश दिया गया है, ताकि घटना की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित हो सके।
पंडाल सील, कंट्रोल रूम और हेल्पलाइन सक्रिय
सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के मद्देनजर चोरबागान सर्वजनिन पूजा पंडाल को आम जनता के लिए पूरी तरह बंद और सील कर दिया गया है। लालबाजार कंट्रोल रूम में परिजनों की सहायता और जानकारी उपलब्ध कराने के लिए 24 घंटे काम करने वाले हेल्पलाइन नंबर (18003455678 और 033-22141310) जारी किए गए हैं। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, आपदा प्रबंधन बल (DMG) और दमकल विभाग की टीमें इलाके में लगातार गश्त कर रही हैं। यह हृदयविदारक घटना एक बार फिर बड़े सार्वजनिक आयोजनों में भीड़ प्रबंधन, आपातकालीन निकासी मार्गों और आपदा पूर्व तैयारियों पर बड़े सवाल खड़े कर गई है।






