
संवाद 24 मध्य प्रदेश। ग्वालियर जिले में देर रात एक ऐसा रूह कंपा देने वाला हादसा घटित हुआ, जिसने हर किसी को स्तब्ध कर दिया है। ऐतिहासिक शीतला माता मंदिर के पास उस वक्त अफरा-तफरी और चीख-पुकार मच गई जब धान से लदा एक बेकाबू ट्रक सुरक्षा घेरे को तोड़ता हुआ श्रद्धालुओं की भीड़ पर कहर बनकर टूट पड़ा। इस दिल दहला देने वाली दुर्घटना में अब तक 12 श्रद्धालुओं की असामयिक मौत हो चुकी है, जबकि करीब 39 लोग गंभीर व मामूली रूप से घायल हुए हैं। घायलों में महिलाएं, मासूम बच्चे और ड्यूटी पर तैनात दो पुलिसकर्मी भी शामिल हैं।
रात के अंधेरे में मची भगदड़ और हाहाकार
घटना देर रात लगभग 1:00 से 1:30 बजे के बीच की बताई जा रही है। नवरात्रि के पावन अवसर पर माता के दर्शन और पूजन के लिए दूर-दराज से भक्तजन शीतला माता मंदिर परिसर के आस-पास जुटे हुए थे। छिनोर की ओर से आ रही एक ढलान वाली सड़क पर धान से ओवरलोडेड ट्रक अचानक अनियंत्रित हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ट्रक की रफ्तार इतनी तेज थी और चालक का नियंत्रण इस कदर खो चुका था कि वाहन लगातार बाईं ओर झुकते हुए आगे बढ़ता चला गया। रास्ते में लगे पुलिस बैरिकेड्स और स्टॉपर्स को चकनाचूर करते हुए यह भारी वाहन किनारे लगी दुकानों और पैदल चल रहे श्रद्धालुओं को रौंदता चला गया और अंततः मंदिर के मुख्य द्वार व बाहरी दीवार से टकराकर रुका। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि मंजर इतना भयावह था कि लोगों को भागने या संभलने तक का अवसर नहीं मिला। कुछ ही पलों में भक्तिमय माहौल मातम और चीखों में तब्दील हो गया। सड़क पर बिखरी दुकानें, टूटे बैरिकेड्स और बदहवास परिजनों की पुकार से पूरा इलाका दहल उठा।
प्रशासनिक अमला सक्रिय, अस्पताल में भर्ती घायल
घटना की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन और पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया। ग्वालियर की कलेक्टर रुचिका चौहान और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) धर्मवीर सिंह पुलिस बल एवं आपदा राहत दल के साथ तुरंत मौके पर पहुंचे। राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर शुरू किया गया और दर्जनों एंबुलेंस व प्रशासनिक वाहनों की मदद से घायलों को तुरंत जयारोग्य (J.A.) चिकित्सालय पहुंचाया गया। एसएसपी धर्मवीर सिंह ने पुष्टि की कि कुल 39 घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने 12 लोगों को मृत घोषित कर दिया। 5 से 6 मरीजों की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है, जिन्हें गंभीर फ्रैक्चर और आंतरिक चोटें आई हैं। डॉक्टरों की विशेष टीम आईसीयू में उनका सघन उपचार कर रही है, वहीं अन्य घायलों को प्राथमिक उपचार देकर निगरानी में रखा गया है।
सुरक्षा घेरे और पाबंदी के बावजूद कैसे घुसा भारी वाहन?
इस दर्दनाक हादसे ने मंदिर प्रबंधन और यातायात सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन के स्पष्ट नियमों के मुताबिक, जिस ढलान वाले मार्ग से ट्रक गुजरा, वहां भारी और लोडेड वाहनों का प्रवेश पूरी तरह से प्रतिबंधित था। इसके अतिरिक्त नवरात्रि मेले के चलते पुलिस का चेक-पॉइंट और पुख्ता स्टॉपर भी तैनात किए गए थे।
कलेक्टर रुचिका चौहान ने बताया कि यह सबसे बड़ा जांच का विषय है कि भारी वाहनों के लिए प्रतिबंधित मार्ग और पुलिस नाके के होते हुए यह ओवरलोडेड ट्रक मंदिर के नजदीक तक कैसे पहुंच गया। क्या पुलिस चेक-पॉइंट पर कोई चूक हुई या चालक ने चेकिंग तोड़कर भागने का प्रयास किया? इसके अलावा यह तकनीकी पहलू भी जांचा जा रहा है कि वाहन के ब्रेक फेल हुए थे या कोई अन्य यांत्रिक खराबी आई थी। आरटीओ (परिवहन विभाग) की विशेष तकनीकी टीम को दुर्घटनाग्रस्त वाहन की यांत्रिक जांच के निर्देश दिए गए हैं।
जवाबदेही तय करने की मांग
पवित्र पर्व के दौरान आस्था के आंगन में हुई इस त्रासदी ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। पीड़ित परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है और स्थानीय लोगों में ओवरलोडिंग व यातायात नियमों की अनदेखी को लेकर भारी रोष देखा जा रहा है। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति या लापरवाह कर्मी को बख्शा नहीं जाएगा।






