
संवाद 24 डेस्क। शारदीय नवरात्रि का पर्व मां दुर्गा की आराधना, शक्ति की उपासना और आध्यात्मिक साधना का विशेष अवसर माना जाता है। नौ दिनों तक चलने वाले इस पावन पर्व की शुरुआत घटस्थापना या कलश स्थापना के साथ होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि के पहले दिन शुभ मुहूर्त में कलश स्थापित करके मां दुर्गा का आह्वान किया जाता है। ऐसे में भक्तों के मन में सबसे बड़ा सवाल है कि वर्ष 2026 में घटस्थापना कब की जाएगी, सुबह पूजा के लिए कौन-सा समय शुभ रहेगा और अभिजीत मुहूर्त में कलश स्थापना करना कितना महत्वपूर्ण है?
इस वर्ष शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर 2026, रविवार से मानी जा रही है। घटस्थापना के लिए प्रातःकाल का मुहूर्त और अभिजीत मुहूर्त दोनों महत्वपूर्ण हैं। हालांकि, पूजा का सटीक समय शहर, सूर्योदय और स्थानीय पंचांग के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। इसलिए कलश स्थापना से पहले अपने क्षेत्र के मान्य पंचांग से समय की पुष्टि करना उचित रहेगा।
घटस्थापना 2026: सुबह कितने बजे करें कलश स्थापना?
घटस्थापना के लिए प्रातःकाल का समय विशेष महत्व रखता है। हिंदू धार्मिक परंपराओं में सूर्योदय के आसपास का समय पूजा-पाठ और शुभ संकल्प के लिए अनुकूल माना जाता है। नवरात्रि के पहले दिन भक्त स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करते हैं, पूजा स्थल को साफ करते हैं और विधि-विधान से कलश स्थापना करते हैं।
11 अक्टूबर 2026 को घटस्थापना का प्रातःकालीन मुहूर्त सुबह 6:19 बजे से 10:12 बजे तक बताया गया है। इस अवधि में श्रद्धालु अपनी सुविधा और पूजा की तैयारी के अनुसार कलश स्थापना कर सकते हैं। दूसरे शहरों में सूर्योदय और स्थानीय गणना के अंतर के कारण मुहूर्त में बदलाव संभव है। इसलिए दिल्ली का समय देश के सभी शहरों के लिए समान नहीं मानना चाहिए।
सुबह के मुहूर्त में पूजा करने वाले भक्तों को सलाह दी जाती है कि वे पूजा सामग्री पहले से तैयार रखें। इससे शुभ समय के दौरान बिना किसी जल्दबाजी के संकल्प, कलश स्थापना और मां दुर्गा की आराधना पूरी की जा सकती है।
अभिजीत मुहूर्त में घटस्थापना का समय क्या है?
यदि किसी कारणवश श्रद्धालु सुबह के निर्धारित मुहूर्त में कलश स्थापना नहीं कर पाते हैं, तो वे अभिजीत मुहूर्त के बारे में भी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। हिंदू पंचांग में अभिजीत मुहूर्त को दिन के शुभ समयों में गिना जाता है। सामान्यतः इसकी गणना स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त के आधार पर की जाती है, इसलिए इसका समय हर स्थान पर एक जैसा नहीं होता।
11 अक्टूबर 2026 को अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक बताया गया है। इस अवधि में घटस्थापना करने से पहले यह जरूर सुनिश्चित करें कि स्थानीय पंचांग और उस दिन के धार्मिक निर्देशों के अनुसार यह समय उपयुक्त है।
ध्यान देने वाली बात यह है कि अभिजीत मुहूर्त का उल्लेख होने मात्र से हर परिस्थिति में उसे प्रातःकालीन घटस्थापना मुहूर्त का स्वतः विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। नवरात्रि की प्रतिपदा, तिथि की अवधि और उस दिन के पंचांग के आधार पर पूजा का समय निर्धारित किया जाता है। इसलिए अंतिम निर्णय स्थानीय पंचांग के अनुसार करना अधिक उचित है।
घटस्थापना क्यों है नवरात्रि का सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठान?
घटस्थापना को नवरात्रि के प्रमुख प्रारंभिक अनुष्ठानों में शामिल किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, कलश को शुभता, समृद्धि, पवित्रता और जीवनदायिनी ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापित करके मां दुर्गा की उपासना का संकल्प लिया जाता है।
कलश स्थापना के साथ ही घरों और मंदिरों में नौ दिनों तक चलने वाली पूजा की शुरुआत होती है। भक्त मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना करते हैं, दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं, मंत्र-जप करते हैं और अपनी श्रद्धा के अनुसार व्रत रखते हैं। कई घरों में घटस्थापना के साथ जौ बोने की परंपरा भी निभाई जाती है। इन जौ को नवरात्रि के दौरान श्रद्धा और आस्था के साथ देखा जाता है।
हालांकि, पूजा की विधि और परंपराएं अलग-अलग क्षेत्रों तथा परिवारों में भिन्न हो सकती हैं। इसलिए अपने कुलाचार और मान्य धार्मिक परंपरा का पालन करना भी महत्वपूर्ण है।
कलश स्थापना से पहले जुटा लें ये जरूरी पूजन सामग्री
घटस्थापना की तैयारी करते समय पूजन सामग्री को पहले से व्यवस्थित कर लेना बेहतर रहता है। सामान्यतः कलश, मिट्टी का पात्र, जौ, स्वच्छ मिट्टी, जल, आम या अशोक के पत्ते, नारियल, लाल कपड़ा, मौली, रोली, अक्षत, पुष्प, फल, धूप, दीपक और नैवेद्य की आवश्यकता पड़ सकती है। पूजा की परंपरा के अनुसार सिक्का, सुपारी और गंगाजल भी रखा जाता है। सामग्री की सूची परिवार की धार्मिक परंपरा तथा स्थानीय पूजा-पद्धति के अनुसार अलग हो सकती है।
कलश स्थापना के लिए मिट्टी के पात्र में मिट्टी भरकर जौ बोए जाते हैं। इसके बाद कलश को स्वच्छ जल से भरकर उसमें परंपरा के अनुसार सुपारी, सिक्का या अन्य पूजन सामग्री रखी जाती है। कलश के मुख पर आम अथवा अशोक के पत्ते सजाकर उसके ऊपर लाल वस्त्र में लिपटा नारियल स्थापित किया जा सकता है। पूजा से पहले देवी-देवताओं का स्मरण कर संकल्प लिया जाता है और मां दुर्गा की आराधना की जाती है। यदि आप पहली बार घटस्थापना कर रहे हैं, तो किसी जानकार पुरोहित से विधि समझ लेना उपयोगी रहेगा।
घटस्थापना करते समय किन बातों का रखें ध्यान?
घटस्थापना केवल सामग्री जुटाने का अनुष्ठान नहीं है, बल्कि इसे श्रद्धा, स्वच्छता और अनुशासन के साथ संपन्न करने की परंपरा है। पूजा स्थल को साफ रखें और कलश स्थापना के लिए ऐसा स्थान चुनें जहां नौ दिनों तक नियमित पूजा की जा सके। पूजा से पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और मन में मां दुर्गा के प्रति श्रद्धा रखते हुए संकल्प लें।
मुहूर्त को लेकर किसी प्रकार का भ्रम हो तो अलग-अलग वेबसाइटों पर दिए गए समय को बिना जांचे अंतिम न मानें। तिथि, सूर्योदय और स्थानीय पंचांग की गणना के कारण अलग-अलग स्थानों के मुहूर्त में अंतर आ सकता है। विशेष रूप से सुबह और अभिजीत मुहूर्त में से किसी एक को चुनने से पहले अपने शहर के पंचांग में प्रतिपदा की स्थिति तथा घटस्थापना के लिए निर्धारित समय की पुष्टि कर लें।
नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की होती है पूजा
नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं में उन्हें पर्वतराज हिमालय की पुत्री और शक्ति, धैर्य तथा स्थिरता का प्रतीक माना गया है। मां शैलपुत्री की आराधना के साथ भक्त नवरात्रि के नौ दिनों की साधना आरंभ करते हैं।
इस दिन अनेक श्रद्धालु दुर्गा सप्तशती का पाठ, मंत्र-जप और आरती करते हैं। कुछ भक्त पूरे नौ दिनों का व्रत रखते हैं, जबकि अन्य अपनी श्रद्धा और स्वास्थ्य के अनुसार उपवास करते हैं। व्रत रखने वालों को अपनी शारीरिक स्थिति का ध्यान रखना चाहिए। बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों के लिए खानपान में बड़े बदलाव करने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है।
सही मुहूर्त के साथ शुरू करें मां दुर्गा की आराधना
शारदीय नवरात्रि 2026 में घटस्थापना के लिए सुबह का मुहूर्त और अभिजीत मुहूर्त, दोनों ही श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण जानकारी हैं। नई दिल्ली के लिए उपलब्ध गणना के अनुसार, 11 अक्टूबर को प्रातःकालीन मुहूर्त सुबह 6:19 से 10:12 बजे तक और अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:44 से दोपहर 12:31 बजे तक बताया गया है। हालांकि, इन समयों की स्थानीय पंचांग से पुष्टि करना जरूरी है।
नवरात्रि का वास्तविक संदेश श्रद्धा, संयम, आत्मचिंतन और सकारात्मकता से जुड़ा है। घटस्थापना के साथ भक्त मां दुर्गा का स्मरण करते हुए सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना करते हैं। इसलिए पूजा की तैयारियों के साथ सही तिथि और मुहूर्त की जानकारी जुटाएं, अपनी पारिवारिक परंपराओं का सम्मान करें और नवरात्रि के नौ दिनों को भक्ति तथा सद्भाव के साथ मनाएं।






