
संवाद 24 नई दिल्ली। वैश्विक प्रौद्योगिकी जगत में दशकों से ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ (AI) के नाम से पहचानी जाने वाली क्रांतिकारी तकनीक को अब एक बिल्कुल नई और अभूतपूर्व पहचान दे दी गई है। व्हाइट हाउस में आयोजित एक भव्य व ऐतिहासिक कार्यक्रम के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक नए शासकीय दस्तावेज पर दस्तखत करते हुए घोषणा की कि अब से इस तकनीक को ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ नहीं, बल्कि ‘सुपर इंटेलिजेंस’ (Super Intelligence – SI) पुकारा जाएगा। इस अहम फैसले के औपचारिक एलान के दौरान सिलिकॉन वैली और वैश्विक तकनीकी दुनिया के सबसे प्रभावशाली चेहरे व्हाइट हाउस में मौजूद रहे। टेस्ला और स्पेसएक्स के कर्ताधर्ता एलन मस्क, मेटा प्रमुख मार्क जुकरबर्ग, अल्फाबेट व गूगल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) सुंदर पिचाई और चिप निर्माता दिग्गज कंपनी एनवीडिया के प्रमुख जेन्सेन हुआंग जैसे तकनीकी दिग्गजों ने इस ऐतिहासिक पल की गवाही दी।
”यह अब कृत्रिम नहीं रहा, यह सुपर है”
इस नए कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर करते हुए राष्ट्रपति ने स्पष्ट लहजे में कहा कि आधुनिक दौर में विकसित हो रही यह बौद्धिक क्षमता अब महज ‘आर्टिफिशियल’ यानी कृत्रिम या बनावटी दायरे तक सीमित नहीं रह गई है। उन्होंने जोर देते हुए कहा, “हम इस तकनीक का नाम बदलने से जुड़े आधिकारिक दस्तावेज पर हस्ताक्षर कर रहे हैं क्योंकि यह वाकई अब केवल कृत्रिम नहीं है। इस मंच पर मौजूद हम सभी विशेषज्ञ इस बुनियादी सच्चाई पर सहमत हैं। इसलिए इसे अब आधिकारिक और कानूनी तौर पर ‘सुपर इंटेलिजेंस’ के रूप में ही मान्यता दी जा रही है।”
राष्ट्रपति ने इस बात को रेखांकित किया कि पिछले कुछ वर्षों में मशीन लर्निंग और डीप कंप्यूटिंग के क्षेत्र में जो छलांग देखने को मिली है, उसने मानव सभ्यता के सोचने-समझने और काम करने के तौर-तरीकों को पूरी तरह बदल दिया है। ऐसे में पुरानी शब्दावली इस विशाल बौद्धिक सामर्थ्य के साथ न्याय नहीं कर पा रही थी।
नए आदेश में क्या निर्देश दिए गए हैं?
व्हाइट हाउस से जारी आधिकारिक शासकीय नीति में संघीय संस्थाओं और सरकारी विभागों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। नीति वक्तव्य में कहा गया है कि अमेरिकी सरकार द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली आधिकारिक शब्दावली को इन नई तकनीकों की असीम सामर्थ्य और देश के नागरिकों के लिए पैदा होने वाली अनंत संभावनाओं का सही प्रतिबिंब होना चाहिए।
आदेश के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
शब्दावली का पूर्ण बदलाव: कानूनी प्रावधानों की अधिकतम सीमा तक, अमेरिकी सरकार की पूरी कार्यपालिका (Executive Branch) अब पारंपरिक ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ (AI) की जगह आधिकारिक तौर पर ‘सुपर इंटेलिजेंस’ (Super Intelligence) और संक्षिप्त रूप में ‘एसआई’ (SI) का इस्तेमाल करेगी।
भविष्य के दस्तावेजों में अनिवार्यता: भविष्य में तैयार होने वाले नीतिगत प्रस्तावों, आधिकारिक ज्ञापनों, शोध परियोजनाओं और नियामक चर्चाओं में पुरानी शब्दावली के स्थान पर नई परिभाषा को ही प्राथमिक दर्जा दिया जाएगा।
पुराने दस्तावेजों की सुरक्षा: आदेश में यह भी पूरी स्पष्टता के साथ रेखांकित किया गया है कि यह नीतिगत परिवर्तन वर्तमान में प्रभावी कानूनों, पहले से हस्ताक्षरित अनुबंधों, ऐतिहासिक आर्काइव्स या विधिक दस्तावेजों को पूर्वव्यापी (retroactive) रूप से प्रभावित नहीं करेगा। पुरानी फाइलों और कानूनी संविदाओं की वैधता यथावत बनी रहेगी।
टेक दिग्गजों के साथ लंच बैठक और वैश्विक असर
इस अहम दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति ने व्हाइट हाउस में शीर्ष तकनीकी कंपनियों के प्रमुखों के साथ एक उच्च स्तरीय विशेष बैठक और लंच का आयोजन किया था। इस बैठक में भविष्य की कंप्यूटिंग क्षमता, सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला, चिप निर्माण, डेटा केंद्रों की ऊर्जा खपत और वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा में अमेरिका के रणनीतिक प्रभुत्व पर विस्तार से मंथन हुआ।
समारोह में उपस्थित विशेषज्ञों का मानना है कि केवल एक नाम बदल देने से भले ही बैकएंड पर चल रहे गणितीय एल्गोरिदम न बदलें, लेकिन रणनीतिक और राजनीतिक स्तर पर यह बदलाव दुनिया को एक स्पष्ट संदेश देता है। यह संदेश इस बात का द्योतक है कि दुनिया अब प्रारंभिक स्वचालन के दौर से बाहर निकलकर ऐसे युग में कदम रख चुकी है जहां मशीनें कई मोर्चों पर मानव बुद्धि की सामान्य सीमाओं को पार कर ‘अति-बुद्धिमत्ता’ का रूप धारण कर चुकी हैं। वैश्विक नीति विश्लेषकों का मानना है कि व्हाइट हाउस के इस बड़े कदम का असर आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों, संयुक्त राष्ट्र के नीतिगत मंचों और बहुराष्ट्रीय निगमों के कॉर्पोरेट एजेंडे पर भी अनिवार्य रूप से देखने को मिलेगा।






