‘शांति चुनो या संपूर्ण विनाश’: संयुक्त राष्ट्र के मंच से ट्रंप का ईरान को अंतिम अल्टीमेटम

​संवाद 24 नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) का 81वां वार्षिक अधिवेशन उस वक्त गहरे कूटनीतिक तनाव का अखाड़ा बन गया, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वैश्विक मंच से तेहरान को अब तक की सबसे तीखी और खुली चेतावनी दे डाली। उन्होंने सीधे शब्दों में आगाह किया कि यदि ईरान ने समय रहते अमेरिका के साथ एक ठोस शांति समझौता नहीं किया, तो उसका अंजाम बेहद भयानक और विनाशकारी होगा। ट्रंप ने दो टूक शब्दों में स्पष्ट कर दिया कि वॉशिंगटन किसी भी सूरत में इस्लामिक गणराज्य को परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र नहीं बनने देगा, क्योंकि यह न केवल पश्चिम एशिया बल्कि संपूर्ण वैश्विक व्यवस्था के लिए एक अभूतपूर्व खतरा साबित होगा।

​कूटनीतिक मेज पर तनातनी: ईरानी राजनयिकों का वॉकआउट
​जैसे ही अमेरिकी राष्ट्रपति ने पोडियम संभालते हुए ईरान के विरुद्ध सख्त प्रतिबंधों और सैन्य नतीजों का उल्लेख करना शुरू किया, महासभा कक्ष में भारी हलचल मच गई। वहां उपस्थित ईरानी राजनयिकों और प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने ट्रंप के भाषण का कड़ा विरोध जताते हुए तुरंत सदन से वॉकआउट कर दिया। हालांकि, संयुक्त राष्ट्र सत्र में हिस्सा लेने के लिए न्यूयॉर्क पहुंचे ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और विदेश मंत्री अब्बास अरागची इस दौरान मुख्य कक्ष में उपस्थित नहीं थे। इसी बीच संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय की दीवारों के बाहर भी माहौल गर्माया रहा, जहां निर्वासित ईरानी प्रदर्शनकारियों ने तख्तियां लेकर तेहरान में मानवाधिकारों की बहाली और पारदर्शी शासन व्यवस्था की मांग को लेकर जोरदार नारेबाजी की।

​’वार्ता या बर्बादी’: आर्थिक घेराबंदी को हथियार बनाने की रणनीति
​ट्रंप ने अपने संबोधन में दुनिया भर के मित्र देशों से ईरान को आर्थिक रूप से पूरी तरह अलग-थलग करने का आह्वान किया। उन्होंने तर्क दिया कि वे युद्ध, रक्तपात और जानमाल की क्षति से बचना चाहते हैं, और इसीलिए अत्यधिक आर्थिक दबाव बनाकर तेहरान को बातचीत की मेज पर लाने की योजना पर काम कर रहे हैं। ट्रंप ने कहा, “हम चाहते हैं कि ईरान एक संपन्न और पुनर्निर्मित राष्ट्र बने, लेकिन यदि उसने संवाद का रास्ता ठुकराया, तो उसकी आने वाली पीढ़ियों के पास संभलने का कोई अवसर नहीं बचेगा।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि अमेरिका की मंशा युद्ध थोपने की नहीं बल्कि समझौते के जरिए दीर्घकालिक स्थिरता कायम करने की है। ​राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पिछले सात महीनों से जारी तनाव के बीच ट्रंप का यह कड़ा रुख घरेलू राजनीति से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। अमेरिका में 3 नवंबर को होने वाले अहम मध्यावधि चुनावों से पूर्व राष्ट्रपति कूटनीतिक मोर्चे पर एक बड़ी उपलब्धि प्रदर्शित करने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं, ताकि चुनावी नतीजों को अपने पक्ष में मोड़ा जा सके। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट रखा कि समझौते के रास्ते चुनाव के बाद भी खुले रहेंगे।

​वैश्विक संघर्षों पर दावा और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं पर तीखा प्रहार
​महासभा के मंच से ट्रंप ने एक बार फिर दावा किया कि उनकी कड़े आर्थिक कदमों और टैरिफ की नीति ने अतीत में भारत की सैन्य कार्रवाइयों सहित दुनिया के आठ बड़े संघर्षों को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने रूस और यूक्रेन के बीच जारी गतिरोध को भी सख्त आर्थिक शुल्कों के जरिए शीघ्र समाप्त कराने की प्रतिबद्धता जताई। इसके साथ ही उन्होंने कैरेबियाई देश क्यूबा का उल्लेख करते हुए वहां राजनीतिक बदलाव और सैन्य कार्रवाई के स्पष्ट संकेत दिए। ​अपने इस 45 मिनट के उद्बोधन में ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय (ICC) को सिरे से खारिज करते हुए उसके औचित्य पर सवाल खड़े किए और उसके सदस्यों से पद छोड़ने की मांग की। इतना ही नहीं, उन्होंने संयुक्त राष्ट्र तंत्र पर “अति-वामपंथी नौकरशाही” का गढ़ होने का गंभीर आरोप लगाया। ट्रंप ने कहा कि बिना जनादेश वाले अंतरराष्ट्रीय अधिकारी जमीनी हकीकत से कोसों दूर हैं, जिसके चलते अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र को मिलने वाले अपने वार्षिक अंशदान में 15 प्रतिशत की भारी कटौती की है, जिससे संस्थान के करीब चार हजार पद समाप्त हो जाएंगे।

​सुपर इंटेलिजेंस का ऐलान और वैश्विक नेताओं से द्विपक्षीय मंथन
​संबोधन के दौरान ट्रंप ने एक रोचक तकनीकी नीतिगत बदलाव का भी खुलासा किया। उन्होंने बताया कि अब अमेरिकी सरकारी दस्तावेजों और नीतियों में पारंपरिक ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ (AI) के स्थान पर ‘सुपर इंटेलिजेंस’ शब्दावली का प्रयोग किया जाएगा, जो तकनीक के क्षेत्र में अमेरिकी एकाधिकार और श्रेष्ठता को रेखांकित करता है। ​भाषण के उपरांत अमेरिकी राष्ट्रपति 11 प्रमुख देशों के शीर्ष नेताओं के साथ बैठकों के गहन दौर में शामिल हो रहे हैं। इनमें ब्रिटिश प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम, जापानी प्रधानमंत्री साना ताकाइजी, यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की और वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज शामिल हैं। इन द्विपक्षीय बैठकों में ऊर्जा संकट, सुरक्षा संधियां और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर गहरा विचार-विमर्श होने की संभावना है।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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