अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय पर अमेरिकी शिकंजा: ट्रंप प्रशासन की कड़े वित्तीय प्रतिबंध लगाने की तैयारी, वैश्विक बैंकिंग से अलग-थलग करने की योजना

​​​​संवाद 24 नई दिल्ली।​​​​ संयुक्त राज्य अमेरिका का ट्रंप प्रशासन द हेग स्थित इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (आईसीसी) के विरुद्ध अब तक के सबसे सख्त दंडात्मक प्रतिबंध लगाने की रूपरेखा तैयार कर रहा है। मीडिया रिपोर्टों और आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, इन नए प्रस्तावित प्रतिबंधों का सीधा उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय अदालत के वित्तीय तंत्र को पूरी तरह निष्क्रिय करना और उसे अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग व्यवस्था से लगभग अलग-थलग कर देना है। यदि ये कड़े प्रावधान औपचारिक रूप से लागू होते हैं, तो अदालत के दैनिक कामकाज और वैश्विक वित्तीय लेन-देन पर व्यापक असर पड़ना तय माना जा रहा है।

​​​​​अमेरिकी डॉलर में लेन-देन पर पूर्ण पाबंदी का प्रस्ताव​​​​
​वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट में सामने आए विवरण के मुताबिक, प्रस्तावित प्रतिबंधों को छह से सात महीने की समयसीमा के साथ चरणबद्ध तरीके से प्रभावी किया जा सकता है। इसके अंतर्गत आईसीसी को अमेरिकी डॉलर में किसी भी तरह का वित्तीय लेन-देन करने से पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया जाएगा। हालांकि, अनिवार्य तकनीकी संचालन को ध्यान में रखते हुए बुनियादी दूरसंचार व संचार सेवाओं से संबंधित आवश्यक भुगतानों को इस वित्तीय पाबंदी से अस्थायी राहत प्रदान की जा सकती है। ​अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता ने इस कदम पर विदेश मंत्री मार्को रुबियो के आधिकारिक रुख को दोहराया है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय की हालिया गतिविधियां और न्यायिक आदेश सीधे तौर पर संयुक्त राज्य अमेरिका की राष्ट्रीय संप्रभुता के लिए गंभीर चुनौती हैं। रिपोर्टों के अनुसार, न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के जारी सत्र के दौरान अथवा उसके तत्काल बाद इन प्रतिबंधों की औपचारिक घोषणा की जा सकती है।

​​​​​इजरायली नेताओं के खिलाफ वारंट से उपजा विवाद​​​​
​अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय के मध्य टकराव की वर्तमान पृष्ठभूमि 2024 के घटनाक्रम से जुड़ी है। उस दौरान आईसीसी ने गाजा संघर्ष में कथित युद्ध अपराधों के संदर्भ में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू तथा तत्कालीन रक्षा मंत्री योव गैलेंट के विरुद्ध गिरफ्तारी वारंट जारी किए थे। ​इस आदेश के बाद से ही वाशिंगटन और अदालत के बीच तनाव अपने चरम पर पहुंच गया। अमेरिका और इजरायल दोनों ही स्पष्ट करते आए हैं कि वे ‘रोम संविधि’ (Rome Statute) के हस्ताक्षरकर्ता या आईसीसी के सदस्य देश नहीं हैं। विदेश मंत्री मार्को रुबियो का तर्क है कि अदालत गैर-सदस्य देशों के शीर्ष अधिकारियों व सैन्य कर्मियों पर एकतरफा अधिकार क्षेत्र का दावा करके अपने संवैधानिक दायरे का उल्लंघन कर रही है। अमेरिकी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि अदालत ने गैर-सदस्य देशों के खिलाफ इस प्रकार की कानूनी कार्रवाई जारी रखी, तो अमेरिका इस संस्था के अंतरराष्ट्रीय प्रभाव को शून्य करने के लिए हर आवश्यक कूटनीतिक और आर्थिक कदम उठाएगा।

​​​​​वैश्विक वित्तीय तंत्र और अदालत के संचालन पर प्रभाव​​​​
​यदि प्रस्तावित प्रतिबंध पूरी तरह प्रभाव में आते हैं, तो वैश्विक वित्तीय संस्थानों के लिए आईसीसी से जुड़े किसी भी फंड का प्रबंधन करना अत्यधिक जटिल हो जाएगा। अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग प्रणाली में अमेरिकी डॉलर की केंद्रीय भूमिका होने के कारण वैश्विक बैंक द्वितीयक अमेरिकी प्रतिबंधों के जोखिम से बचने के लिए आईसीसी से जुड़ी सेवाओं को बंद करने के लिए बाध्य हो सकते हैं। इससे अदालत के गवाह सुरक्षा कार्यक्रमों, जांच मिशनों, अंतरराष्ट्रीय वकीलों के मानदेय भुगतान और प्रशासनिक खर्चों के संचालन में गंभीर बाधाएं उत्पन्न हो सकती हैं। ​अमेरिका की इस प्रस्तावित कार्रवाई पर आने वाले दिनों में संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ के सदस्य देशों की ओर से कूटनीतिक प्रतिक्रियाएं आने की संभावना है, क्योंकि यूरोपीय देशों का एक बड़ा वर्ग आईसीसी के प्रमुख वित्तीय और वैधानिक समर्थकों में शामिल है।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *