
संवाद 24 डेस्क। देश में स्कूली शिक्षा की दिशा तय करने वाली राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद यानी NCERT अब उच्च शिक्षा, शिक्षक प्रशिक्षण और शैक्षिक अनुसंधान के क्षेत्र में भी अपनी भूमिका का विस्तार करने की तैयारी में है। संस्थान को पहले ही Institution Deemed to be University का दर्जा मिल चुका है और अब शैक्षणिक सत्र 2027-28 से स्नातक, स्नातकोत्तर और शोध कार्यक्रमों का पहला बैच शुरू करने की तैयारी की जा रही है। इसका उद्देश्य केवल डिग्री कार्यक्रम शुरू करना नहीं, बल्कि स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता, शिक्षक प्रशिक्षण, पाठ्यक्रम और शिक्षण पद्धतियों को अधिक प्रभावी बनाने के लिए शोध आधारित व्यवस्था विकसित करना है।
NCERT के लिए क्यों बड़ा है यह बदलाव?
NCERT की स्थापना 1961 में केंद्र सरकार के एक स्वायत्त संगठन के रूप में हुई थी। इसका मूल कार्य स्कूली शिक्षा में गुणात्मक सुधार के लिए केंद्र और राज्य सरकारों को सलाह देना, शैक्षिक अनुसंधान करना, पाठ्यपुस्तकें और अन्य शैक्षणिक सामग्री तैयार करना तथा शिक्षकों के प्रशिक्षण में सहयोग करना रहा है।
अब डीम्ड विश्वविद्यालय का दर्जा मिलने के बाद NCERT के लिए उच्च शिक्षा और शोध के नए रास्ते खुल गए हैं। शिक्षा मंत्रालय के अनुसार इस दर्जे से NCERT शैक्षिक अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ सहयोग करने तथा शिक्षा क्षेत्र में एक थिंक टैंक और राष्ट्रीय संसाधन संस्थान के रूप में अपनी भूमिका को मजबूत कर सकेगा।
30 मार्च 2026 को मिल चुका है डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा
इस बदलाव को लेकर एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि NCERT को विश्वविद्यालय का दर्जा मिलने की प्रक्रिया अभी प्रस्तावित नहीं है, बल्कि 30 मार्च 2026 को शिक्षा मंत्रालय ने इसे Institution Deemed to be University घोषित कर दिया था। यह घोषणा UGC की सिफारिश के आधार पर UGC Act, 1956 की धारा 3 के तहत की गई।
शिक्षा मंत्रालय के अनुसार NCERT के आवेदन की जांच UGC ने UGC (Institutions Deemed to be Universities) Regulations, 2023 के तहत विशेषज्ञ समिति के माध्यम से की थी। समिति के मूल्यांकन के बाद NCERT को डीम्ड विश्वविद्यालय का दर्जा देने की सिफारिश की गई और मंत्रालय ने इसे स्वीकार करते हुए अधिसूचना जारी की।
2027-28 से किन पाठ्यक्रमों की तैयारी?
अमर उजाला की 19 सितंबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार NCERT शैक्षणिक सत्र 2027-28 से स्नातक और स्नातकोत्तर के साथ पीएचडी कार्यक्रमों में पहला बैच शुरू करने की तैयारी कर रहा है। प्रस्तावित कार्यक्रमों में बीए-बीएड, बीएससी-बीएड और बीकॉम-बीएड जैसे पाठ्यक्रम शामिल हैं। इन पाठ्यक्रमों की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह होगी कि इनका संबंध सीधे स्कूली शिक्षा और शिक्षक तैयार करने की जरूरतों से जोड़ा जाएगा।
यह पहल इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि शिक्षक शिक्षा और स्कूली पाठ्यक्रम के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता लंबे समय से शिक्षा व्यवस्था का अहम मुद्दा रही है। NCERT की अपनी स्कूली शिक्षा संबंधी विशेषज्ञता को शिक्षक प्रशिक्षण से जोड़ने पर भावी शिक्षकों को स्कूलों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप तैयार करने की कोशिश की जा सकती है।
शिक्षकों की पढ़ाई में क्या बदलाव देखने को मिल सकता है?
रिपोर्ट के अनुसार प्रस्तावित कार्यक्रमों में केवल पारंपरिक विषय ज्ञान पर जोर नहीं होगा। शिक्षकों की गुणवत्ता, पढ़ाने के नए तरीके, खेल-आधारित शिक्षण, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल और तकनीक के माध्यम से पढ़ाई को आसान बनाने जैसे पहलुओं को पाठ्यक्रम में शामिल करने पर जोर रहेगा।
यह दिशा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में शिक्षा और तकनीक के बढ़ते उपयोग पर दिए गए जोर से भी जुड़ती है। NCERT की केंद्रीय इकाई CIET पहले से शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया में तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए ऑनलाइन प्रशिक्षण और अन्य गतिविधियां संचालित करती है।
स्कूलों की वास्तविक स्थिति ने बढ़ाई चिंता
NCERT के विस्तार की पृष्ठभूमि में स्कूली विद्यार्थियों की बुनियादी दक्षताओं का मुद्दा भी महत्वपूर्ण है। अमर उजाला की रिपोर्ट में NCERT द्वारा कक्षा 3, 6 और 9 के विद्यार्थियों की भाषा, गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान में दक्षताओं के आकलन का उल्लेख है। रिपोर्ट के अनुसार आकलन में कुछ बुनियादी गणितीय क्षमताओं को लेकर विद्यार्थियों के प्रदर्शन में कमी सामने आई।
इस तरह के आकलन का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि केवल नई किताबें तैयार कर देने से शिक्षा की गुणवत्ता में व्यापक सुधार नहीं आता। पाठ्यक्रम, शिक्षक प्रशिक्षण, कक्षा में पढ़ाने का तरीका, विद्यार्थियों की सीखने की गति और उपलब्ध शैक्षणिक संसाधन—इन सभी का आपस में संबंध है।
रीजनल सेंटर भी बनेंगे नए शैक्षणिक केंद्र
NCERT के विस्तार की योजना में उसके क्षेत्रीय संस्थानों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी। रिपोर्ट के अनुसार अजमेर, भोपाल, भुवनेश्वर, मैसूर और शिलांग स्थित क्षेत्रीय केंद्रों के साथ भोपाल स्थित पंडित सुंदरलाल शर्मा व्यावसायिक शिक्षा संस्थान को कॉलेजों के रूप में विकसित करने की तैयारी है।
फिलहाल इन केंद्रों में संबंधित स्थानीय विश्वविद्यालयों से जुड़ी डिग्री और पीएचडी कार्यक्रम संचालित होते हैं। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत 2027 से NCERT के अपने डिग्री कार्यक्रम शुरू होने की तैयारी है। पहले से पंजीकृत विद्यार्थियों को संबंधित विश्वविद्यालयों के माध्यम से डिग्री दिए जाने की बात रिपोर्ट में कही गई है।
डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा वास्तव में क्या बदलता है?
UGC के अनुसार Institution Deemed to be University वह उच्च शिक्षा संस्थान या संस्थानों का समूह है जो किसी विशेष क्षेत्र में उच्च स्तर का काम करता है और जिसे केंद्र सरकार, UGC की सलाह पर, UGC Act की धारा 3 के तहत यह दर्जा देती है। ऐसे संस्थानों को विश्वविद्यालय जैसी अकादमिक स्थिति और कुछ विशेषाधिकार प्राप्त होते हैं। वे अपने विशेष क्षेत्र के अनुरूप पाठ्यक्रम और शैक्षणिक कार्यक्रम विकसित कर सकते हैं।
NCERT के मामले में यह दर्जा विशेष रूप से इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि संस्थान का मूल अनुभव स्कूली शिक्षा और शिक्षक प्रशिक्षण से जुड़ा है। अब वह इसी विशेषज्ञता को उच्च शिक्षा और शोध कार्यक्रमों में विस्तार देने की स्थिति में होगा।
पाठ्यक्रमों की समीक्षा पर भी रहेगा जोर
प्रस्तावित विस्तार का एक प्रमुख पहलू स्कूल शिक्षा और शिक्षक शिक्षा के बीच तालमेल है। रिपोर्ट के अनुसार NCERT, शिक्षक शिक्षा से जुड़े पाठ्यक्रमों की समीक्षा के लिए राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद यानी NCTE के साथ मिलकर काम करने की तैयारी कर रहा है।
इसका उद्देश्य यह समझना होगा कि शिक्षक तैयार करने वाले मौजूदा कार्यक्रमों में स्कूलों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप किस तरह बदलाव किए जा सकते हैं। यदि शिक्षक प्रशिक्षण को स्कूली पाठ्यक्रम, नई शिक्षण तकनीक और विद्यार्थियों की वास्तविक सीखने की जरूरतों से जोड़ा जाता है, तो इसका प्रभाव भविष्य में कक्षा-कक्ष की शिक्षण प्रक्रिया पर पड़ सकता है।
AI और तकनीक बनेगी शिक्षक शिक्षा का हिस्सा
शिक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। NCERT की CIET इकाई पहले से तकनीक आधारित प्रशिक्षण और डिजिटल शिक्षण सामग्री के क्षेत्र में काम कर रही है।
नई व्यवस्था में शिक्षकों को केवल डिजिटल उपकरण चलाने की जानकारी देना पर्याप्त नहीं होगा। चुनौती यह होगी कि तकनीक का उपयोग विद्यार्थियों की समझ, व्यक्तिगत सीखने की जरूरत और कक्षा के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए किस तरह किया जाए। इसी दिशा में AI आधारित शिक्षण उपकरण, डिजिटल सामग्री और तकनीक-सक्षम मूल्यांकन भविष्य में शिक्षक प्रशिक्षण का हिस्सा बन सकते हैं।
NCERT की भूमिका अब कितनी व्यापक हो सकती है?
NCERT की पारंपरिक भूमिका मुख्यतः स्कूल शिक्षा तक रही है। वह पाठ्यक्रम और पाठ्यपुस्तक विकास, शैक्षिक अनुसंधान, शिक्षक प्रशिक्षण और शिक्षा संबंधी तकनीकी सहयोग जैसे क्षेत्रों में काम करता है।
डीम्ड विश्वविद्यालय के रूप में उसका विस्तार इस भूमिका को उच्च शिक्षा और शोध तक ले जाएगा। मंत्रालय ने भी कहा है कि नए दर्जे से NCERT की शैक्षिक अनुसंधान, नवाचार और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय सहयोग की क्षमता मजबूत होगी।
हालांकि वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि नए पाठ्यक्रम कितने गुणवत्तापूर्ण होते हैं, शोध कार्यक्रमों में किस तरह की विशेषज्ञता विकसित होती है और इन कार्यक्रमों से तैयार होने वाले शिक्षक स्कूलों में किस तरह का बदलाव ला पाते हैं।
विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए क्या मायने?
2027-28 से प्रस्तावित नए कार्यक्रमों से शिक्षा के क्षेत्र में करियर बनाने वाले विद्यार्थियों के लिए नए विकल्प खुल सकते हैं। खासतौर पर शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए NCERT के विशेषज्ञता-आधारित कार्यक्रम आकर्षण का केंद्र बन सकते हैं।
वहीं शिक्षा क्षेत्र के लिए इसका महत्व इससे आगे है। यदि NCERT के उच्च शिक्षा कार्यक्रम स्कूलों की वास्तविक समस्याओं पर शोध करते हैं और उस शोध का उपयोग शिक्षक प्रशिक्षण तथा पाठ्यक्रम सुधार में किया जाता है, तो संस्थान की नई भूमिका स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता से सीधे जुड़ सकती है।
NCERT का डीम्ड-टू-बी यूनिवर्सिटी के रूप में विस्तार भारतीय शिक्षा व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण संस्थागत बदलाव है। दर्जा 30 मार्च 2026 को मिल चुका है और 2027-28 से स्नातक, स्नातकोत्तर तथा शोध कार्यक्रम शुरू करने की तैयारी है।
प्रस्तावित बीए-बीएड, बीएससी-बीएड और बीकॉम-बीएड जैसे कार्यक्रमों के जरिए शिक्षक शिक्षा को स्कूल पाठ्यक्रम और आधुनिक शिक्षण जरूरतों से जोड़ने की कोशिश की जाएगी। AI, तकनीक आधारित शिक्षा, खेल-आधारित शिक्षण और शैक्षिक अनुसंधान पर जोर इस बदलाव को व्यापक रूप देता है।
अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल इसके क्रियान्वयन का है। नए दर्जे और नए पाठ्यक्रम तभी सार्थक होंगे जब उनका लाभ शोध, शिक्षक प्रशिक्षण और अंततः कक्षा में विद्यार्थियों की सीखने की गुणवत्ता तक पहुंचे। NCERT की नई विश्वविद्यालयी भूमिका इसी कसौटी पर भारतीय स्कूली शिक्षा के लिए अपना वास्तविक प्रभाव दिखाएगी।






