
कन्नौज। जिला अस्पताल में प्रसव के दौरान एक गर्भवती महिला की बच्चेदानी फटने का मामला सामने आया है। ऑपरेशन के दौरान नवजात बच्ची को नहीं बचाया जा सका, जबकि महिला की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे बेहतर उपचार के लिए कानपुर रेफर किया गया। परिजनों ने अस्पताल की स्टाफ नर्स पर डॉक्टर की अनुपस्थिति में सामान्य प्रसव कराने का प्रयास करने का आरोप लगाया है। मामले में अस्पताल स्तर पर जांच के बाद ही किसी कर्मचारी की जिम्मेदारी स्पष्ट हो सकेगी। घटना की स्वतंत्र पुष्टि के लिए उपलब्ध स्थानीय रिपोर्टों में भी यही मुख्य तथ्य सामने आए हैं।
11 सितंबर को ऑपरेशन की तारीख दिए जाने का परिजनों का दावा
सरायमीरा क्षेत्र के डाक बंगला रोड निवासी राकेश सैनी की बेटी श्वेता नौ महीने की गर्भवती थीं। परिजनों के मुताबिक, उनका उपचार जिला अस्पताल की चिकित्सक डॉ. मनप्रीत कौर की देखरेख में चल रहा था। परिवार का कहना है कि चिकित्सक ने सामान्य प्रसव में संभावित परेशानी को देखते हुए ऑपरेशन की सलाह दी थी और इसके लिए 11 सितंबर की तारीख बताई गई थी।परिजनों के अनुसार, प्रसव पीड़ा शुरू होने पर शुक्रवार सुबह करीब छह बजे श्वेता को जिला अस्पताल लाया गया, जहां उन्हें भर्ती कर लिया गया।
डॉक्टर की गैरमौजूदगी में सामान्य प्रसव कराने का आरोप
परिजनों का आरोप है कि महिला को भर्ती किए जाने के समय संबंधित डॉक्टर मौके पर मौजूद नहीं थीं। उनका दावा है कि ड्यूटी पर मौजूद स्टाफ नर्स ने सामान्य प्रसव कराने का प्रयास शुरू किया और इसके लिए इंजेक्शन भी दिया गया।परिवार का कहना है कि उन्होंने नर्स को पहले से ऑपरेशन की सलाह और निर्धारित तारीख के बारे में बताया था। इसके बावजूद सामान्य प्रसव का प्रयास किए जाने का आरोप लगाया गया है। उपलब्ध स्थानीय रिपोर्ट में भी परिजनों के इन्हीं आरोपों का उल्लेख है।
अचानक बिगड़ी हालत, ऑपरेशन के दौरान नहीं बच सकी नवजात
परिजनों के मुताबिक, प्रसव कराने के प्रयास के दौरान श्वेता की हालत अचानक गंभीर हो गई। इसी दौरान उनकी बच्चेदानी फटने की बात सामने आई। करीब साढ़े आठ बजे डॉक्टर मनप्रीत कौर के अस्पताल पहुंचने के बाद स्थिति को संभाला गया और महिला का तत्काल ऑपरेशन किया गया।
गंभीर हालत में कानपुर किया गया रेफर
ऑपरेशन के बाद श्वेता की हालत गंभीर बनी रही। चिकित्सकों ने बेहतर उपचार के लिए उन्हें कानपुर रेफर कर दिया। परिजनों के अनुसार, बाद में कानपुर के हैलट अस्पताल में उपचार के दौरान उनकी हालत में कुछ सुधार की जानकारी मिली।इस घटना के बाद परिवार में नवजात बच्ची की मौत से मातम है, वहीं श्वेता के स्वास्थ्य और भविष्य को लेकर परिजन चिंतित हैं।
भावुक पिता ने पूछा—“क्या मेरी बेटी फिर मां बन पाएगी?”
बेटी की हालत गंभीर होने और बच्चेदानी फटने की जानकारी मिलने के बाद श्वेता के पिता राकेश सैनी ने चिकित्सक से अपनी बेटी के भविष्य को लेकर चिंता जताई। परिजनों के अनुसार, उन्होंने भावुक होकर पूछा कि क्या उनकी बेटी भविष्य में दोबारा मां बन सकेगी।परिवार के मुताबिक, डॉक्टर ने बताया कि ऑपरेशन के दौरान बच्चेदानी को सिल दिया गया है और उसे पूरी तरह मजबूत होने में समय लगेगा।
अब सबसे बड़ा सवाल—किसकी थी जिम्मेदारी?
घटना के बाद अस्पताल की कार्यप्रणाली और प्रसव के दौरान अपनाई गई चिकित्सा प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं। परिजनों का मुख्य आरोप है कि जब पहले से ऑपरेशन की सलाह दी गई थी तो डॉक्टर की अनुपस्थिति में सामान्य प्रसव कराने का प्रयास क्यों किया गया।
अस्पताल की व्यवस्था भी जांच के घेरे में
कन्नौज जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट पर सरायमीरा स्थित जिला अस्पताल को जिले के सरकारी अस्पताल के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। वहीं, इस वर्ष फरवरी में प्रकाशित एक रिपोर्ट में जिला अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों के कई पद रिक्त होने की बात सामने आई थी, जिससे अस्पताल की मानव संसाधन व्यवस्था पर भी सवाल उठे थे।






