
संवाद 24 नई दिल्ली। भारत दौरे पर आए ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने राजधानी नई दिल्ली में आयोजित एक सभा को संबोधित करते हुए अमेरिका और इजरायल की नीतियों पर कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ईरान किसी भी देश की धौंस या आक्रामक रुख के आगे घुटने नहीं टेकेगा और अपने राष्ट्रीय हितों व संप्रभुता की रक्षा के लिए पूरी दृढ़ता से खड़ा रहेगा। नई दिल्ली में धार्मिक नेताओं, शिक्षाविदों, बुद्धिजीवियों और व्यापारिक प्रतिनिधियों की मौजूदगी वाले इस कार्यक्रम में ईरानी राष्ट्रपति ने क्षेत्र को लेकर तेहरान का दृष्टिकोण रखा। राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने सभा को संबोधित करते हुए शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और क्षेत्रीय स्थिरता के प्रति ईरान की प्रतिबद्धता दोहराई। इसके साथ ही उन्होंने उन विदेशी ताकतों पर निशाना साधा जो ईरानी समाज के भीतर विभाजन और आंतरिक अस्थिरता पैदा करने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने दो टूक कहा कि ईरानी जनता इन साजिशों को सफल नहीं होने देगी।
‘जुल्म के आगे झुकने का सवाल ही नहीं’
मसूद पेजेश्कियान ने कहा कि ईरान किसी भी प्रकार के अन्याय या अनुचित दबाव के सामने नहीं झुकेगा। उन्होंने कहा, “ईरान अमेरिका और इजरायल के अनुचित दबाव का डटकर मुकाबला कर रहा है क्योंकि हम किसी की दादागीरी स्वीकार नहीं करते। यदि वे ईरान पर अनावश्यक दबाव बनाने का प्रयास करेंगे, तो उन्हें उसी तरह कड़ा और स्पष्ट जवाब दिया जाएगा।” उन्होंने स्पष्ट किया कि दबाव की कूटनीति से ईरान को झुकाया नहीं जा सकता।
आम नागरिकों को निशाना बनाने पर उठाया सवाल
ईरानी राष्ट्रपति ने अमेरिका और इजरायल के सैन्य कदमों की तीखी आलोचना की और उनकी सेनाओं को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि सैन्य कार्रवाइयों में नागरिकों और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। अपने वक्तव्य में उन्होंने दक्षिणी ईरान के एक प्राथमिक स्कूल के समीप हुए अमेरिकी हमले का उदाहरण दिया, जिसमें 168 मासूम बच्चों की मौत हो गई थी।
पेजेश्कियान ने कहा, “अस्पतालों, बुनियादी ढांचे और आम लोगों की आजीविका को निशाना बनाने के बजाय विरोधी ताकतों को सीधे सैनिकों से मुकाबला करना चाहिए।” उन्होंने आगे कहा कि प्रतिबंधों और आवश्यक वस्तुओं की किल्लत के जरिए ईरानी नागरिकों का मनोबल तोड़ा जा सकता है, ऐसा सोचना पश्चिमी ताकतों की भारी गलतफहमी है। ईरानी जनता किसी भी कठिनाई के बावजूद अपने संकल्प से पीछे हटने वाली नहीं है।
‘नीतियों का यह रास्ता तबाही की ओर ले जाता है’
अपने संबोधन के दौरान राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने पश्चिमी देशों और इजरायल की आक्रामकता की तुलना एक बेलगाम जंगली घोड़े की सवारी से की। उन्होंने कहा कि बिना सोचे-समझे उठाया गया कदम और अनियंत्रित नीतियां अंततः विनाश और तबाही के रास्ते पर ही ले जाती हैं।
वैश्विक भाईचारे और परस्पर सहयोग पर बात करते हुए ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि दुनिया में विविधता प्राकृतिक है। उन्होंने उल्लेख किया कि ईश्वर ने भारतीयों, ईरानियों, चीनियों और अन्य सभी समुदायों को बनाया है ताकि वे आपस में मिल-जुलकर रहें और शांतिपूर्ण संवाद के जरिए आगे बढ़ें, न कि एक-दूसरे पर वर्चस्व थोपने की कोशिश करें। नई दिल्ली के मंच से दिया गया उनका यह भाषण पूरी तरह संप्रभुता के सम्मान, कड़े प्रतिरोध और आपसी संवाद पर केंद्रित रहा।






