
संवाद 24 नई दिल्ली। मध्य पूर्व की कूटनीति और व्यापारिक संबंधों में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। ब्रिटेन, फ्रांस और कनाडा ने वेस्ट बैंक स्थित विवादित इजरायली बस्तियों, कृषि फार्मों और औद्योगिक इकाइयों में तैयार होने वाले उत्पादों के आयात पर आधिकारिक रोक लगा दी है। तीनों देशों ने स्पष्ट किया है कि वेस्ट बैंक में इजरायल की लगातार बढ़ती बस्तियों और विस्तारवादी नीतियों के कारण ‘टू-स्टेट सॉल्यूशन’ (दो-राष्ट्र सिद्धांत) को गंभीर खतरा पैदा हो रहा है। इस व्यापारिक फैसले को विश्व के 12 अन्य देशों ने भी अपना खुला समर्थन दिया है, जिससे वैश्विक स्तर पर इजरायल के नीतिगत कदमों पर कूटनीतिक दबाव बढ़ गया है।
व्यापारिक रोक का आधार और अंतरराष्ट्रीय स्थिति
फलस्तीनी बहुल वेस्ट बैंक पर इजरायल के कब्जे को अंतरराष्ट्रीय समुदाय और संयुक्त राष्ट्र द्वारा कानूनी मान्यता प्राप्त नहीं है। इसके बावजूद इजरायल इन क्षेत्रों में नई बस्तियों का विस्तार करता रहा है। इन बस्तियों के भीतर स्थापित खेतों, वाइनरी और कारखानों में निर्मित कई प्रकार की वस्तुएं अब तक यूरोपीय और अन्य पश्चिमी देशों को निर्यात की जाती थीं।
ब्रिटेन, फ्रांस और कनाडा ने इन्हीं बस्तियों से आने वाले उत्पादों के आयात पर सीधे तौर पर प्रतिबंध लगाया है। कूटनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, आर्थिक पैमाने पर यह रोक इजरायल की समग्र अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका न भी दे, परंतु इसका राजनीतिक और नीतिगत प्रभाव अत्यधिक गहरा है। यह पश्चिमी शक्तियों की ओर से एक स्पष्ट संकेत है कि केवल औपचारिक बयानों से आगे बढ़कर अब व्यावहारिक आर्थिक प्रतिबंध लागू किए जा रहे हैं।
पश्चिमी देशों का आधिकारिक रुख और तर्क
इस व्यापारिक फैसले के पीछे ब्रिटेन के विदेश मंत्री एड मिलिबैंड ने कड़ा रुख स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन लंबे समय तक अन्याय और शोषण के विरुद्ध केवल बयानों तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि उसे जमीनी स्तर पर रोकने के लिए ठोस प्रयास करने होंगे। उन्होंने रेखांकित किया कि वेस्ट बैंक में बस्तियों का अनियंत्रित विस्तार स्वतंत्र फलस्तीनी राष्ट्र के निर्माण की दिशा में सबसे बड़ी बाधा बन चुका है।
कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद ने भी इस कदम की पुष्टि करते हुए कहा कि एक संप्रभु और स्वतंत्र फलस्तीन राष्ट्र का अस्तित्व इस पूरे क्षेत्र में स्थायी शांति और फलस्तीनी नागरिकों के साथ न्याय के लिए अनिवार्य है। उन्होंने इसे क्षेत्र और इजरायल दोनों की दीर्घकालिक स्थिरता से जुड़ा विषय बताया।
वहीं, फ्रांस के विदेश मंत्रालय का कहना है कि वेस्ट बैंक के इजरायली सेटलरों द्वारा बनाए गए उत्पादों की खरीद से स्थानीय स्तर पर तनाव और हिंसा बढ़ने की आशंका बनी रहती है, इसलिए वहां की वस्तुओं के आयात को रोका जाना जरूरी था। कई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में यह उल्लेख आया है कि स्थानीय प्रशासन की ओर से उन सेटलरों को लगातार प्रोत्साहन और संरक्षण मिल रहा है, जो स्थानीय फलस्तीनियों की जमीनों पर कब्जे कर कृषि या उत्पादन का कार्य कर रहे हैं।
इजरायल और अमेरिका की तीखी प्रतिक्रिया
इस व्यापारिक पाबंदी के सामने आते ही इजरायल और अमेरिका ने इसका कड़ा विरोध दर्ज कराया है। इजरायल में अमेरिका के राजदूत ने इस प्रतिबंध की निंदा करते हुए इसे एकतरफा और शांति प्रयासों के प्रतिकूल बताया है।
दूसरी ओर, इजरायल सरकार ने इसके विरोध में तत्काल कूटनीतिक कार्रवाई की है। तेल अवीव ने पूर्वी यरुशलम स्थित ब्रिटिश वाणिज्य दूतावास (कांसुलेट) को बंद करने का आदेश जारी कर दिया है। इसके साथ ही इजरायल ने घोषणा की है कि वह गाजा शांति और पुनर्निर्माण से जुड़ी योजनाओं में ब्रिटेन को भागीदार नहीं बनाएगा।
वैश्विक मंच पर गहराता कूटनीतिक तनाव
ब्रिटेन, फ्रांस और कनाडा का यह संयुक्त कदम और 12 अन्य राष्ट्रों का समर्थन इस बात का प्रमाण है कि इजरायल की बस्तियों से जुड़े व्यापार पर पश्चिमी जगत की नीति में बड़ा बदलाव आ रहा है। यह फैसला आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मध्य पूर्व संकट और दो-राष्ट्र समाधान को लेकर नए कूटनीतिक तनाव को जन्म दे सकता है।






