
संवाद 24 नई दिल्ली। नेपाल के रसुवा जिले में तिब्बत सीमा के पास अचानक आई विनाशकारी बाढ़ (फ्लैश फ्लड) से भारी तबाही हुई है। इस प्राकृतिक आपदा में चीन में 3 लोगों सहित लगभग 160 लोगों की मौत हो चुकी है। हादसे में 133 भारतीय पर्यटकों और 37 एनआरआई सहित करीब 750 लोग लापता हैं। लापता भारतीयों में अधिकांश कैलाश-मानसरोवर यात्रा पर गए तीर्थयात्री हैं।
भूकंप और ग्लेशियर टूटने से आई बाढ़
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने संसद को बताया कि स्थानीय समयानुसार सुबह 8:37 बजे तिब्बत इलाके में भूकंप आया, जिसके तीन मिनट बाद अचानक बाढ़ आने की सूचना मिली। जर्मन रिसर्च सेंटर फॉर जियोसाइंसेज (GFZ) के अनुसार, बाढ़ से लगभग सात मिनट पहले 4.4 तीव्रता का भूकंप आया था। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) तथा प्लैनेट लैब्स की सैटेलाइट तस्वीरों के अध्ययन के मुताबिक, लेंडे नदी में बर्फ और चट्टानों के खिसकने से भारी मलबे वाली बाढ़ आई, जिससे भोटेकोशी और त्रिशूली नदियां उफान पर आ गईं।
बड़े पैमाने पर नुकसान
बाढ़ से तिब्बत सीमा से लगे नेपाल के रसुवा और धादिंग जिले सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। इसके अलावा नुवाकोट, चितवन, गोरखा, तनहुं और नवलपरासी जिलों में भी नुकसान पहुंचा है। पानी के तेज बहाव में एक दर्जन जलविद्युत परियोजनाएं क्षतिग्रस्त हो गईं तथा कई बहुमंजिला इमारतें, पुल, दुकानें और वाहन बह गए।
राहत-बचाव कार्य और हेल्पलाइन
1- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से बात कर संवेदना व्यक्त की और हर संभव मानवीय सहायता का आश्वासन दिया।
2- भारतीय वायुसेना के विमानों से राहत सामग्री भेजी जा रही है और एनडीआरएफ की 20 टीमें तैनात की गई हैं।
3- भारतीय दूतावास (चीन) ने तिब्बत-नेपाल सीमा पर फंसे भारतीयों के लिए हेल्पलाइन जारी की है।
4- उत्तर प्रदेश सरकार ने 1070 हेल्पलाइन सक्रिय की है तथा महाराष्ट्र सरकार ने पर्यटकों की जानकारी जुटाने के लिए डेटा लिंक शुरू किया है।
उत्तर प्रदेश और बिहार में अलर्ट
नेपाल में भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों के उफान के बाद उत्तर प्रदेश और बिहार के कई सीमावर्ती जिलों में बाढ़ की आशंका को देखते हुए अलर्ट जारी कर दिया गया है।






