बारिश में गोवंश आश्रय स्थलों पर प्रशासन की सख्ती, चारा-भूसा से लेकर CCTV तक की होगी निगरानी

कन्नौज। बारिश के मौसम में गोवंश आश्रय स्थलों की व्यवस्थाओं को लेकर कन्नौज जिला प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है। जिलाधिकारी आशुतोष मोहन अग्निहोत्री ने गोवंशों को बारिश से बचाने के साथ-साथ पर्याप्त हरा चारा, भूसा, स्वच्छता और बेहतर रख-रखाव सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। निर्देशों के अनुपालन में पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने अलग-अलग क्षेत्रों में आश्रय स्थलों का निरीक्षण शुरू कर दिया है। हालिया रिपोर्टों में भी प्रशासन द्वारा बरसात के दौरान आश्रय स्थलों की व्यवस्थाओं के स्थलीय सत्यापन पर जोर दिए जाने की पुष्टि होती है।

बारिश में कोई कमी न रह जाए, अधिकारियों को सौंपी गई जिम्मेदारी

जिलाधिकारी ने मुख्य पशुचिकित्साधिकारी को निर्देशित किया है कि सभी उप मुख्य पशुचिकित्साधिकारी और पशुचिकित्साधिकारी अपने-अपने क्षेत्र में कम से कम एक अस्थायी गोवंश आश्रय स्थल का निरीक्षण करें। निरीक्षण के दौरान बारिश से बचाव के इंतजाम, हरे चारे की उपलब्धता, भूसे का भंडारण, स्वच्छता और गोवंशों के रख-रखाव की स्थिति की जांच करने को कहा गया है।प्रशासन का जोर केवल कागजी निरीक्षण पर नहीं, बल्कि मौके पर व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति देखने पर है। किसी भी स्तर पर कमी मिलने पर उसे तत्काल दूर कराने के निर्देश दिए गए हैं।

CCTV से होगी गोशालाओं की लाइव निगरानी

गोवंश आश्रय स्थलों की निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रशासन ने एक और महत्वपूर्ण कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। जिले के सभी गोवंश आश्रय स्थलों में CCTV कैमरे लगाने और उनका एक्सेस जिला स्तरीय कमांड सेंटर से जोड़ने की योजना है। इससे आश्रय स्थलों की गतिविधियों पर दूर से निगरानी रखी जा सकेगी और व्यवस्थाओं में पारदर्शिता बढ़ाने में मदद मिलेगी। कन्नौज में पहले भी गो-आश्रय स्थलों पर CCTV लगाने का अभियान चलाया जा चुका है।

चौराचांदपुर आश्रय स्थल का भी किया गया निरीक्षण

निर्देशों के क्रम में मुख्य पशुचिकित्साधिकारी ने विकासखंड कन्नौज के चौराचांदपुर स्थित गोवंश आश्रय स्थल का निरीक्षण किया। इसी तरह जिले के अन्य विकासखंडों में भी संबंधित पशुचिकित्सा अधिकारियों ने आश्रय स्थलों का दौरा कर बारिश से बचाव, चारे और भूसे समेत मूलभूत व्यवस्थाओं का जायजा लिया।

पहले भी सामने आती रही हैं व्यवस्थाओं से जुड़ी चुनौतियां

गोवंश आश्रय स्थलों की व्यवस्थाओं को लेकर प्रशासन की सख्ती ऐसे समय में सामने आई है, जब जिले में पहले भी चारा, पानी, स्वच्छता और अन्य संसाधनों से जुड़ी चुनौतियों की खबरें प्रकाशित होती रही हैं। दिसंबर 2025 में एक निरीक्षण के दौरान कुछ गोशालाओं में हरे चारे की कमी सामने आने की रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी। वहीं, जनवरी 2026 में शीतलहर के दौरान भी प्रशासन ने गोवंशों के लिए तिरपाल, अलाव और पोषण की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे।

लापरवाही मिली तो कार्रवाई के संकेत

जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि गोवंशों के संरक्षण और देखभाल में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आश्रय स्थलों में पर्याप्त चारा-भूसा, बारिश से बचाव, स्वच्छता और रख-रखाव की व्यवस्था लगातार बनी रहनी चाहिए। अब अधिकारियों के निरीक्षण और CCTV निगरानी के जरिए यह देखा जाएगा कि मौके पर जारी निर्देशों का कितना प्रभावी अनुपालन हो रहा है।कन्नौज में गोवंश संरक्षण को लेकर प्रशासन की यह कवायद ऐसे समय में महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जब मानसून के दौरान जलभराव, कीचड़ और लगातार बारिश से खुले अथवा अस्थायी आश्रय स्थलों में पशुओं की देखभाल चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

Shivpratap Singh
Shivpratap Singh

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