तिर्वा के इनायतपुर में सहकारी समिति भवन के निर्माण पर सवाल, जेई ने रुकवाया काम; दो फीट कम मिली नींव

कन्नौज। तिर्वा तहसील क्षेत्र के इनायतपुर गांव में लाखों रुपये की लागत से निर्माणाधीन सहकारी समिति भवन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। ग्रामीणों ने निर्माण कार्य में मानकों की अनदेखी और कथित तौर पर घटिया सामग्री के इस्तेमाल का आरोप लगाया है। शिकायत सामने आने के बाद विभागीय जूनियर इंजीनियर (जेई) मौके पर पहुंचे और निर्माण कार्य की जांच की। प्रारंभिक जांच में निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं मिलने पर काम रुकवा दिया गया।

विधायक निधि से स्वीकृत हुआ था करीब 25 लाख का प्रोजेक्ट

जानकारी के मुताबिक, इनायतपुर गांव में बनने वाली सहकारी समिति के भवन के लिए 24 लाख 99 हजार रुपये की लागत स्वीकृत की गई थी। बताया गया है कि परियोजना को विधायक निधि से मंजूरी मिली थी। भाजपा नेता उदयनारायण त्रिपाठी की ओर से इस परियोजना को लेकर मंत्री असीम अरुण से स्वीकृति दिलाए जाने की बात सामने आई है। निर्माण कार्य कानपुर के एक ठेकेदार द्वारा शुरू कराया गया था।

ग्रामीणों ने उठाए निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल

निर्माण कार्य के दौरान ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि भवन की नींव और पिलरों में निर्धारित मानकों के अनुरूप सामग्री एवं संरचनात्मक मापदंडों का पालन नहीं किया जा रहा था। ग्रामीणों के अनुसार लोहे के पिलरों की गहराई कम रखी जा रही थी और उनमें इस्तेमाल की जा रही सरिया की मोटाई को लेकर भी सवाल उठे।ग्रामीणों का यह भी आरोप था कि सीमेंट के पिलरों और नींव के नीचे ईंट की रोड़ी का पर्याप्त इस्तेमाल नहीं किया जा रहा था। पिलर में डाली जा रही लोहे की रिंग की दूरी भी मानक के अनुरूप नहीं होने की बात कही गई। इन आरोपों के बाद गांव के लोगों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच कराने की मांग की।

ग्रामीणों के विरोध के बाद बढ़ा मामला

निर्माण स्थल पर मौजूद ग्रामीणों ने जब कथित कमियां देखीं तो उन्होंने काम पर आपत्ति जताई। ग्रामीणों के मुताबिक, उन्होंने ठेकेदार से मानक के अनुरूप निर्माण कराने और काम रोकने को कहा। आरोप है कि इस दौरान ठेकेदार की ओर से ग्रामीणों को जिलाधिकारी से शिकायत करने की बात कहकर कथित रूप से धमकाया गया।इसके बाद ग्रामीणों ने निर्माण की स्थिति की जानकारी विभागीय जेई कमल बाबू को दी। शिकायत मिलने के बाद जेई ने मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य का निरीक्षण करने का निर्णय लिया।

जेई ने मजदूरों से खुदवाई नींव, सामने आई दो फीट की कमी

रविवार दोपहर सूचना मिलने पर जेई कमल बाबू निर्माण स्थल पर पहुंचे। उन्होंने मौके पर नाप-तौल कराई और निर्माणाधीन पिलर की स्थिति की जांच की। निरीक्षण के दौरान पिलर की नींव की वास्तविक गहराई जांचने के लिए मजदूरों से खुदाई कराई गई।जांच के दौरान कथित तौर पर नींव की गहराई निर्धारित मानक से करीब दो फीट कम मिली। इसके साथ ही सरिया की मोटाई और निर्माण में इस्तेमाल सामग्री को लेकर भी सवाल सामने आए। निरीक्षण के बाद जेई ने तत्काल निर्माण कार्य रुकवा दिया।

ठेकेदार को गुणवत्तापूर्ण निर्माण के निर्देश

जेई कमल बाबू ने ठेकेदार को कथित गुणवत्ताहीन निर्माण को हटाने और निर्धारित मानकों के अनुसार दोबारा गुणवत्तापूर्ण निर्माण कराने के निर्देश दिए। इससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर उठे सवालों के बीच विभागीय स्तर पर जांच की स्थिति स्पष्ट हुई है।भाजपा नेता उदयनारायण त्रिपाठी ने भी कहा कि किसी भी स्थिति में भ्रष्टाचार अथवा घटिया निर्माण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकारी धन से होने वाले निर्माण में गुणवत्ता से समझौता नहीं होना चाहिए और यदि निर्माण मानकों के विपरीत पाया जाता है तो उसे हटाकर मानक के अनुरूप कराया जाना चाहिए।

सरकारी धन से निर्माण, गुणवत्ता पर निगरानी जरूरी

करीब 25 लाख रुपये की लागत से बनने वाले इस भवन को लेकर सामने आए विवाद ने सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। खास तौर पर तब, जब परियोजना का पैसा सार्वजनिक निधि से स्वीकृत हुआ हो। ऐसे में निर्माण सामग्री, नींव की गहराई, सरिया की मोटाई और अन्य तकनीकी मानकों की जांच महत्वपूर्ण हो जाती है।कन्नौज में सहकारी समितियों के भवन निर्माण को लेकर गुणवत्ता संबंधी सवाल पहले भी सामने आ चुके हैं। मई 2026 में छिबरामऊ में 33 लाख रुपये की लागत से बन रहे सहकारी समिति भवन के निर्माण में भी खराब सामग्री और नींव से जुड़े मानकों के पालन पर शिकायत दर्ज हुई थी।

अब जांच के बाद तय होगा जिम्मेदार कौन

इनायतपुर प्रकरण में जेई द्वारा मौके पर निर्माण कार्य रुकवाए जाने के बाद अब निगाहें आगे की तकनीकी जांच और विभागीय कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि जांच में निर्माण कार्य वास्तव में स्वीकृत मानकों के विपरीत पाया जाता है तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई और मानकविहीन निर्माण को हटाकर दोबारा निर्माण कराने की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।फिलहाल, ग्रामीणों की शिकायत और मौके पर हुई जांच के आधार पर निर्माण कार्य रोका गया है। मामले में अंतिम स्थिति विभागीय जांच और तकनीकी रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगी।

Shivpratap Singh
Shivpratap Singh

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