पांचाल घाट में उमड़ा शिवभक्तों का जनसैलाब, पक्के घाट से गंगा पुल तक दिखी कांवड़ियों की कतारें

संवाद 24 फर्रुखाबाद। सावन के तीसरे सोमवार और नागपंचमी के विशेष संयोग पर फर्रुखाबाद का पांचाल घाट सोमवार को आस्था के विशाल केंद्र में बदल गया। रविवार रात से सोमवार सुबह तक करीब दो लाख कांवड़ियों और शिवभक्तों के पांचाल घाट पहुंचकर गंगाजल भरने का अनुमान सामने आया। रात शुरू होने के बाद शुरुआती घंटों में भीड़ सामान्य रही, लेकिन रात करीब 12 बजे के बाद कांवड़ियों की संख्या अचानक बढ़ने लगी। देखते ही देखते पक्के घाट से लेकर गंगा पुल तक शिवभक्तों की लंबी कतारें नजर आने लगीं।

पीलीभीत, शाहजहांपुर, हरदोई, लखीमपुर खीरी, बदायूं, इटावा, मैनपुरी और एटा समेत आसपास के कई जिलों से कांवड़िए पांचाल घाट पहुंचे। अधिकांश श्रद्धालुओं ने पहले गंगा स्नान किया, इसके बाद विधि-विधान से गंगाजल भरा और अपने-अपने गंतव्य की ओर रवाना हुए। घाट पर लगातार ‘हर-हर महादेव’, ‘बम-बम भोले’ और ‘बोल बम’ के जयघोष गूंजते रहे। इस वर्ष 17 अगस्त को सावन का तीसरा सोमवार और नागपंचमी एक ही दिन पड़ रही है। धार्मिक दृष्टि से इसे विशेष संयोग माना जा रहा है। उपलब्ध पंचांग संबंधी जानकारी के अनुसार सावन 2026 में चार सोमवार हैं और तीसरा सोमवार 17 अगस्त को नागपंचमी के साथ पड़ रहा है।

रात 12 बजे के बाद तेजी से बढ़ी कांवड़ियों की संख्या

पांचाल घाट पर रविवार शाम से ही कांवड़ियों का पहुंचना शुरू हो गया था। शुरुआत में श्रद्धालुओं की संख्या नियंत्रित रही, लेकिन मध्यरात्रि के बाद कांवड़ियों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ।रात बढ़ने के साथ घाट पर भगवा वस्त्र पहने कांवड़ियों के जत्थे दिखाई देने लगे। कई कांवड़िए पैदल यात्रा करते हुए पहुंचे तो अनेक समूह वाहनों से पांचाल घाट तक आए। गंगाजल भरने के बाद श्रद्धालु अपने-अपने शिवालयों और गंतव्यों की ओर रवाना होते रहे। सुबह तक घाट क्षेत्र में इतनी भीड़ हो गई कि पक्के घाट से गंगा पुल तक श्रद्धालुओं की आवाजाही लगातार बनी रही। प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती भीड़ को नियंत्रित रखते हुए गंगा स्नान और जल भरने की प्रक्रिया को सुरक्षित बनाए रखना था।

आसपास के कई जिलों से पहुंचे शिवभक्त

पांचाल घाट फर्रुखाबाद और आसपास के जिलों के कांवड़ियों के लिए महत्वपूर्ण गंगाघाट है। इस बार भी बड़ी संख्या में कांवड़िए विभिन्न जिलों से गंगाजल लेने पहुंचे। पीलीभीत, शाहजहांपुर, हरदोई, लखीमपुर खीरी, बदायूं, इटावा, मैनपुरी और एटा के अलावा आसपास के क्षेत्रों से आए शिवभक्तों ने गंगा में स्नान कर कांवड़ में पवित्र जल भरा। कांवड़ियों की यात्रा का उद्देश्य अपने-अपने क्षेत्र के शिव मंदिरों में भगवान शिव का जलाभिषेक करना है। सावन में गंगाजल लेकर पैदल या निर्धारित यात्रा मार्ग से शिवालय तक पहुंचना उत्तर भारत की प्रमुख धार्मिक परंपराओं में शामिल है।

नागपंचमी और सावन सोमवार का विशेष संयोग

इस बार सावन के तीसरे सोमवार के दिन ही नागपंचमी पड़ने से पांचाल घाट पर श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने का एक प्रमुख कारण यह धार्मिक संयोग भी रहा। धार्मिक मान्यताओं में भगवान शिव और नाग देवता का विशेष संबंध माना जाता है। भगवान शिव के गले में नाग के विराजमान होने के कारण नागपंचमी के दिन शिव आराधना का भी विशेष महत्व माना जाता है। कई श्रद्धालु इस अवसर पर गंगाजल, दूध, बेलपत्र और अन्य पूजन सामग्री से शिवलिंग का अभिषेक करते हैं। इस संयोग के चलते इस बार सावन सोमवार की धार्मिक गतिविधियों में श्रद्धालुओं का उत्साह विशेष रूप से दिखाई दिया।

डीएम और एसपी ने किया पांचाल घाट का निरीक्षण

बड़ी संख्या में कांवड़ियों के पहुंचने को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन पूरी रात अलर्ट मोड में रहा। जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर और पुलिस अधीक्षक आरती सिंह ने पांचाल घाट का पैदल भ्रमण कर सुरक्षा और व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया।अधिकारियों ने घाट पर श्रद्धालुओं की आवाजाही, बैरिकेडिंग, सुरक्षा व्यवस्था और गंगा में स्नान के दौरान बरती जा रही सावधानियों का जायजा लिया। जिले में सावन के दौरान गंगा घाटों की सुरक्षा को लेकर पहले से व्यापक तैयारियां की गई थीं। प्रशासन ने जुलाई में हुई समीक्षा बैठक में गंगा घाटों पर निगरानी बढ़ाने, ड्रोन के इस्तेमाल और गंगा पुल के नियमित निरीक्षण के निर्देश दिए थे।

सुबह पांच बजे तक मौके पर डटे रहे अधिकारी

कांवड़ियों की बढ़ती संख्या के कारण पुलिस और प्रशासन के अधिकारी रातभर घाट क्षेत्र में मौजूद रहे। अपर पुलिस अधीक्षक गिरीश कुमार सिंह, सीओ सिटी अभय वर्मा और कादरी गेट थाना प्रभारी कपिल चौधरी समेत पुलिस एवं प्रशासन के अधिकारी व्यवस्थाओं की निगरानी करते रहे। अधिकारियों ने श्रद्धालुओं की संख्या और आवागमन पर लगातार नजर रखी। बताया गया कि सुबह करीब पांच बजे तक जब भीड़ कम होने लगी, तब तक अधिकारी मौके पर डटे रहे। इस दौरान पुलिसकर्मियों को अलग-अलग स्थानों पर तैनात किया गया था, ताकि किसी भी स्थिति में भीड़ को नियंत्रित किया जा सके।

बूंदाबांदी के बीच भी जारी रही पुलिस की ड्यूटी

रात के दौरान मौसम में बदलाव आया और हल्की बूंदाबांदी भी हुई। इसके बावजूद घाट पर तैनात पुलिसकर्मी अपने स्थानों पर डटे रहे। भीड़ के बीच सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना पुलिस के लिए चुनौतीपूर्ण था। बारिश के कारण फिसलन और गंगा घाट पर बढ़ने वाले जोखिम को देखते हुए पुलिसकर्मियों ने श्रद्धालुओं को सुरक्षित क्षेत्र में रहने के लिए लगातार जागरूक किया। प्रशासन की ओर से लाउडस्पीकर के माध्यम से लगातार घोषणाएं की जाती रहीं। श्रद्धालुओं से बैरिकेडिंग पार नहीं करने और गंगा के गहरे पानी की ओर नहीं जाने की अपील की गई।

नाव और स्टीमर से गंगा में निगरानी

घाट पर केवल जमीन से ही नहीं, बल्कि गंगा के जलक्षेत्र में भी निगरानी की व्यवस्था की गई थी। नावों और स्टीमर के माध्यम से पुलिसकर्मी और सुरक्षा दल गंगा में श्रद्धालुओं की गतिविधियों पर नजर रखते रहे। गंगा स्नान के दौरान श्रद्धालु बैरिकेडिंग से आगे न जाएं, इसके लिए लगातार चेतावनी दी गई। खासकर रात के समय गहरे पानी में जाने से रोकने के लिए पुलिसकर्मियों ने घाट क्षेत्र में विशेष सतर्कता बरती। पांचाल घाट पर बड़े स्नान पर्वों के दौरान नावों पर पुलिस की तैनाती और घाट की निगरानी की व्यवस्था पहले भी की जाती रही है। प्रशासन ने पूर्व में भी श्रद्धालुओं को गहरे पानी में जाने से रोकने के लिए बैरिकेडिंग, निगरानी और चेतावनी तंत्र को मजबूत करने के निर्देश दिए हैं।

सुरक्षा के साथ श्रद्धालुओं की सुविधा पर भी नजर

इतनी बड़ी संख्या में कांवड़ियों के पहुंचने के कारण प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती थी—एक ओर श्रद्धालुओं की धार्मिक यात्रा को सुचारु बनाए रखना और दूसरी ओर गंगा में स्नान के दौरान सुरक्षा सुनिश्चित करना। घाट पर भीड़ के दबाव को नियंत्रित करने के लिए बैरिकेडिंग का उपयोग किया गया। पुलिसकर्मी लगातार श्रद्धालुओं को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ने के लिए कहते रहे।प्रशासन की कोशिश रही कि गंगाजल भरने के बाद कांवड़िए घाट क्षेत्र में अनावश्यक रूप से न रुकें और आगे की यात्रा के लिए रवाना होते रहें, जिससे घाट पर भीड़ का दबाव कम बना रहे।

पांचाल घाट की धार्मिक पहचान और बढ़ी जिम्मेदारी

फर्रुखाबाद का पांचाल घाट धार्मिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां गंगा स्नान और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए वर्षभर श्रद्धालुओं का आवागमन बना रहता है। जिला प्रशासन की आधिकारिक रामनगरिया वेबसाइट भी पांचाल घाट को गंगा तट पर स्थित महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल के रूप में रेखांकित करती है और गंगा की स्वच्छता एवं श्रद्धालुओं की सुरक्षा पर जोर देती है।सावन और कांवड़ यात्रा के दौरान घाट की भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि बड़ी संख्या में शिवभक्त यहां से गंगाजल लेकर विभिन्न जिलों की ओर रवाना होते हैं।

Samvad 24 Office
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