
संवाद 24 झारखंड। राजनीति में प्रतियोगी परीक्षाओं की कथित धांधली को लेकर उठा तूफान अब सीधे मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंच चुका है। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी, पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोपों को लेकर राज्यभर के युवाओं में आक्रोश चरम पर है। महीनों से न्याय की गुहार लगा रहे अभ्यर्थियों ने अब अपनी रणनीति बदलते हुए सीधे तौर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के इस्तीफे की मांग कर दी है। छात्रों के इस रुख ने सत्ताधारी गठबंधन में हलचल तेज कर दी है।
पहली बार मंच से सीधे मुख्यमंत्री के इस्तीफे की गूंज
छात्र संगठनों और प्रतियोगी अभ्यर्थियों का कहना है कि सरकार युवाओं के भविष्य के साथ लगातार खिलवाड़ कर रही है। शनिवार देर शाम आयोजित एक संयुक्त प्रेस वार्ता में छात्र प्रतिनिधियों ने कड़े शब्दों में कहा कि अब केवल परीक्षा रद्द करने या जांच के खोखले आश्वासनों से काम नहीं चलेगा। अभ्यर्थियों ने स्पष्ट किया कि इतिहास में पहली बार छात्र मंच से किसी मुख्यमंत्री के सीधे इस्तीफे की मांग उठाई जा रही है। छात्रों का तर्क है कि यदि सरकार निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से परीक्षाएं आयोजित कराने में असमर्थ है, तो मुख्यमंत्री को अपने पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
मुख्य मांगें: परीक्षाएं रद्द हों और CBI संभाले कमान
आंदोलनकारी छात्रों ने मुख्य रूप से निम्नलिखित मांगें रखी हैं:
विवादित परीक्षाएं तत्काल रद्द हों: JSSC-CGL भर्ती परीक्षा और JPSC की 11वीं से 13वीं सिविल सेवा परीक्षाओं को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए।
सीबीआई (CBI) जांच: पूरी भर्ती प्रक्रिया और प्रश्नपत्र लीक के आरोपों की उच्चस्तरीय जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से कराई जाए ताकि असली सिंडिकेट का पर्दाफाश हो सके।
पारदर्शी चयन प्रणाली: राज्य में भर्ती आयोगों की कार्यप्रणाली में आमूलचूल बदलाव किए जाएं और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
कांग्रेस को अल्टीमेटम: ‘वापस लें समर्थन या भुगतें खामियाजा’
इस पूरे विवाद में अब केंद्र और राज्य की राजनीति भी शामिल हो गई है। प्रदर्शनकारी छात्रों ने कांग्रेस पार्टी और सांसद राहुल गांधी को सीधे निशाने पर लिया है। छात्र नेताओं ने कहा कि एक तरफ राहुल गांधी पूरे देश में युवाओं के रोजगार और पेपर लीक के खिलाफ न्याय यात्रा निकालते हैं, वहीं दूसरी तरफ झारखंड में उनकी पार्टी उस सरकार का समर्थन कर रही है जो युवाओं की आवाज दबा रही है। छात्रों ने दो टूक चेतावनी दी कि यदि हेमंत सोरेन सरकार उनकी मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाती, तो कांग्रेस को झामुमो (JMM) नीत गठबंधन सरकार से अपना समर्थन तुरंत वापस लेना चाहिए।
24 जिलों में पुतला दहन और सीएम आवास घेराव की चेतावनी
छात्रों ने अपने आंदोलन को लोकतांत्रिक व गांधीवादी तरीके से और तेज करने का विस्तृत खाका पेश किया है:
सभी 24 जिलों में पुतला दहन: राज्य के प्रत्येक जिले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी का प्रतीकात्मक पुतला फूंका जाएगा।
20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास का घेराव: छात्र नेताओं ने साफ किया कि 10 अगस्त को किया गया विधानसभा घेराव केवल एक सांकेतिक चेतावनी थी। आगामी 20 अगस्त को राज्यभर से हजारों अभ्यर्थी राजधानी रांची कूच करेंगे और मुख्यमंत्री आवास का पूर्ण घेराव करेंगे।
सरकार का रुख और मुख्यमंत्री का आश्वासन
बढ़ते जनाक्रोश के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राज्य के युवाओं को संबोधित करते हुए आश्वासन दिया था कि सरकार परीक्षा प्रणाली में ऐतिहासिक सुधार करने जा रही है। उन्होंने कहा कि JPSC और JSSC की कार्यप्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी और त्रुटिहीन बनाने के लिए छात्रों, अभिभावकों और विषय विशेषज्ञों से सुझाव मांगे जा रहे हैं। हालांकि, आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि सरकार के ये आश्वासन केवल समय काटने की रणनीति हैं और जब तक ठोस कानूनी व प्रशासनिक कदम नहीं उठाए जाते, आंदोलन थमेगा नहीं।






