आंध्र की स्वादिष्ट पहचान: घर पर कुरकुरा और पौष्टिक पेसरट्टू बनाने की संपूर्ण विधि

संवाद 24 डेस्क। भारतीय व्यंजनों की खासियत यह है कि हर क्षेत्र की अपनी विशिष्ट पाक परंपरा होती है। दक्षिण भारत के व्यंजनों में डोसा, इडली, उत्तपम और वड़ा जैसे लोकप्रिय पकवानों के साथ पेसरट्टू भी अपनी अलग पहचान रखता है। यह विशेष रूप से आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के पारंपरिक व्यंजनों में शामिल किया जाता है। दिखने में यह डोसे जैसा होता है, लेकिन इसकी मुख्य सामग्री चावल के बजाय हरी मूंग दाल होती है। यही कारण है कि पेसरट्टू स्वाद के साथ-साथ प्रोटीन और अन्य पोषक तत्वों का भी अच्छा स्रोत माना जाता है।

पेसरट्टू को कई लोग ग्रीन ग्राम डोसा के नाम से भी जानते हैं। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे बनाने के लिए दाल को किण्वित करने की आवश्यकता नहीं होती। मूंग दाल को कुछ घंटों के लिए भिगोकर पीसा जाता है और तैयार घोल से तुरंत डोसा बनाया जा सकता है। सही विधि अपनाई जाए तो बाहर से हल्का कुरकुरा और अंदर से नरम पेसरट्टू तैयार होता है।

पेसरट्टू क्या है?
पेसरट्टू एक पारंपरिक दक्षिण भारतीय डोसा है, जिसे मुख्य रूप से हरी मूंग दाल से तैयार किया जाता है। तेलुगु भाषा में मूंग दाल को “पेसर पप्पू” कहा जाता है और इसी से “पेसरट्टू” नाम की उत्पत्ति मानी जाती है।
सामान्य डोसे के विपरीत इसमें चावल और उड़द दाल का पारंपरिक मिश्रण आवश्यक नहीं होता। मूंग दाल को पानी में भिगोने के बाद अदरक, हरी मिर्च और जीरे जैसे मसालों के साथ पीसकर घोल तैयार किया जाता है। इसके बाद घोल को तवे पर पतला फैलाकर दोनों तरफ से पकाया जाता है।
पेसरट्टू को नाश्ते के रूप में सबसे अधिक पसंद किया जाता है, हालांकि इसे हल्के दोपहर या रात के भोजन में भी परोसा जा सकता है।

पेसरट्टू बनाने के लिए आवश्यक सामग्री
लगभग 6–8 मध्यम आकार के पेसरट्टू बनाने के लिए निम्न सामग्री पर्याप्त रहती है:
मुख्य सामग्री

  • हरी मूंग दाल – 2 कप
  • पानी – आवश्यकतानुसार
  • अदरक – लगभग 1 इंच का टुकड़ा
  • हरी मिर्च – 2 से 3
  • जीरा – 1 चम्मच
  • नमक – स्वादानुसार
  • तेल – सेंकने के लिए

वैकल्पिक सामग्री

  • बारीक कटा प्याज – 1 मध्यम
  • बारीक कटा हरा धनिया – 2 बड़े चम्मच
  • करी पत्ता – 6–8 पत्ते, बारीक कटे हुए
  • काली मिर्च – थोड़ी मात्रा
  • लाल मिर्च – स्वादानुसार
    पेसरट्टू में प्याज डालना अनिवार्य नहीं है। हालांकि बारीक कटा प्याज ऊपर से डालकर पकाने पर इसका स्वाद और बनावट दोनों बेहतर हो जाते हैं।

मूंग दाल को भिगोने की सही विधि
सबसे पहले हरी मूंग दाल को साफ करके अच्छी तरह धो लें। इसे पर्याप्त पानी में लगभग 4 से 6 घंटे के लिए भिगो दें। यदि मौसम ठंडा हो या दाल पुरानी हो तो भिगोने का समय थोड़ा बढ़ाया जा सकता है।
दाल के अच्छी तरह भीग जाने के बाद अतिरिक्त पानी निकाल दें। इसके बाद दाल को एक बार साफ पानी से धो लें।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि पेसरट्टू के लिए दाल को बहुत अधिक देर तक भिगोना आवश्यक नहीं है। इसका उद्देश्य दाल को इतना नरम करना है कि वह आसानी से पीसी जा सके।

पेसरट्टू का घोल तैयार करने की विधि
भीगी हुई मूंग दाल को मिक्सर जार में डालें। इसमें अदरक, हरी मिर्च और जीरा डालें। अब थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पानी डालते हुए दाल को पीसें।
घोल को बहुत ज्यादा महीन करने की आवश्यकता नहीं है। हल्का दरदरा घोल पेसरट्टू को अच्छी बनावट देने में मदद करता है। हालांकि यदि आप बहुत पतला और कुरकुरा पेसरट्टू पसंद करते हैं तो घोल को अपेक्षाकृत चिकना भी रखा जा सकता है।

घोल की स्थिरता सामान्य डोसे के घोल से थोड़ी अलग होती है। यह न तो बहुत गाढ़ा होना चाहिए और न ही पानी जैसा पतला। ऐसा घोल तैयार करें जिसे तवे पर डालकर चम्मच या कलछी की सहायता से आसानी से फैलाया जा सके।
अब इसमें स्वादानुसार नमक मिलाएं। यदि प्याज और हरा धनिया डालना है तो इन्हें अलग रख लें, क्योंकि इन्हें तवे पर घोल फैलाने के बाद ऊपर से डालना अधिक अच्छा रहता है।

तवे को तैयार करना
पेसरट्टू बनाने के लिए लोहे का तवा या अच्छी गुणवत्ता वाला नॉन-स्टिक तवा इस्तेमाल किया जा सकता है। पारंपरिक स्वाद के लिए लोहे का तवा विशेष रूप से अच्छा विकल्प माना जाता है।
तवे को मध्यम आंच पर गर्म करें। तवा बहुत ज्यादा गर्म होने पर घोल फैलाना कठिन हो सकता है और पेसरट्टू समान रूप से नहीं पक पाएगा।
यदि लोहे के तवे का उपयोग कर रहे हैं तो उस पर कुछ बूंदें तेल की डालकर कपड़े या आधे कटे प्याज की सहायता से फैला सकते हैं। इसके बाद आंच को मध्यम रखें।

पेसरट्टू बनाने की पूरी प्रक्रिया
जब तवा उचित तापमान पर गर्म हो जाए, तब एक कलछी घोल लेकर तवे के बीच में डालें।
अब कलछी के पिछले हिस्से से घोल को गोलाकार गति में बाहर की ओर फैलाएं। इसे बहुत अधिक दबाव के साथ फैलाने की आवश्यकता नहीं है। पेसरट्टू की मोटाई आपकी पसंद के अनुसार रखी जा सकती है।

यदि आप कुरकुरा पेसरट्टू चाहते हैं तो घोल को थोड़ा पतला फैलाएं। इसके ऊपर बारीक कटा प्याज, हरा धनिया और थोड़ा जीरा छिड़क सकते हैं।
अब किनारों और ऊपर की सतह पर थोड़ी मात्रा में तेल डालें। इसे मध्यम आंच पर पकने दें।
जब किनारे सुनहरे और कुरकुरे होने लगें तथा ऊपर की सतह पर नमी कम हो जाए, तब पेसरट्टू को पलट दें। दूसरी तरफ भी कुछ समय तक पकाएं।

यदि आपने इसे पतला फैलाया है तो इसे केवल एक तरफ से भी अच्छी तरह कुरकुरा करके परोसा जा सकता है। तैयार पेसरट्टू को तवे से निकालकर तुरंत परोसें।

पेसरट्टू को स्वादिष्ट बनाने के महत्वपूर्ण सुझाव
अच्छा पेसरट्टू बनाने के लिए केवल सामग्री पर्याप्त नहीं है; घोल और तवे की सही स्थिति भी महत्वपूर्ण है।
पहला सुझाव: दाल को पर्याप्त समय तक भिगोएं। अधूरी तरह से भीगी दाल पीसने में कठिन होगी और घोल की बनावट भी प्रभावित हो सकती है।

दूसरा सुझाव: घोल को बहुत ज्यादा पतला न करें। बहुत पतला घोल तवे पर फैलाते समय टूट सकता है।

तीसरा सुझाव: तवे का तापमान नियंत्रित रखें। बहुत तेज आंच पर पेसरट्टू ऊपर से जल्दी पक जाएगा, जबकि अंदर का हिस्सा अपेक्षाकृत कच्चा रह सकता है।

चौथा सुझाव: प्रत्येक पेसरट्टू बनाने से पहले घोल को हल्के हाथ से मिला लें। दाल के कण नीचे बैठ सकते हैं, इसलिए घोल की एकरूपता बनाए रखना जरूरी है।

पांचवां सुझाव: यदि पेसरट्टू तवे से चिपक रहा है तो तवे का तापमान, सतह की स्थिति और तेल की मात्रा जांचें। लोहे के तवे को ठीक से सीजन किया हुआ होना उपयोगी रहता है।

पेसरट्टू के साथ क्या परोसें?
पेसरट्टू का पारंपरिक और लोकप्रिय संयोजन अदरक की चटनी के साथ माना जाता है। दक्षिण भारतीय शैली में तैयार अदरक की चटनी इसके स्वाद को विशेष रूप से उभारती है।
इसके अलावा इसे नारियल की चटनी, मूंगफली की चटनी, टमाटर की चटनी या सांभर के साथ भी परोसा जा सकता है।

पेसरट्टू की एक लोकप्रिय शैली में इसे उपमा के साथ भरकर परोसा जाता है। इसे अक्सर “पेसरट्टू-उपमा” के रूप में जाना जाता है। इसमें तैयार पेसरट्टू के बीच में नरम और मसालेदार उपमा रखा जाता है तथा उसे मोड़कर परोसा जाता है।

पेसरट्टू का पोषण पक्ष
हरी मूंग दाल भारतीय भोजन में प्रोटीन का एक महत्वपूर्ण शाकाहारी स्रोत है। इसमें प्रोटीन के साथ-साथ आहार फाइबर, विभिन्न विटामिन और खनिज भी पाए जाते हैं। इसलिए मूंग दाल से तैयार पेसरट्टू सामान्य रूप से संतुलित आहार का हिस्सा बनाया जा सकता है।
हालांकि पेसरट्टू की वास्तविक पोषण मात्रा उसकी रेसिपी पर निर्भर करती है। उदाहरण के लिए, इसमें इस्तेमाल होने वाले तेल की मात्रा, प्याज की मात्रा और साथ परोसी जाने वाली चटनी या अन्य खाद्य पदार्थ कुल कैलोरी और पोषण संरचना को प्रभावित करते हैं।

यह भी ध्यान रखना चाहिए कि किसी भी एक व्यंजन को अपने आप में पूर्ण संतुलित आहार नहीं माना जा सकता। दैनिक भोजन में अलग-अलग खाद्य समूहों का संतुलित समावेश अधिक महत्वपूर्ण है।

पेसरट्टू और सामान्य डोसे में अंतर
पेसरट्टू और सामान्य डोसा देखने में समान लग सकते हैं, लेकिन दोनों की मुख्य सामग्री और तैयारी की प्रक्रिया अलग होती है।
सामान्य डोसे में प्रायः चावल और उड़द दाल का मिश्रण इस्तेमाल किया जाता है और पारंपरिक विधि में घोल को किण्वित किया जाता है। दूसरी ओर, पेसरट्टू मुख्य रूप से हरी मूंग दाल से तैयार होता है और इसके लिए किण्वन आवश्यक नहीं होता।

इसी वजह से पेसरट्टू उन लोगों के लिए सुविधाजनक विकल्प हो सकता है जो ऐसा दाल-आधारित नाश्ता बनाना चाहते हैं जिसे लंबी किण्वन प्रक्रिया के बिना तैयार किया जा सके।

पेसरट्टू बनाते समय होने वाली सामान्य गलतियां
पेसरट्टू बनाने में कुछ छोटी गलतियां इसकी गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती हैं। सबसे आम समस्या घोल का बहुत गाढ़ा या बहुत पतला होना है। बहुत गाढ़ा घोल तवे पर समान रूप से नहीं फैलेगा, जबकि अत्यधिक पतला घोल टूट सकता है।

दूसरी समस्या तवे का सही तापमान न होना है। तवा बहुत गर्म होने पर घोल तुरंत जम सकता है और उसे फैलाना मुश्किल हो सकता है। इसके विपरीत तवा पर्याप्त गर्म न होने पर पेसरट्टू चिपक सकता है।

तीसरी गलती बहुत ज्यादा तेल डालना है। तेल की अधिक मात्रा से पेसरट्टू अनावश्यक रूप से भारी और चिकना हो सकता है। कुरकुरापन प्राप्त करने के लिए तेल की मात्रा से ज्यादा महत्वपूर्ण सही तापमान और उचित मोटाई है।

पेसरट्टू दक्षिण भारतीय पाक परंपरा का एक स्वादिष्ट और विशिष्ट व्यंजन है, जिसकी खास पहचान हरी मूंग दाल से बनने वाले इसके घोल में है। इसे बनाने की प्रक्रिया सामान्य डोसे की तुलना में अपेक्षाकृत सरल है, क्योंकि इसमें घोल को पारंपरिक रूप से किण्वित करना आवश्यक नहीं होता।

सही तरीके से भीगी हुई मूंग दाल, अदरक, हरी मिर्च और जीरे से तैयार घोल को उचित तापमान वाले तवे पर फैलाकर स्वादिष्ट पेसरट्टू बनाया जा सकता है। ऊपर से प्याज और हरा धनिया डालने से इसका स्वाद और आकर्षक हो जाता है। अदरक की चटनी, नारियल की चटनी या सांभर के साथ इसका स्वाद और बढ़ जाता है।

यदि आप अपने नाश्ते में स्वाद के साथ दाल-आधारित विकल्प शामिल करना चाहते हैं, तो पेसरट्टू एक सरल और पारंपरिक विकल्प है। थोड़े अभ्यास से इसे घर पर आसानी से बनाया जा सकता है और अपनी पसंद के अनुसार इसकी मोटाई, कुरकुरापन तथा मसालों का स्वाद भी बदला जा सकता है।

Radha Singh
Radha Singh

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