
संवाद 24 डेस्क। पुट्टु दक्षिण भारत, विशेषकर केरल और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में लोकप्रिय पारंपरिक व्यंजनों में से एक है। यह मुख्य रूप से चावल के आटे और नारियल से तैयार किया जाता है तथा इसे भाप में पकाया जाता है। इसकी खासियत यह है कि इसमें तेल या घी का प्रयोग बहुत कम या बिल्कुल नहीं होता। सही तरीके से तैयार किया गया पुट्टु बाहर से हल्का और दानेदार, जबकि खाने में नरम, सुगंधित और स्वादिष्ट होता है।
पुट्टु को सामान्यतः नाश्ते के रूप में परोसा जाता है। केरल में इसे अक्सर कडला करी यानी काले चने की मसालेदार करी के साथ खाया जाता है। इसके अलावा केला, नारियल, गुड़ या हल्की मीठी संगत के साथ भी इसका आनंद लिया जाता है। इसकी सरल सामग्री और भाप में पकाने की विधि इसे पारंपरिक भारतीय व्यंजनों में एक खास स्थान देती है।
पुट्टु बनाने के लिए आवश्यक सामग्री
लगभग 3 से 4 लोगों के लिए पुट्टु बनाने हेतु निम्न सामग्री की आवश्यकता होगी—
मुख्य सामग्री
- चावल का आटा – 2 कप
- ताजा कद्दूकस किया हुआ नारियल – 1 से 1½ कप
- पानी – लगभग ¾ से 1 कप
- नमक – स्वादानुसार, लगभग ½ चम्मच
वैकल्पिक सामग्री
- गुड़ – मीठा पुट्टु बनाने के लिए
- इलायची पाउडर – ¼ चम्मच
- पके केले – परोसने के लिए
- कडला करी – पारंपरिक तरीके से परोसने के लिए
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि पानी की मात्रा निश्चित नहीं होती। चावल के आटे की गुणवत्ता और उसकी नमी के अनुसार पानी थोड़ा कम या अधिक लग सकता है। पुट्टु के लिए आटे में इतना ही पानी डालना चाहिए कि वह नम हो जाए, लेकिन गीला होकर आटे की लोई जैसा न बने।
पुट्टु के लिए चावल का आटा तैयार करना
पुट्टु की सफलता काफी हद तक चावल के आटे की बनावट पर निर्भर करती है। बाजार में मिलने वाला तैयार पुट्टु आटा भी इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन घर पर चावल से आटा तैयार करने पर स्वाद और सुगंध बेहतर मिल सकती है।
यदि घर पर आटा तैयार करना हो तो चावल को साफ करके धो लें और कुछ समय के लिए पानी में भिगो दें। इसके बाद पानी पूरी तरह निकालकर चावल को कपड़े या बड़ी प्लेट पर फैलाकर अतिरिक्त नमी कम होने दें। चावल पूरी तरह सूखने से पहले उसे पीसकर बारीक आटा तैयार किया जा सकता है। फिर इस आटे को हल्का भूनने से उसमें मौजूद अतिरिक्त नमी कम होती है और पुट्टु की बनावट बेहतर रहती है।
हालांकि, आटा बहुत अधिक नहीं भूनना चाहिए। अधिक भुनने पर चावल का आटा अपना प्राकृतिक स्वाद और रंग बदल सकता है।
पुट्टु का आटा तैयार करने की सही विधि
सबसे पहले एक बड़े बर्तन में 2 कप चावल का आटा लें। इसमें लगभग आधा चम्मच नमक मिलाएं। अब पानी को एक साथ डालने के बजाय धीरे-धीरे आटे में मिलाएं।
यह पुट्टु बनाने का सबसे महत्वपूर्ण चरण है।
पानी डालते समय उंगलियों या हथेली की सहायता से आटे को हल्के हाथों से मिलाते रहें। आटे में इतनी नमी होनी चाहिए कि उसे दबाने पर वह थोड़ी देर के लिए आकार बनाए, लेकिन उंगलियों से छूने पर आसानी से अलग-अलग दानों में टूट जाए।
इसे परखने का एक सरल तरीका है कि थोड़ा सा मिश्रण हथेली में लेकर दबाया जाए। यदि वह हल्की गांठ बनाता है और फिर आसानी से टूट जाता है, तो नमी सामान्यतः सही है।
यदि आटा बहुत सूखा है तो पुट्टु पकने के बाद कठोर या बिखरा हुआ लग सकता है। दूसरी ओर, यदि पानी बहुत अधिक हो जाए तो आटा चिपचिपा होकर भाप में अच्छी तरह नहीं पकता और पुट्टु की विशिष्ट दानेदार बनावट खराब हो सकती है।
आटे को आराम देने का महत्व
पानी मिलाने के बाद आटे को लगभग 10 से 15 मिनट के लिए ढककर रख दें। इससे पानी आटे में समान रूप से फैल जाता है और पुट्टु की अंतिम बनावट बेहतर होती है।
आराम देने के बाद आटे को हाथ या कांटे की सहायता से हल्के हाथों से दोबारा फुला लें। यदि इसमें बड़े-बड़े गोले बन गए हों तो उन्हें तोड़ दें। चाहें तो आटे को छलनी से छानकर भी अधिक समान दाने प्राप्त किए जा सकते हैं।
पुट्टु बनाने की पारंपरिक विधि
पुट्टु बनाने के लिए पारंपरिक रूप से एक विशेष उपकरण इस्तेमाल किया जाता है जिसे पुट्टु कुट्टी या पुट्टु मेकर कहा जाता है। इसमें नीचे पानी गर्म होता है और ऊपर बेलनाकार पात्र में चावल का आटा तथा नारियल की परतें भरी जाती हैं। नीचे से उठने वाली भाप इन परतों को पकाती है।
पुट्टु मेकर के निचले बर्तन में पर्याप्त पानी डालें और उसे गैस पर गर्म होने रखें। अब ऊपर वाले बेलनाकार हिस्से में सबसे पहले थोड़ा कद्दूकस किया हुआ नारियल डालें।
इसके ऊपर तैयार चावल के आटे की एक परत डालें। फिर दोबारा नारियल की परत और उसके बाद चावल के आटे की परत डालें। इसी क्रम को दोहराते हुए पात्र को भरें। सबसे ऊपर भी नारियल की हल्की परत रखी जा सकती है।
ध्यान रखें कि मिश्रण को पात्र में दबाकर कसकर न भरें। आटे की परतें ढीली रहनी चाहिए ताकि भाप उनके बीच से आसानी से गुजर सके।
अब पुट्टु मेकर को नीचे लगे पानी वाले बर्तन पर अच्छी तरह फिट कर दें। मध्यम आंच पर इसे भाप में पकने दें।
पुट्टु कितनी देर पकाना चाहिए?
आमतौर पर पुट्टु को लगभग 5 से 10 मिनट तक भाप में पकाया जाता है, हालांकि समय पुट्टु मेकर के आकार, आटे की मात्रा और आंच पर निर्भर करता है।
जब ऊपर से लगातार भाप निकलने लगे और चावल का आटा अच्छी तरह पक जाए, तब पुट्टु तैयार माना जा सकता है। बहुत अधिक समय तक पकाने से इसकी नमी कम हो सकती है और पुट्टु अपेक्षाकृत सूखा या कठोर हो सकता है।
पकने के बाद पुट्टु को सावधानीपूर्वक मेकर से निकालें। गरम भाप से हाथ जलने का खतरा रहता है, इसलिए इसे निकालते समय कपड़े या उपयुक्त रसोई उपकरण का इस्तेमाल करना चाहिए।
बिना पुट्टु मेकर के पुट्टु कैसे बनाएं?
यदि घर में पारंपरिक पुट्टु मेकर उपलब्ध नहीं है, तो इडली स्टीमर या किसी अन्य भाप में पकाने वाले बर्तन की सहायता से भी पुट्टु बनाया जा सकता है।
इसके लिए चावल के आटे और नारियल की परतों को छोटे स्टील के कटोरे या उपयुक्त स्टीमिंग मोल्ड में रखें। पात्र को बहुत कसकर न भरें। फिर इसे स्टीमर में रखकर भाप में पकाएं।
हालांकि, पारंपरिक पुट्टु मेकर से बनने वाले पुट्टु का आकार और बनावट अधिक विशिष्ट होती है, लेकिन बिना विशेष उपकरण के तैयार किया गया संस्करण भी स्वादिष्ट हो सकता है।
पुट्टु परोसने का पारंपरिक तरीका
पुट्टु की लोकप्रियता केवल इसकी सरलता के कारण नहीं है, बल्कि इसके साथ परोसी जाने वाली संगत भी इसके स्वाद को खास बनाती है।
केरल में पुट्टु और कडला करी का संयोजन बेहद लोकप्रिय है। चावल और नारियल से बने हल्के पुट्टु के साथ काले चने की मसालेदार करी स्वाद में संतुलन पैदा करती है।
इसके अलावा पुट्टु को पके केले और थोड़ा गुड़ डालकर भी खाया जाता है। नारियल और केले के साथ इसका स्वाद विशेष रूप से अच्छा लगता है। कुछ लोग इसे दूध या नारियल के दूध के साथ भी पसंद करते हैं।
मीठा पुट्टु बनाने के लिए चावल की परतों के बीच गुड़ का बारीक चूरा और इलायची पाउडर डाला जा सकता है। हालांकि, गुड़ की मात्रा स्वाद के अनुसार रखनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि मिश्रण अत्यधिक गीला न हो।
स्वादिष्ट पुट्टु बनाने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव
- पानी धीरे-धीरे डालें:
एक साथ अधिक पानी डालना पुट्टु की बनावट बिगाड़ सकता है। - आटे को बहुत गीला न करें:
पुट्टु का आटा गीला नहीं बल्कि नम और दानेदार होना चाहिए। - आटे को दबाकर न भरें:
भाप के प्रवाह के लिए आटे की परतें हल्की और ढीली रखें। - ताजा नारियल का प्रयोग करें:
ताजा नारियल पुट्टु को प्राकृतिक मिठास, नमी और सुगंध देता है। - मध्यम आंच रखें:
बहुत तेज आंच पर पानी जल्दी खत्म हो सकता है और पुट्टु असमान रूप से पक सकता है। - आटे को आराम दें:
पानी मिलाने के बाद कुछ समय रखने से नमी समान रूप से फैलती है। - भाप से सावधान रहें:
पुट्टु मेकर खोलते या पुट्टु निकालते समय गर्म भाप से हाथ और चेहरा बचाएं।
पुट्टु का पोषण संबंधी महत्व
पुट्टु मुख्य रूप से चावल के आटे और नारियल से बनता है। चावल कार्बोहाइड्रेट का प्रमुख स्रोत है, इसलिए यह शरीर को ऊर्जा प्रदान करने वाले भोजन का हिस्सा हो सकता है। नारियल से वसा, फाइबर और कुछ सूक्ष्म पोषक तत्व मिलते हैं।
इस व्यंजन की एक विशेषता यह है कि इसे भाप में पकाया जाता है और पारंपरिक विधि में अतिरिक्त तेल की आवश्यकता नहीं होती। हालांकि, पुट्टु की कुल पोषण संरचना उसकी सामग्री और मात्रा पर निर्भर करती है। यदि इसे कडला करी, दाल या अन्य प्रोटीनयुक्त खाद्य पदार्थों के साथ खाया जाए तो भोजन अधिक संतुलित बनाया जा सकता है।
यह भी ध्यान रखना चाहिए कि चावल आधारित होने के कारण पुट्टु को संतुलित आहार का हिस्सा बनाकर उचित मात्रा में खाना बेहतर है। किसी विशेष स्वास्थ्य स्थिति, खाद्य एलर्जी या चिकित्सकीय आहार की आवश्यकता होने पर सामग्री का चयन व्यक्तिगत आवश्यकता के अनुसार किया जाना चाहिए।
सामान्य गलतियाँ और उनके समाधान
पुट्टु बनाते समय सबसे आम समस्या यह होती है कि वह बहुत सूखा या बहुत चिपचिपा हो जाता है। इसका मुख्य कारण आटे में पानी की मात्रा का सही संतुलन न होना है।
यदि पुट्टु सूखा है, तो अगली बार पानी थोड़ा अधिक डालें और आटे को पर्याप्त समय तक आराम दें। यदि पुट्टु चिपचिपा है, तो पानी कम करें और आटे को दानेदार बनाए रखने पर ध्यान दें।
दूसरी समस्या नारियल और आटे की परतों को बहुत कसकर भरने से हो सकती है। इससे भाप का प्रवाह बाधित होता है और पुट्टु समान रूप से नहीं पकता।
तीसरी समस्या अत्यधिक पकाने की है। पुट्टु को आवश्यकता से अधिक देर तक भाप देने पर उसकी नमी कम हो सकती है। इसलिए भाप अच्छी तरह आने और आटे के पक जाने के बाद उसे अधिक समय तक स्टीम नहीं करना चाहिए।
पुट्टु भारतीय पारंपरिक भोजन की उस खूबसूरती का उदाहरण है जिसमें साधारण सामग्री से स्वादिष्ट और संतोषजनक व्यंजन तैयार किया जाता है। चावल का आटा, ताजा नारियल, पानी और नमक जैसी सीमित सामग्री से बनने वाला यह व्यंजन अपनी भाप में पकाने की तकनीक और विशिष्ट दानेदार बनावट के कारण अलग पहचान रखता है।
पुट्टु बनाने की सबसे महत्वपूर्ण कुंजी आटे में पानी की सही मात्रा, हल्की और ढीली परतें तथा पर्याप्त भाप है। जब इन तीनों बातों का ध्यान रखा जाता है, तो घर पर भी मुलायम, सुगंधित और स्वादिष्ट पुट्टु तैयार किया जा सकता है।
इसे पारंपरिक कडला करी के साथ परोसें या केले और गुड़ के साथ मीठे स्वाद में आनंद लें—पुट्टु सरलता और पारंपरिक दक्षिण भारतीय पाक-कला का स्वादिष्ट मेल है। सही विधि अपनाकर इसे नाश्ते के साथ-साथ हल्के भोजन के रूप में भी आसानी से तैयार किया जा सकता है।






