दो दिन में गंगा में समा गए आठ मकान: फर्रुखाबाद के गांव दिलीप की मड़ैया पर अस्तित्व का संकट

संवाद 24 फर्रुखाबाद। गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर के बीच फर्रुखाबाद के सदर तहसील क्षेत्र स्थित दिलीप की मड़ैया गांव पर अब अस्तित्व का संकट गहरा गया है। पिछले दो दिनों में गंगा की तेज कटान से आठ मकान नदी में समा चुके हैं, जबकि कई अन्य मकान कभी भी ढहने की स्थिति में हैं। गुरुवार को तीन और बुधवार को पांच मकानों के ध्वस्त होने के बाद पूरे गांव में दहशत का माहौल है। ग्रामीण अपने जीवनभर की कमाई से बने घरों को बचाने की उम्मीद छोड़ चुके हैं और जो संभव हो रहा है, उसे बचाने के लिए खुद ही अपने मकानों को तोड़कर ईंट, लकड़ी और अन्य सामान सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रहे हैं। यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई है जब जिले के करीब 36 गांव पहले से ही बाढ़ और जलभराव से प्रभावित हैं। प्रशासन राहत और बचाव कार्यों में जुटा है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि यदि कटान की रफ्तार नहीं रुकी तो पूरा गांव गंगा की धारा में समा सकता है।

दो दिन में आठ मकान नदी में समाए

गुरुवार को गंगा की तेज धारा ने सुखपाल, ओमकार और रामवीर के मकानों को अपनी चपेट में ले लिया। देखते ही देखते पक्के मकान नदी में समा गए। वहीं तीन अन्य मकानों की दीवारें गिर चुकी हैं और उनके लिंटर हवा में लटक रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि ये मकान भी कभी भी ढह सकते हैं। इससे एक दिन पहले बुधवार को भी गांव के पांच मकान कटान की भेंट चढ़ गए थे। लगातार हो रहे नुकसान के कारण गांव के अधिकांश परिवार अपना जरूरी सामान समेटकर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं।

कटान ने बदल दिया गंगा का रुख

ग्रामीणों के अनुसार इस बार गंगा का कटान पहले की तुलना में अलग स्वरूप में हो रहा है। नदी ने गांव के सामने करीब 30 मीटर की दूरी पर उल्टी दिशा में गहरा ‘कोल’ (कटाव वाला गड्ढा) बना लिया है। इसके कारण नदी की धारा लगातार 10 से 12 मीटर भीतर की ओर मिट्टी काट रही है। विशेषज्ञ बताते हैं कि जब नदी की धारा अपना मार्ग बदलती है और किनारों पर भंवर जैसी स्थिति बनती है, तब कटान की गति कई गुना बढ़ जाती है। यही कारण है कि इस बार गांव के सामने कटान बेहद तेज हो रहा है। पिछले वर्ष भी यहां कटान हुआ था, लेकिन इस बार स्थिति अधिक गंभीर बताई जा रही है।

‘अब गांव बचना मुश्किल लग रहा है’

ग्रामीण मचले सिंह बताते हैं कि इस बार गंगा का कटान इतना तेज है कि लोग रात भर जागकर नदी की ओर नजर रखते हैं। अधिकतर परिवार अपने घर खाली कर चुके हैं। सबसे बड़ी चिंता बच्चों, बुजुर्गों और पशुओं की सुरक्षा को लेकर है। ग्रामीणों का कहना है कि कई परिवार खुले आसमान के नीचे या रिश्तेदारों के यहां शरण लेने को मजबूर हैं। लोगों के सामने वर्षों की मेहनत से बनाए घरों को अपनी आंखों के सामने नदी में समाते देखने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा।

अपने ही हाथों से तोड़ रहे घर

कटान की आशंका को देखते हुए कई ग्रामीण अपने मकानों को खुद तोड़ रहे हैं, ताकि ईंटें, सरिया, लकड़ी, दरवाजे और अन्य उपयोगी सामान बचाया जा सके। हालांकि यह काम भी आसान नहीं है। गांव तक पहुंचने वाले रास्ते जलमग्न और क्षतिग्रस्त होने से ट्रैक्टर और अन्य वाहन अंदर नहीं पहुंच पा रहे हैं। ऐसे में ग्रामीण सिर पर सामान ढोकर या छोटे वाहनों की मदद से अपना सामान सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।

गांव का संपर्क भी प्रभावित

लगातार बढ़ते जलस्तर और कटान के कारण गांव तक पहुंचने वाले संपर्क मार्ग भी प्रभावित हो गए हैं। कई स्थानों पर सड़कें टूट गई हैं और रास्तों पर पानी भर गया है। इससे राहत सामग्री पहुंचाने और लोगों को सुरक्षित निकालने में भी कठिनाई हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि कटान इसी तरह जारी रहा तो कुछ दिनों में गांव का संपर्क पूरी तरह टूट सकता है।

36 गांव बाढ़ से प्रभावित

जिले में गंगा और अन्य नदियों के बढ़े जलस्तर के कारण इस समय लगभग 36 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। कई गांवों में खेत जलमग्न हैं, सड़कें डूब चुकी हैं और लोगों का सामान्य जीवन प्रभावित हुआ है। जिला प्रशासन ने राहत एवं बचाव के लिए बाढ़ चौकियां, नावें, मोटरबोट और अस्थायी शरणालय सक्रिय कर दिए हैं। प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी की जा रही है।

प्रशासन ने किया निरीक्षण

गुरुवार को क्षेत्रीय लेखपाल रामवरन ने गांव पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। वहीं सदर उपजिलाधिकारी संजय कुमार सिंह ने बताया कि कटान से प्रभावित परिवारों का सर्वे कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों के मकान गंगा में समा गए हैं या गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं, उन्हें शासन की निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आर्थिक सहायता और मुआवजा उपलब्ध कराया जाएगा। प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है।

पहले भी झेल चुका है कटान का दर्द

दिलीप की मड़ैया गांव पिछले कई वर्षों से गंगा कटान की मार झेलता आ रहा है। पिछले वर्ष भी यहां कई मकान नदी में समा गए थे। इसके बाद सिंचाई विभाग ने गांव को बचाने के लिए परकोपाइन (Porcupine Structure) और बालू से भरी बोरियों के माध्यम से कटान रोकने का प्रयास किया था। हालांकि इस वर्ष ग्रामीणों का आरोप है कि गंगा की धारा बदलने से सुरक्षा कार्य अपेक्षित परिणाम नहीं दे सके और कटान फिर तेज हो गया। सिंचाई विभाग का कहना है कि आवश्यकता के अनुसार सुरक्षा कार्यों की समीक्षा की जा रही है।

कटान रोकने की उठी मांग

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और सिंचाई विभाग से मांग की है कि तत्काल अतिरिक्त कटानरोधी कार्य शुरू किए जाएं। उनका कहना है कि यदि समय रहते मजबूत सुरक्षा व्यवस्था नहीं की गई तो पूरा गांव गंगा में समा सकता है। ग्रामीणों ने प्रभावित परिवारों के पुनर्वास, मुआवजा, पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था और सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने की भी मांग की है।

अगले कुछ दिन बेहद महत्वपूर्ण

जल संसाधन विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऊपरी क्षेत्रों में बारिश जारी रहती है और बैराजों से पानी छोड़ा जाता रहा तो गंगा का जलस्तर और बढ़ सकता है। इससे कटान की गति भी तेज होने की आशंका है। फिलहाल दिलीप की मड़ैया के लोगों की निगाहें गंगा की बदलती धारा पर टिकी हैं। हर गुजरते घंटे के साथ नदी गांव के और करीब पहुंच रही है और ग्रामीणों के मन में यही सवाल है कि क्या उनका गांव अगली बारिश तक बच पाएगा, या गंगा अपने साथ उनकी पूरी बस्ती भी बहा ले जाएगी।

Samvad 24 Office
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