क्या अब ₹2,000 से अधिक के ऑनलाइन ट्रांसफर पर लगेगा चार्ज?

संवाद 24 नई दिल्ली। देश में डिजिटल क्रांति का सबसे बड़ा प्रतीक बन चुका यूपीआई (UPI) पेमेंट सिस्टम एक नए दौर के बदलाव की ओर कदम बढ़ा रहा है। यदि आप भी रोजमर्रा के कामों से लेकर बड़ी खरीदारी तक के लिए गूगल पे, फोनपे, पेटीएम या भीम ऐप का इस्तेमाल करते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। केंद्र सरकार डिजिटल भुगतान व्यवस्था को वित्तीय रूप से टिकाऊ और मजबूत बनाने के उद्देश्य से ₹2,000 से अधिक मूल्य के व्यावसायिक (बिजनेस) यूपीआई लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) या प्रोसेसिंग चार्ज लगाने की योजना पर विचार कर रही है। हालांकि, इस फैसले को लेकर आम ग्राहकों को घबराने की बिल्कुल आवश्यकता नहीं है, क्योंकि रोजमर्रा की सामान्य खरीदारी और व्यक्तिगत लेनदेन पर इसका कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा।

संसद में पेश हुआ नया विधेयक: क्या है सरकार का प्रस्ताव?
हाल ही में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में ‘टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल’ (कर कराधान एवं अन्य कानून संशोधन विधेयक) पेश किया गया। इस विधेयक में बैंकों और डिजिटल पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स पर इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट मोड्स पर एमडीआर (MDR) लगाने पर लगे पुराने प्रतिबंधों को हटाने का औपचारिक प्रस्ताव शामिल किया गया है। वर्ष 2020 में केंद्र सरकार ने यूपीआई और रूपे (RuPay) कार्ड के माध्यम से किए जाने वाले सभी प्रकार के डिजिटल भुगतानों पर शून्य एमडीआर (Zero MDR) नीति लागू की थी। इस नीति का मुख्य उद्देश्य देश के कोने-कोने तक कैशलेस अर्थव्यवस्था और डिजिटल लेनदेन को तेजी से बढ़ावा देना था। अब जबकि यूपीआई भारत का सबसे लोकप्रिय और प्राथमिक भुगतान माध्यम बन चुका है, तो इस तंत्र को संभालने वाले बैंकों, फिनटेक कंपनियों और पेमेंट गेटवे संस्थाओं के बुनियादी ढांचे एवं रखरखाव के खर्च को संतुलित करने के लिए इस नीति में लचीलापन लाने की तैयारी की जा रही है।

किस पर लगेगा शुल्क और किसे मिलेगी पूरी छूट?
प्रस्तावित नियमों के अनुसार, यह मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) 0.25 प्रतिशत से लेकर 0.40 प्रतिशत तक हो सकता है। परंतु यह शुल्क केवल ₹2,000 से अधिक मूल्य के ‘मर्चेंट या बिजनेस ट्रांजेक्शन’ (Merchant Payments) पर ही लागू करने की योजना है।
पर्सन-टू-पर्सन (P2P) पूरी तरह मुफ्त: एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के खाते में किए जाने वाले किसी भी ट्रांसफर पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। यदि आप अपने किसी मित्र, रिश्तेदार या परिचित को कोई भी राशि भेजते हैं, तो वह पूरी तरह निशुल्क रहेगी।
छोटे व्यापारी और दैनिक खरीदारी सुरक्षित: दूध, सब्जी, किराना स्टोर, ऑटो-टैक्सी का किराया या दैनिक जरूरत की छोटी-मोटी वस्तुओं के भुगतान पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, क्योंकि ये अधिकतर ₹2,000 से कम के होते हैं।
केवल 5% लेनदेन के दायरे में: सरकारी और आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, कुल यूपीआई लेनदेन में ₹2,000 से ऊपर के भुगतान की संख्या महज 5 प्रतिशत ही है। हालांकि, मूल्य (Value) के दृष्टिकोण से देखा जाए तो ये 5 प्रतिशत लेनदेन कुल ट्रांजेक्शन वैल्यू का लगभग 65 प्रतिशत हिस्सा कवर करते हैं।

डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम का विशाल दायरा
हाल ही में जारी आंकड़ों के मुताबिक, अकेले जुलाई माह में देश के भीतर रिकॉर्ड 23.7 अरब (23.7 Billion) यूपीआई लेनदेन दर्ज किए गए, जिनकी कुल राशि ₹29.9 लाख करोड़ के पार पहुंच गई। इतनी विशाल मात्रा में होने वाले वित्तीय लेनदेन को सुरक्षित, तीव्र और सुचारू रूप से संचालित करने के लिए बेहद आधुनिक सर्वर और इंफ्रास्ट्रक्चर की आवश्यकता होती है। पेमेंट एक्सपर्ट्स और वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि बैंक और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स पिछले कुछ वर्षों से शून्य शुल्क नीति के कारण भारी परिचालन लागत (Operating Cost) झेल रहे थे। इस संशोधन के बाद इन कंपनियों को अपने बुनियादी ढांचे को और अधिक सुरक्षित एवं आधुनिक बनाने के लिए वित्तीय संसाधन प्राप्त हो सकेंगे, जिससे साइबर धोखाधड़ी और सर्वर डाउन होने जैसी समस्याओं से निपटने में मदद मिलेगी।

क्या ग्राहकों की जेब पर पड़ेगा अतिरिक्त बोझ?
वरिष्ठ अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि यदि यह प्रस्ताव अंतिम रूप से लागू भी होता है, तो देश के 95 प्रतिशत से अधिक यूपीआई लेनदेन पर कोई असर नहीं होगा। इसके अलावा, बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों (जैसे शॉपिंग मॉल्स, बड़े इलेक्ट्रॉनिक्स शोरूम या रिटेल चेन्स) पर जो नाममात्र का शुल्क लगेगा, उसे अधिकांश व्यापारी स्वयं वहन करेंगे और ग्राहकों पर नहीं डालेंगे। सरकार फिलहाल इस विषय पर विभिन्न हितधारकों, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) के साथ विचार-विमर्श कर रही है। इसे कब से और किस स्वरूप में लागू किया जाएगा, इस पर अंतिम निर्णय लिया जाना अभी बाकी है।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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