
संवाद 24 फर्रुखाबाद। फर्रुखाबाद में गंगा नदी का बढ़ता जलस्तर अब बाढ़ का गंभीर रूप लेने लगा है। पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश और नरौरा बैराज से छोड़े जा रहे भारी मात्रा में पानी के कारण जिले में गंगा लगातार उफान पर है। मंगलवार सुबह तक गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु को पार कर चुका है और खतरे के निशान के बेहद करीब पहुंच गया है। इसके चलते जिले के करीब 30 गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। कई संपर्क मार्ग जलमग्न हो चुके हैं, बदायूं–फर्रुखाबाद स्टेट हाईवे और शमशाबाद–शाहजहांपुर मार्ग पर पानी भर जाने से यातायात प्रभावित है, जबकि लगभग 180 परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर बनाए गए बाढ़ शरणालयों में पहुंचाया गया है। प्रशासन ने राहत एवं बचाव कार्य तेज कर दिए हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में नावों, मोटरबोट, एनडीआरएफ, फ्लड पीएसी और स्थानीय गोताखोरों की मदद से निगरानी और सहायता का कार्य लगातार जारी है। अधिकारियों का कहना है कि यदि ऊपरी क्षेत्रों से पानी का प्रवाह इसी तरह जारी रहा तो अगले 24 से 48 घंटे जिले के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
रातभर में 10 सेंटीमीटर बढ़ा जलस्तर, खतरे के निशान से बेहद करीब पहुंची गंगा
सिंचाई विभाग के अनुसार सोमवार रात से मंगलवार सुबह तक गंगा के जलस्तर में लगभग 10 सेंटीमीटर की वृद्धि दर्ज की गई। पांचाल घाट पर गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु से ऊपर पहुंच चुका है और खतरे के निशान से कुछ ही दूरी पर बह रहा है। पक्के घाट की अधिकांश सीढ़ियां पानी में समा चुकी हैं और केवल ऊपरी दो सीढ़ियां ही दिखाई दे रही हैं। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि यदि जलस्तर में और वृद्धि हुई तो नदी का फैलाव और तेज होगा। अधिकारियों के अनुसार नरौरा बैराज से एक लाख क्यूसेक से अधिक पानी लगातार छोड़ा जा रहा है। इसी कारण गंगा के जलस्तर में निरंतर बढ़ोतरी हो रही है। मौसम विभाग द्वारा पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में भारी वर्षा की संभावना जताई गई है, जिससे आने वाले दिनों में स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

30 गांवों में बाढ़ जैसे हालात, खेतों से लेकर आबादी तक पहुंचा पानी
गंगा का बढ़ता जलस्तर अब केवल नदी तट तक सीमित नहीं रहा। सदर, अमृतपुर और कायमगंज तहसील के लगभग 30 गांव बाढ़ से प्रभावित हो चुके हैं। कटरी धर्मपुर, कटरी भीमपुर, कटरी शिकारपुर, सबलपुर, कंचनपुर, इमादपुर, पामरान पट्टी, भरखा, जसूपुर, सुंदरपुर, जोगराजपुर, नगला पंचम, धनी नगला, नगला खुशाली सहित अनेक गांवों में पानी खेतों और आबादी तक पहुंच चुका है। ग्रामीणों का कहना है कि कई स्थानों पर रातों-रात पानी बढ़ने से लोगों को घरों का सामान सुरक्षित स्थानों पर ले जाना पड़ा। पशुओं को ऊंचे स्थानों पर बांधा गया है और खेती योग्य भूमि पूरी तरह जलमग्न होने लगी है। धान, मक्का, सब्जियों और अन्य खरीफ फसलों को भी भारी नुकसान पहुंचने की आशंका है।
स्टेट हाईवे पर डेढ़ से दो फीट पानी, यातायात प्रभावित
अमृतपुर तहसील क्षेत्र में फर्रुखाबाद–बदायूं स्टेट हाईवे पर चित्रकूट डिप के पास मंगलवार सुबह लगभग डेढ़ फीट पानी भर गया। सोमवार रात से ही पानी सड़क के किनारे तक पहुंच गया था, लेकिन सुबह तक वह सड़क के ऊपर बहने लगा। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि यदि जलस्तर में और वृद्धि हुई तो इस मार्ग पर यातायात पूरी तरह बंद करना पड़ सकता है। वहीं शमशाबाद–शाहजहांपुर मार्ग पर भी जलभराव के कारण वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई है। सदर तहसील के बिलावलपुर क्षेत्र में भी संपर्क मार्गों पर दो फीट से अधिक पानी बह रहा है। कई स्थानों पर बैलगाड़ी और नाव ही लोगों के लिए एकमात्र सहारा बन गई है।

नावों के सहारे चल रहा जनजीवन
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सड़क संपर्क टूटने के कारण ग्रामीणों को नावों के सहारे आवागमन करना पड़ रहा है। दिलीप की मढ़ैया और आसपास के कई गांवों में नावों का नियमित संचालन किया जा रहा है। जिला प्रशासन ने राहत कार्यों के लिए विभिन्न तहसीलों में नावों और मोटरबोट की तैनाती की है। सदर क्षेत्र में कई नावें और मोटरबोट, कायमगंज क्षेत्र में अतिरिक्त नावें तथा अमृतपुर तहसील में भी राहत नौकाएं लगातार संचालित की जा रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बाजार, अस्पताल और विद्यालय तक पहुंचने के लिए अब नाव ही सबसे सुरक्षित माध्यम बन चुकी है।

180 परिवार पहुंचे शरणालय, 24 राहत केंद्र तैयार
बाढ़ की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने पहले से ही 24 अस्थायी बाढ़ शरणालय तैयार किए थे। इनमें से दो शरणालयों में लगभग 180 परिवारों को सुरक्षित पहुंचाया गया है। शरणालयों में भोजन, पेयजल, प्राथमिक चिकित्सा, शौचालय और आवश्यक दैनिक सुविधाओं की व्यवस्था की गई है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आवश्यकता पड़ने पर अन्य शरणालयों को भी तत्काल संचालित किया जाएगा। इसके अलावा जिले में 52 अस्थायी बाढ़ चौकियां भी सक्रिय कर दी गई हैं, जहां से जलस्तर की निगरानी और राहत कार्यों का संचालन किया जा रहा है।
स्कूलों में घुसा पानी, एक दर्जन गांवों की बिजली बंद
बाढ़ का असर शिक्षा व्यवस्था पर भी पड़ा है। धनी नगला, माखन नगला, फखरपुर और तीस राम की मढ़ैया सहित कई सरकारी विद्यालयों में बाढ़ का पानी भर गया है। इसके चलते इन विद्यालयों में पठन-पाठन प्रभावित हुआ है। वहीं सुरक्षा की दृष्टि से बाढ़ प्रभावित लगभग एक दर्जन गांवों की विद्युत आपूर्ति अस्थायी रूप से रोक दी गई है, ताकि करंट लगने जैसी दुर्घटनाओं से बचा जा सके। बिजली विभाग की टीमें लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
राहत एवं बचाव के लिए एनडीआरएफ, फ्लड पीएसी और गोताखोर तैनात
जिला प्रशासन ने संभावित आपात स्थिति से निपटने के लिए व्यापक तैयारियां की हैं। राहत एवं बचाव कार्यों के लिए एनडीआरएफ की एक टीम, मोटरबोट के साथ फ्लड पीएसी की एक कंपनी तथा 50 से अधिक प्रशिक्षित स्वयंसेवी गोताखोर तैनात किए गए हैं। इसके अलावा राजस्व, पुलिस, स्वास्थ्य, पशुपालन, सिंचाई और विद्युत विभाग की संयुक्त टीमें प्रभावित गांवों में लगातार भ्रमण कर रही हैं। प्रशासन ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें।
रामगंगा फिलहाल नियंत्रण में, लेकिन निगरानी जारी
जहां गंगा नदी लगातार उफान पर है, वहीं रामगंगा नदी का जलस्तर फिलहाल खतरे के निशान से नीचे बना हुआ है। हालांकि खो बैराज, रामनगर बैराज और हरेली बैराज से भी नियंत्रित मात्रा में पानी छोड़ा जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि यदि लगातार वर्षा जारी रही तो रामगंगा के जलस्तर पर भी प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए दोनों नदियों की चौबीसों घंटे निगरानी की जा रही है।
किसानों की बढ़ी चिंता, खरीफ फसलों पर संकट
बाढ़ का सबसे बड़ा असर किसानों पर पड़ता दिखाई दे रहा है। खेतों में पानी भरने से धान, मक्का, तिल, मूंगफली और सब्जियों की फसलें प्रभावित होने लगी हैं। पशुओं के चारे की भी समस्या खड़ी हो सकती है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पानी लंबे समय तक खेतों में रुका रहा तो फसलों को व्यापक नुकसान पहुंच सकता है, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति प्रभावित होगी।
स्वास्थ्य विभाग भी अलर्ट, महामारी रोकने की तैयारी
बाढ़ के बाद जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसे देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा टीमों को अलर्ट कर दिया है। आवश्यक दवाइयों, क्लोरीन की गोलियों और प्राथमिक उपचार सामग्री का भंडारण किया गया है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने लोगों से केवल स्वच्छ पानी पीने, दूषित भोजन से बचने और बच्चों तथा बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखने की अपील की है।
प्रशासन ने जारी की सतर्कता अपील
जिला प्रशासन ने गंगा किनारे रहने वाले लोगों से नदी के तेज बहाव वाले क्षेत्रों में न जाने, बच्चों को अकेले नदी किनारे न भेजने, नाव का उपयोग केवल प्रशिक्षित नाविकों के साथ करने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि यदि जलस्तर में और वृद्धि होती है तो अतिरिक्त गांवों को भी खाली कराया जा सकता है। राहत एवं बचाव दल पूरी तरह तैयार हैं और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए चौबीसों घंटे निगरानी रखी जा रही है।
अगले 48 घंटे महत्वपूर्ण
विशेषज्ञों का मानना है कि फर्रुखाबाद में बाढ़ की स्थिति अब पूरी तरह इस बात पर निर्भर करेगी कि ऊपरी क्षेत्रों में वर्षा कितनी होती है और नरौरा बैराज से आगे कितना पानी छोड़ा जाता है। यदि जलप्रवाह इसी गति से बढ़ता रहा तो गंगा खतरे के निशान को पार कर सकती है और बाढ़ का दायरा और विस्तृत हो सकता है। फिलहाल प्रशासन राहत और बचाव कार्यों के साथ-साथ लगातार जलस्तर की निगरानी कर रहा है। दूसरी ओर, गंगा किनारे बसे हजारों ग्रामीणों की निगाहें अब नदी के बढ़ते जलस्तर पर टिकी हैं, क्योंकि अगले कुछ दिन उनके लिए सबसे बड़ी परीक्षा साबित हो सकते हैं।






