
संवाद 24 तमिलनाडु। राजनीति में उस समय हड़कंप मच गया जब पुलिस की एक विशेष टीम ने द्रविड़ मुनेत्र कषगम (डीएमके) के वरिष्ठ नेता और राज्य के प्रमुख विपक्षी चेहरे उदयनिधि स्टालिन को उनके चेन्नई स्थित आवास से हिरासत में ले लिया। पुलिस की यह अचानक हुई कार्रवाई तंजावुर में कावेरी जल विवाद को लेकर आयोजित एक जनसभा के दौरान दी गई विवादित टिप्पणी के सिलसिले में दर्ज मामले के बाद हुई है। तंजावुर पुलिस द्वारा दर्ज प्राथमिकी (FIR) के आधार पर यह कार्रवाई की गई है, जिसके बाद पुलिस टीम उदयनिधि को पूछताछ और अग्रिम प्रक्रिया के लिए अपने साथ ले गई। इस नाटकीय घटनाक्रम ने तमिलनाडु के राजनीतिक गलियारों में एक नया तूफान खड़ा कर दिया है।
तंजावुर रैली और टिप्पणी से भड़का राजनीतिक विवाद
पूरे मामले की शुरुआत सोमवार को तंजावुर में आयोजित डीएमके की एक विशाल जनसभा से हुई। यह रैली कावेरी नदी के जल बंटवारे से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे संवेदनशील मुद्दे पर बुलाई गई थी। जनसभा में कार्यकर्ताओं और समर्थकों की भारी भीड़ मौजूद थी। भाषण के दौरान उदयनिधि स्टालिन ने राज्य सरकार और विरोधी राजनीतिक दलों पर तीखे हमले बोले। हालांकि, संबोधन के दौरान भीड़ की तरफ से नारेबाजी और कुछ अनपेक्षित प्रतिक्रियाओं के बीच उन्होंने एक ऐसी टिप्पणी कर दी, जिसे विरोधी दलों ने बेहद अमर्यादित और आपत्तिजनक करार दिया। यह टिप्पणी तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो गई और राजनीतिक दलों के बीच जुबानी जंग छिड़ गई।
टीवीके की शिकायत और तंजावुर पुलिस की त्वरित कार्रवाई
उदयनिधि की टिप्पणी के सामने आते ही विरोधी राजनीतिक दलों, विशेष रूप से तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) ने इसका पुरजोर विरोध किया। टीवीके के पदाधिकारियों ने इस बयान को सार्वजनिक मर्यादा का उल्लंघन बताते हुए तंजावुर में पुलिस के समक्ष औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि रैली में दिए गए बयान से न केवल जनभावनाएं आहत हुई हैं, बल्कि यह सार्वजनिक मंचों की गरिमा के खिलाफ है। प्राप्त शिकायत के आधार पर तंजावुर पुलिस ने विभिन्न कानूनी धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया। इसके बाद मंगलवार सुबह ही चेन्नई के नीलांकरई स्थित उदयनिधि स्टालिन के निजी आवास पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया। संयुक्त पुलिस आयुक्त (Joint Commissioner of Police) डॉ. पी. विजयकुमार के नेतृत्व में पहुंची पुलिस टीम ने उन्हें हिरासत में लिया और एक पुलिस बस के जरिए तंजावुर ले जाने की तैयारी शुरू कर दी।
हाईकोर्ट का रुख और कानूनी सुरक्षा की मांग
हिरासत की कार्रवाई से ठीक पहले, उदयनिधि स्टालिन के कानूनी सलाहकारों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मद्रास उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। उनके वकीलों ने न्यायमूर्ति जी. के. इलांथिरैयन की पीठ के समक्ष याचिका का विशेष उल्लेख करते हुए गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण और अग्रिम जमानत याचिका पर त्वरित सुनवाई का अनुरोध किया। कोर्ट में याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि दर्ज किया गया मामला राजनीतिक द्वेष से प्रेरित है और इसके पीछे मुख्य उद्देश्य विपक्षी नेताओं की आवाज को दबाना है। अदालत ने मामले पर तत्काल सुनवाई की आवश्यकता पर विचार करते हुए पुलिस को याचिका पर अंतिम निर्णय आने तक संयम बरतने का मौखिक परामर्श भी दिया था, लेकिन तंजावुर पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर के क्रियान्वयन के तहत हिरासत की प्रक्रिया को अंजाम दे दिया गया।
उदयनिधि का पलटवार: “फर्जी मामलों से घबराने वाले नहीं”
पुलिस हिरासत में लिए जाने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए उदयनिधि स्टालिन ने पूरी कार्रवाई को पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित और ‘झूठा’ (Forged) करार दिया। उन्होंने कहा कि जब से विरोधी दल सत्ता में आए हैं, तब से डीएमके के विधायकों और प्रमुख नेताओं को निशाना बनाकर फर्जी केस दर्ज किए जा रहे हैं। उदयनिधि ने आक्रामक रुख अपनाते हुए कहा, “हम कानून का पालन करने वाले नागरिक हैं और इस मनगढ़ंत मामले का मुकाबला अदालत में पूरी मजबूती के साथ कानूनी तौर पर करेंगे। इस तरह की पुलिसिया कार्रवाई और बदले की राजनीति से डीएमके के कार्यकर्ताओं का मनोबल टूटने वाला नहीं है। हम जनता के हक और कावेरी जल विवाद जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी आवाज उठाते रहेंगे।”
राज्य में बढ़ा राजनीतिक तनाव और पुलिस अलर्ट
इस घटनाक्रम के बाद चेन्नई से लेकर तंजावुर तक सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। डीएमके कार्यकर्ताओं ने जगह-जगह एकत्र होकर पुलिस कार्रवाई के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करना शुरू कर दिया है। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि पुलिस प्रशासन निष्पक्ष कार्रवाई करने के बजाय सत्ताधारी दल के इशारे पर काम कर रहा है। संवेदनशील परिस्थितियों को देखते हुए राज्य के प्रमुख सरकारी कार्यालयों, पुलिस थानों और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण चौराहों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। कावेरी जल विवाद जैसे जनहित के संवेदनशील मुद्दे से शुरू हुआ यह घटनाक्रम अब राज्य की भावी राजनीतिक दिशा और प्रशासनिक निष्पक्षता पर गंभीर बहस छिड़ चुका है।






